1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नगर के सभी वाटर एटीएम सूखे, नहीं बुझ पा रही लोगों की प्यास

लापरवाही: विभागीय अधिकारी नहीं दे रहे हैं ध्यान

3 min read
Google source verification
water scarcity

नगर के सभी वाटर एटीएम सूखे, नहीं बुझ पा रही लोगों की प्यास

मुंगेली. गर्मी का भीषण रूप धीरे-धीरे आने के साथ ही पानी की किल्लत होनी शुरू हो गयी है। गांव से शहर आने वाले ग्रामीणों को चैत्र माह की बढ़ती तपिश और गर्मी में इस बार पिछले सालों के समान नगर में जन कल्याणी भाव नहीं दिख रहा है, जैसा कि पिछले वर्षों में प्याऊ घर के रूप में मिल रहा था। नगर में अनेक जगहों पर बड़े व्यापारी या समाज सेवा के प्रति अग्रणी समूह प्याउ की व्यवस्था करते थे। इसका अधिक फायदा गांवों से आए लोग उठाकर अपनी प्यास बुझाते थे। ऐसे समूह के सदस्यों ने बताया कि वे तो प्याउ की व्यवस्था करने का तैयार हैं। मगर प्याऊ पर दिन भर बैठकर पानी पिलाने के लिए काम करने वाले नहीं मिल रहे हैं। इसके कारण प्याऊ की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। दूसरी ओर किसी राजनीतिक दल का इस ओर ध्यान नहीं है। हालॉकि अभी तक चुनाव प्रचार की गहन मारामारी और भीषण गर्मी का आभास भी कहीं नजर नहीं आ रहा है। कार्यकर्ताओं को चुनाव प्रचार से अवकाश नहीं है। उन्हें प्यास लगने का सवाल ही नहीं। जहां भी जलपान गृहों में जाते हैं, पानी के बदले ठंडे पेय पदार्थंों से अपनी प्यास बुझाते है।
नगर के पांच-सात स्थानों में लाखों रुपए की लागत से वाटर एटीएम लगाए गए हैं। जो देखरेख के अभाव में सूखे पड़े हैं। इनमें पानी की एक बूंद भी नसीब नहीं होता। न जिला प्रशासन को इसकी सुध है और न नगर पालिका प्रशासन ध्यान दे पा रहा है। आज जब मानव श्रम की कमी के कारण मटका वाले प्याऊ की कमी हो रही है। ऐसे में प्यास बुझाने के लिए एक मात्र वाटर एटीएम दिखता है। नगर में सर्वाधिक आवाजाही का केंद्र बस स्टैण्ड है, जहां वाटर एटीएम तो लगाया गया है, लेकिन उसमें से पानी गायब है। दूसरा वाटर एटीएम सब्जी मंडी बुधवारी में लगा है और वह भी सूखा है। तीसरा वाटर एटीएम स्टेडियम में लगाया गया है, यह एटीएम भी सूखा पड़ा है। वहीं जिला अस्पताल में लगा चौथा वाटर एटीएम भी सूखा पड़ा है। इन वाटर एटीएम को ठीक करवाने का ख्याल प्रशासन को नहीं है। बस स्टैण्ड में दो-तीन हैण्डपंप लगे हैं, पर वे पानी नहीं दे रहे हैं। इसके बावजूद किसी भी जनप्रतिनिधि को इस ज्वलंत समस्या की तरफ देखने का अवकाश नहीं है। हजारों यात्रियों को उनके गंतव्य तक लाने ले जाने वाले बस स्टैण्ड में विगत वर्षों से केवल एक सुलभ शौचालय बन पाया है। यहां पर पुरुषो का बोलबाला रहता है, और महिलाएं यहां जाने से हिचकती हैं। एक भी मूत्रालय नहीं है। वैसे ही पास ही स्थित कृषि उपज मंडी के टृयूबवेल का पानी अनवरत बहता ही रहता है। उसका उपयोग प्याऊ घर बनाने के लिए किया जा सकता है। लेकिन इस पर सोचने का अवकाश किसके पास है। नगर पानी की कमी की समस्या तो है, मगर अनावश्यक रूप से पानी बरबाद करने की समस्या अधिक गंभीर है। सार्वजनिक नलों में टोटियां ही नहीं है। नगर पालिका लगाए भी तो कुछ ही घंटों में उसकी चोरी हो जाती है। थक हारकर नपा ने टोटी लगाना ही बंद कर दिया। इसके कारण सप्लाई के समय पानी बेकार बहते रहता है। कोई बंद करने वाला नहीं है। पाइपों से पानी लिकेज हो रहा है। तो कोई उसे दूर करने वाला नहीं है। महामाई वार्ड के सोनार पारा में या पाठक पारा में पानी की समस्या टेंकर बुलाकर दूर की जाती है। मगर संकरी गली में बसे छोटी मस्जिद के पीछे और दुर्गा मंदिर वाली गली में पानी का टैंकर जा पाना कठिन होने के कारण वहां पर पानी का अभाव बना रहता है। इसलिए जिला प्रशासन और नगर पालिका प्रशासन को सम्यक भाव से चिंतन कर नगरवासियों की प्यास बुझाने का उपाय और प्रयास किया जाना चाहिए।