नर्मदापुरम

परीक्षा में नहीं होंगे फेल इसलिए न बच्चे गंभीर रहे न ही स्कूल प्रबंधन

5वीं-8वीं के परीक्षा परिणाम के बाद विशेषज्ञ बोले परीक्षा से बढ़ती है प्रतिस्पर्धा की भावना

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परीक्षा में नहीं होंगे फेल इसलिए न बच्चे गंभीर रहे न ही स्कूल प्रबंधन

नर्मदापुरम. शिक्षा का अधिकार अधिनियम में 8वीं तक बच्चों को पास करने के नियम से बच्चों को पढ़ाई के प्रति लापरवाह बना दिया था। इस नीति के तहत आठवीं तक छात्रों को बिना फेल किए प्रमोट किया जाता है। जबकि इसके साथ निरंतर और व्यापक मूल्यांकन (सीसीई) भी जुड़ा हुआ था जिसे कभी भी लागू करने का प्रयास नहीं किया गया है। अधिनियम के अनुच्छेद 16 के अनुसार हर बच्चे को प्राथमिक शिक्षा दिए जाने का प्रावधान है लेकिन उसका निरंतर और व्यापक मूल्यांकन भी जरूरी है। परीक्षा में फेल नहीं होंगे इस वजह से न तो बच्चे पढ़ाई के प्रति गंभीर रहे न ही स्कूल प्रबंधन यही कारण है कि 12 साल बाद इस तरह परीक्षा होने पर परिणाम प्रभावित हो गया। यही कारण है कि अब बच्चों के साथ स्कूल प्रबंधन और पालकों को भी गंभीर होने की जरूरत है। परीक्षा तो हमेश ही जरूरी रही है लेकिन उसमें यह भी डर बना रहना चाहिए कि मेहनत नहीं करेंगे तो फेल हो जाएंगे। इसलिए मैं तो इस तरह की परीक्षा पद्धति का ही पक्षधर हूं।
तनाव न लेकर शुरू करें रिविजन
शिक्षाविद पटेल ने कहा कि है एफ ग्रेड मिलने वाले बच्चों को तनाव नहीं लेना है और रिविजन शुरू करना चाहिए। स्ट्रैस आजकल लाइफस्टाइल का पार्ट बन गया है और हर कोई अलग-अलग तरीके के तनाव को झेल रहा है। ऐसे में जरूरी है कि आप ये ना सोचे कि आप अकेले तनाव में हैं। दूसरी बात ध्यान रखें कि तनाव के बारे में जितना कम सोचेंगे उतना बेहतर होगा। तनाव से दूर रहने के लिए जरूरी है कि अपने आप को व्यस्त रखें। जितना खाली वक्त होगा उतना नेगेटिव विचार दिमाग में आते हैं इसलिए बच्चों के लिए सबसे अच्छा है कि वे पढ़ाई के साथ खेलकूद में व्यस्त रहें।

Published on:
18 May 2023 09:32 pm
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