डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किए गए कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर

वाले देवकीनंदन ने मात्र 17 वर्ष की उम्र में ही भागवत कथा कहना शुरू कर दिया था।

मथुरा। श्रीमद्भागवत एवं श्रीराम कथाओं से विश्व में सनातन धर्म एवं आध्यात्म का प्रचार कर रहे देवकीनंदन ठाकुर को बैंगलोर में यूनिवर्सिटी ने डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया है। बैंगलौर में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान बुधवार को ग्लोबल ट्राइम्प वर्चुअल यूनिवर्सिटी (global triumph virtual university ) की ओर से उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गयी। यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. संजीव बंसल एवं एडवाइजर डॉ. नवल किशोर शर्मा ने देवकीनंदन ठाकुर को डॉक्ट्रेट ड्रैस कोड पहनाकर मैडल तथा सर्टिफिकेट प्रदान किया।

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यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. संजीव बंसल ने कहा कि मानव जीवन से जुड़ी कई समस्याओं का निदान अध्यात्म और धर्म के चिंतन में मिलता है। प्राचीन भगवद् कथायें एवं प्रसंग वर्तमान समय में भी व्यवहारिक रूप से मानव को एक दूसरे से जोड़ने का कार्य करते हैं। देवकीनंदन ठाकुर देश-दुनिया में अध्यात्म एवं भगवद् कथाओं के माध्यम से शांतिपूर्ण संदेशों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। आध्यात्मिक चिंतन एवं सामाजिक सेवा कार्यों के लिये विश्वविद्यालय उन्हें सम्मानित कर स्वंय को गर्वित अनुभव कर रहा है।

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यूनिवर्सिटी से मिले सम्मान को अपनी माँ को समर्पित करते हुये भागवत कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि यह कृष्ण भक्तों के अथाह प्रेम और सनातन धर्म के संदेशों का सम्मान है। पण्डाल में मौजूद भक्तों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर किसी के शरीर में रोग लग जाएं तो इसे डॉक्टर ठीक करते हैं लेकिन अगर किसी के मन में रोग लग जाएं तो उसे भगवान की कथा ठीक करती है। भगवान ने अपनी कृपा के वर्णन का अवसर देकर पहले ही जीवन कृतार्थ कर दिया है।

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17 वर्ष की आयु से कर रहे हैं भगवद् कथा

बालवस्था में वृन्दावन की रासलीला में श्री राधा-कृष्ण स्वरूप धारण करने वाले देवकीनंदन ने मात्र 17 वर्ष की उम्र में ही भागवत कथा कहना शुरू कर दिया था। उन्होंने सन् 1997 में दिल्ली से कथाओं का प्रारम्भ किया जो आज तक अनवरत चल रहा है। आज देश के विभिन्न स्थानों के अलावा अन्तराष्ट्रीय स्तर पर आध्यात्मिक प्रवचन एवं भगवद् कथाओं का प्रचार कर रहे हैं।

अमित शर्मा
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