नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने अपनी किताब इनसाइडर में बहुत से खुलासे किए थे। इसके बाद वे इस किताब की दूसरी कड़ी भी लिख रहे थे, लेकिन दिसंबर 2004 में उनकी मौत के बाद यह किताब अधूरी रह गई। हालांकि अब उनकी किताब को पूरा करने में विनय सीतापति नाम के शख्स जुटे हैं। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई में किताब को रिलीज किया जाएगा। इस किताब में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उपजे हालात, राजीव-सोनिया से रिश्ते और बाबरी विध्वंस का भी जिक्र किया गया है।
राव पर लगा था ये आरोप
किताब में लिखा गया है कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी के एक करीबी कांग्रेस नेता ने नरसिम्हा राव को फोन कर बताया था कि दिल्ली पुलिस के एसएचओ से लेकर कमिश्नर तक सीधे दिल्ली पीएमओ को रिपोर्ट करेंगे। उस वक्त राव गृहमंत्री थे। ऐसे में लगता है कि यह फैसला राव को दरकिनार करने के लिए लिया गया था। इसके पीछे जो वजह बताई गई वो ये थी कि दिल्ली की सड़कों पर हिंसा पर आसानी से नियंत्रण पाया जा सकेगा। वहीं दूसरी वजह ये थी कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली की सड़कों पर पुलिस फोर्स उतनी मुस्तेदी से काम न कर सके, जितनी सिख विरोधी हिंसा रोकने के लिए जरूरी था। किताब के मुताबिक राव पर ये आरोप है कि उन्होंने सिख विरोधी हिंसा को रोकने की जगह विदेशी मेहमानों के आवभगत में लगे रहे। उन्होंने संविधान की जगह अपनी पार्टी की आवाज को तवज्जो दी।
सोनिया-राव के रिश्तों में आई थी खटास
किताब के मुताबिक 1993 के बाद सोनिया गांधी और राव के रिश्तों में खटास आ गई थी। राव को यह लगने लगा था कि सोनिया गांधी उन्हें पीएम के पद से हटाना चाहती हैं। सोनिया ने राव की बजाए अर्जुन सिंह और एनडी तिवारी पर ज्यादा भरोसा करना शुरु कर दिया था।
कांग्रेस ने अकेला छोड़ दिया था राव को
किताब में बाबरी ढांचा विध्वंस का भी जिक्र किया गया है । इसके लिखा गया कि मस्जिद के विध्वंस के एक दिन बाद राव ने कहा था कि वे फिर से मस्जिद को बनवाएंगे। हालांकि उनके इस बयान का केबिनेट के कुछ सदस्यों ने विरोध किया था। किताब में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि राव कांग्रेस के पहले गैर गांधी पीएम थे। वो गांधी परिवार के आभामंडल ने निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन कामियाब नहीं हो सके। पीएम पद से हटने के बाद कांग्रेस पार्टी ने एक तरह से उन्हें अकेला कर दिया था।