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जब कुबेर के घर भोजन करने बैठे गणेश, तो सब हो गए परेशान

जब कुबेर भगवान को धन-वैभव पर अभिमान हो गया, तो उन्होंने सोचा कि मेरे पास इतनी समृद्धि है तो क्यों न मैं शंकर भगवान को ही अपने घर पर भोजन का निमंत्रण दे आऊं और अपना वैभव उन्हें दिखलाऊं।

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Manish Geete

Sep 08, 2016

ganesha stories for Kids

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एक बार की बात है जब कुबेर भगवान को धन-वैभव पर अभिमान हो गया, तो उन्होंने सोचा कि मेरे पास इतनी समृद्धि है तो क्यों न मैं शंकर भगवान को ही अपने घर पर भोजन का निमंत्रण दे आऊं और अपना वैभव उन्हें दिखलाऊं। यह सोच लेकर कुबेर भगवान कैलाश पर्वत पहुंच गए और उन्होंने भगवान भोलेनाथ को भोजन पर पधारने का आग्रह किया।


भोलेनाथ को कुबेर के आने का उद्देश्य समझ आ गया था। उन्होंने कुबेर से कहा- हम तो नहीं आ सकते हैं। आप इतने आदर से निमंत्रण दे रहे हैं तो हम अपने स्थान पर गणेश को भेज देते हैं।


भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के आदेश पर गणेशजी ने इस निमंत्रण को सहज ही स्वीकार कर लिया। इसी बीच भगवान गणेश को भी समझ आ गया था कि कुबेर भगवान भोजन पर क्यों बुला रहे हैं। उन्होंने कुबेर का अभिमान तोड़ने की ठान ली। वे अपने साथ में अपने मूषक को भी ले गए।


कुबेर के वैभवशाली महल में गणेशजी और मूषक पहुंच गए। उन्हें भोजन परोसरना शरू कर दिया गया। उनके दिखावे के लिए सोने-चांदी के बर्तनों और अति-स्वादिष्ट पकवान परोसे जा रहे थे। भगवान गणेश ने एक-एक करके उन्हें खाना शुरू कर दिया। कुछ समय में ही सारे पकवान खत्म होने लगे। भगवान गणेशजी फिर रुकने वाले नहीं थे।


गणेशजी की भूख शांत नहीं हो रही है। यह देख कुबेर भगवान समेत सभी लोग हैरान होने लगे। खाना खत्म हो गया तो उन्होंने बर्तन ही खाने शुरू कर दिए। एक के बाद हीरे-मोती, जवाहरात भी खाने लगे।


फिर भी गणेशजी की भूख शांत नहीं हो रही थी। यह देख कुबेर परेशान हो गए, लेकिन उन्हें अपनी भूल का भी अहसास हो गया था। घबराकर वे भोलेनाथजी के पास पहुंचे और हाथ जोड़कर माफी मांगते हुए बोले- भगवान, मैं अपने कर्म से बेहद शर्मिंदा हूं और मैं समझ गया हूं कि मेरा अभिमान आपके आगे कुछ भी नहीं है।

भोलेनाथ के आगे नतमस्तक होने के बाद गणेशजी वापस लौट आए और धन के देवता कुबेर को सबक सिखाने में गणेशजी सफल रहे।


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