फिर भी गणेशजी की भूख शांत नहीं हो रही थी। यह देख कुबेर परेशान हो गए, लेकिन उन्हें अपनी भूल का भी अहसास हो गया था। घबराकर वे भोलेनाथजी के पास पहुंचे और हाथ जोड़कर माफी मांगते हुए बोले- भगवान, मैं अपने कर्म से बेहद शर्मिंदा हूं और मैं समझ गया हूं कि मेरा अभिमान आपके आगे कुछ भी नहीं है।