जबलपुर। मुंबई सिलसिलेवार बम विस्फोट मामले में यरदवदा जेल में सजा काट रहे फिल्म अभिनेता संजय दत्त गुरूवार को 103 दिन पहले जेल से हुए। संजय दत्त ने अपने कॅरियर में अनेक बॉलीवुड फिल्में दी हैं। ऐसा माना जा रहा है कि जेल से बाहर आते ही फिर से वे अपने अधूरे और नए प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू करेंगे। संजय दत्त के फैंस एक बार फिर उन्हें बड़े पर्दे पर देखने के लिए बेताब हैं। संजय दत्त की फिल्मों के प्रसिद्ध डॉयलॉग लोगों के बीच छाए रहे हैं खासकर युवाओं की जुबान पर तो ये अब भी चढ़े हैं। यहां पढि़ए संजय दत्त की फिल्मों के फेमस डॉयलाग-
शराफत की किताब में मुझे खलनायक कहते हैं । ये संजय दत्त के पैसा वसूल डायलॉग में से एक है। सुभाष घई की फिल्म खलनायक का ये डायलॉग काफी दिनों तक लोगों की जुबान पर रहा था।
तुम जैसे जितने हरामजादे इस शहर में पैदा होते हैं ना उनके सबकी एक फाइल बनके मेरे ऑफिस में आती है। अब इतनी फाइल हो गई है कि पैर रखने की जगह नहीं है। ऑफिस साफ करने का सिर्फ एक ही रास्ता है। आदमी खत्म तो फाइल्स खत्म। संजय दत्त का ये डायलॉग देखने के लिए लोग आज भी लोखंडवाला फिल्म देखते हैं।
एक बात याद रखना इंस्पेक्टर, मैं वापस आउंगा। उस लड़की को छुपा कर, वापस जरुर आउंगा इंस्पेक्टर। और उस दिन आखरी बार तेरी फोटो जरुर छपेगी, जिंदा नहीं मुर्दा। फिल्म सड़क का ये डायलॉग भी लोगों के बीच आम रहा था।
मुंबई पे राज करता हूं...राज। (वास्तव)
ट्रिगल दबाया और खेल खलास। (वास्तव)
जब दोनों गाल पर थप्पड़ पड़ जाए तो क्या करने का, ये बापू ने कहां अपने को ...(मुन्ना भाई)
जिंदगी जीने का मजा तब आता है दोस्त, जब मौत की अंगुलियां थामकर भाग जाए। (आतिश)
उड़ा दो साले के भेजे को। मैं भी देखना चाहता हूं कि इसमें घास भरा है या भूसा...। (कांटे)
वक्त ने तुम्हे हमेशा धोखा दिया है, लेकिन इस बार वो तुम्हारे साथ चलेगा। (दीवार)
तुम क्या लेकर आए हो और क्या लेकर जाओगे। ( अग्रिपथ)
एक गोली डाली, पांच खाली...सिर पे तानी, खोपड़ी खाली। (लक)
सवाल ये नहीं है कि बार में कितना दारू है सवाल ये कि तू कितना पी सकता है। (कांटे)