7 नवंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

नर्मदा में प्रदूषण बढ़ा, राज्य मछली विलुप्ती की कगार पर

नर्मदा मेें बढता प्रदूषण चिंता का विषय है। प्रदूषित होते जल में प्रयासों के बाद भी महाशीर के अस्तित्व का संरक्षण नहीं हो पा रहा है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नर्मदापुरम

•

image

Deepesh Awasthi

•

Updated: 16 Jan 2026, 4:05 PM IST

Narmadapuram news

नर्मदा नदी में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। बढ़ता प्रदूषण चिंता का विषय है. (photo patrika)

राज्य मछली महाशीर (बाड़स) की भरमार कुछ सालों पहले नर्मदा नदी में होती थी। अब महाशीर मछली विलुप्त की कगार पर है। इसका प्रमुख कारण नर्मदा नदी के जल में लगातार बढ़ता जा रहा प्रदूषण है। महाशीर मछली मीठे, स्वच्छ और बहते पानी में जीवित रहती है। साल 1950 में महाशीर मछली 30 प्रतिशत थी। कुछ सालों बाद घटकर 2 प्रतिशत हो गया था।

प्रदूषित होते जल में प्रयासों के बाद भी महाशीर के अस्तित्व का संरक्षण नहीं हो पा रहा है। वास्तविक तौर पर जल शुद्ध होता तो महाशीर के अंडे पानी में नजर आते, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। रासायनिक पानी, खेतों से आने वाला रासायनिक पानी और सीवेज का पानी भी मछलियों के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। फिलहाल लिबयो केलवासु, नॉटऑफ केरस आदि प्रजाती की मछलियां नर्मदा नदी में दिखती हैं।

सफल नहीं हो रहे प्रयास

राज्य शासन ने महाशीर मछली को विलुप्त होने से बचाने के लिए ही 26 सितंबर 2011 को राज्य मछली का दर्जा दिया था। मछलियों की अन्य प्रजातियां भी विलुप्ति की कगार पर है। शासन द्वारा कुछ हिस्सों में कृत्रिम जल धाराओं से नदी के पानी को प्रवाहित कर महाशीर के संरक्षण पर भी काम चल रहा है, लेकिन पूर्ण रूप से सफल नहीं हो रहा। महाशीर मछली की संख्या नहीं बड़ी।

यह मछलियां भी विलुप्त हो रही

गुरुगुच छोटी प्रजाति की यह मछली भी लगभग विलुप्त हो चुकी है।नरेन मछली भी संकट में है और आसानी से नहीं मिलती। इसके साथ ही अंडूस, लेबियोहोगा, बाटा स्पिसीस, गेगरा,बाम ,कालोट, बंगाली, पड़न, दीगर जैसी कई अन्य मछलियां भी खतरे में हैं।

प्रदेश के अलावा यहां मिलती हैं महाशीर

दूषित पानी में यह जिंदा नहीं रह पाती है। इस कारण विलुप्ती की कगार पर है। महाशीर मछली प्रवाहित स्वच्छ जल धाराओं में ही प्रजनन करती है। महाशीर मध्यप्रदेश के अलावा पंजाब, हिमाचल और उत्तराखंड की कुछ नदियों सहित एशिया में पाकिस्तान, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका और थाइलैंड में भी बहुतायत में मिलती है। कावेरी, नर्मदा, सरयू प्रमुख हैं। इसके साथ ही हिमालयी नदियों में भी मिलती है।

एक्सपर्ट व्यू

मछलियाें की विलुप्ती का सबसे बड़ा कारण जल प्रदूषण है। सीवेज का पानी नर्मदा नदी में मिल रहा है। मछली विभाग भी सुस्त पड़ा हुआ है। मछलियों की कई प्रजातियां अब नहीं दिखती। फिलहाल लिबयो केलवासु, नॉटऑफ केरस आदि मछलियां दिखती हैं। मछलियाें के संरक्षण के लिए काम होना चाहिए। घाटों पर रह रहे मछवारों से मछलियों के रख रखाव पर बात होेनी चाहिए।

आशा ठाकुर, रिटायर्ड एचओडी एंड असिस्टेंट प्रोफेसर शासकीय नर्मदा कॉलेज