2 अगस्त 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

चुनाव आयोग ने लांच की नई ईवीएम, कर्नाटक चुनाव में किया जाएगा इस्तेमाल

कर्नाटक के 1800 बूथों पर नई ईवीएम मशीन से चुनाव करवाया जाएगा। चुनाव आयोग ने मार्क 3 नाम से न्यू जेनरेशन ईवीएम को लॉन्‍च किया है।
2 min read
Google source verification
evm

नई दिल्लीः ईवीएम पर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने यू जेनरेशन ईवीएम को लॉन्‍च किया है। आयोग का कहना है कि नई ईवीएम 'टेंपर प्रूफ' होगी। इसको नया नाम मार्क 3 दिया गया है। इससे पहले विपक्षी दलों का आरोप था कि पुरानी ईवीएम को हैक करके बीजेपी को फायदा पहुंचाया जा रहा है। कई राज्यों में बीजेपी की जीत के बाद ईवीएम पर कई राजनीतिक दलों ने गंभीर आरोप लगाए थे। चुनाव आयोग का कहना है इसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। आयोग ने बताया कि अगर कोई भी शख्स इसमें कोई बदलाव करना चाहे तो यह अपने आप बंद हो जाएगी। सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल एक बार ही सॉफ्टवेयर कोड लिखे जा सकते हैं। ईवीएम की खूबियां बताते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि इसको इंटरनेट या वाईफाई जैसे किसी नेटवर्क से नहीं जोड़ा जा सकता।

कर्नाटक चुनाव में किया जाएगा इस्तेमाल
12 मई को कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव में नई जेनरेशन की ईवीएम मार्क 3 का इस्तेमाल किया जाएगा। चुनाव आयोग ने कहा कि प्रयोग के तौर पर विधानसभा चुनाव के दौरान 1800 बूथों पर नई ईवीएम का प्रयोग किया जाएगा। इसके अलावा आगामी लोकसभा चुनाव 2019 में इसे देश के सभी बूथों पर इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा रही है। अगर नई ईवीएम का प्रयोग सफल रहा तो कर्नाटक पहला राज्य होगा जहां पर नई ईवीएम मशीन से चुनाव होगा।

आधुनिक तकनीक से लैस है मार्क 3 ईवीएम
मार्क 3 ईवीएम आधुनिक तकनीक से लैस है। इसमें 24 बैलेट यूनिट और 384 उम्मीदवारों की जानकारी सेव की जा सकती है। मौजूदा समय में जो ईवीएम चुनावों में इस्तेमाल की जा रही है उसका नाम मार्क 2 है। इसमें सिर्फ 4 बैलेट यूनिट और 64 प्रत्याशियों की जानकारी एकत्रित की जा सकती थी। देश के अलग-अलग राज्यों में होने वाले चुनावों में इस्तेमाल की जाने वाली यह ईवीएम भारत में ही बनाई जाती है। इसे भारत इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स लिमिटेड और बेंगलुरु एंड इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया बनाती है। ईवीएम में डाले जाने वाले सॉफ्टवेयर भारत में लिखे जाते है उसके बाद ही इसे चिप बनाने वाली विदेशी कंपनियों को दिया जाता है। ज्यादातर अमरीका और जापान की कंपनियां से बनी चिप इसमें इस्तेमाल की जाती है।