4 फ़रवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सुविधाओं की कमी से जूझ रही अंग्रेजों के जमाने की जीआरपी चौकी

नौ स्टेशनों की सुरक्षा का जिम्मा फिर भी है स्टॉफ की कमी, बिजली गुल होते ही अंधेरे में डूब जाती है चौकी, अंग्रेजी शासनकाल से चली आ रही है जीआरपी चौकी

2 min read
Google source verification
railway station

शकील नियाजी/पिपरिया. अंग्रेजों के शासनकाल में बनी जीआरपी चौकी सुविधाओं की कमी से जूझ रही है। सबसे बड़ी समस्या है बिजली गुल होने पर होने वाली परेशानी की। क्योंकि बिजली गुल होते ही चौकी में अंंधेरा छा जाता है। किसी भी अधिकारियों के फोन आते ही जानकारी देने के लिए अधिकारी-कर्मचारियों को रोशनी की चाह में दस्तावेज लेकर प्लेटफॉर्म की तरफ दौडऩा पड़ता है। स्टाफ की कमी, नव निर्माण के अभाव से जूझती चौकी बस जोड़तोड़ से ही चल रही है। हजारों यात्रियों के रोजाना आवागमन वाले स्टेशन पर अब तक महज जीआरपी चौकी पर ही पूरी सुरक्षा की जवाबदारी है जबकि नजदीक ही बने गाडरवारा को थाने का दर्जा प्राप्त है। यहां टीआई सहित बड़े स्टॉफ की तैनाती है जबकि यहां करीब १५ अपडाउन यात्री ट्रेनों के स्टॉपेज है।

सीमित स्टाफ से होती है परेशानी
चौकी में पदस्थ स्टॉफ में दशकों बाद मामूली आरक्षकों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है जो पर्याप्त नही है। वर्तमान में यहां ०१ एसआई, ०२ एसआई, ०२ एससी, १० आरक्षक, ०१ महिला आरक्षक तैनात हंै। दुर्घटना होने व ट्रेन हादसों में मर्ग आदि के दौरान स्टॉफ वहां लग जाता है तो अनेक बार चौकी खाली ही पड़ी रहती है।
९ स्टेशन ७० अप डाऊन ट्रेन, स्टाफ का टोटा
रेलवे स्टेशन पर दैनिक साप्ताहिक सभी मिलाकर अप-डाउन की करीब ७० यात्री ट्रेनों का स्टॉपेज है। अब इलेक्ट्रिक पावर चेंज करने का जंक्शन भी बन गया है। ९ स्टेशन, जुन्हैटा, बनखेड़ी, पिपरिया, शोभापुर, सोहागपुर, गुरमखेड़ी, वागरातवा, सोनतलाई, गुर्रा व इटारसी आऊटर तक जीआरपी पर सुरक्षा और देख रेख की जिम्मेवारी है लेकिन स्टॉफ के नाम पर कोई इजाफा नहीं हुआ है।
कागजों पर चौकी का नव निर्माण
चौकी का नव निर्माण प्रस्तावित है, लेकिन आज तक उसे मंजूरी नहीं मिली है। अधिकारी वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से अनेक बार प्रस्ताव भेज चुके हैं। स्वीकृति के अभाव में चौकी का नव निर्माण अधर में है।
लिखित में पत्र देंगे
जनरेटर से पहले कनेक्शन रेलवे ने दिया था उसे निकाल दिया है। मौखिक कनेक्शन जोडऩे को कहा है। लिखित में पत्र देंगे बिजली गुल होने पर काफी परेशानी होती है। स्टॉफ भी कम है लैंडलाइन फोन पिछले बिल के कारण डिस्कनेक्ट है। उसे भी सुचारु कराने की कार्रवाई करेंगे।
-बीएम द्विवेदी, चौकी प्रभारी
दौडना पड़ता है प्लेटफार्म की तरफ
रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म क्र. ०२ पर बनी अंग्रेजों के जमाने की जीआरपी चौकी में बिजली जाने पर जनरेटर, इंटवर्टर की सुविधा नहीं है। पूर्व में रेलवे ने एक बत्ती कनेक्शन दे रखा था लेकिन बीच में उसे डिस्कनेक्ट कर दिया। अब बिजली जाते ही जीआरपी स्टाफ आरोपियों की निगरारी, यात्रियों की शिकायतें दर्ज करने में खासा परेशान होता है। वरिष्ठ अधिकारी का फोन आने पर जानकारी देने प्लेटफॉर्म पर जनरेट से जलने वाली लाइट के नीचे बैठकर जानकारी का आदान प्रदान करते हैं।
एक साल से बंद लैंड लाइन फोन : जीआरपी का लैंड लाइन फोन एक साल से बिल पेमेंट विवाद में बंद पड़ा है। यात्री को शिकायत दर्ज कराना हो तो चौकी से संपर्क का स्थाई नंबर ही नहीं है। आवश्यक सूचनाओं के आदान-प्रदान में यात्रियों, शिकायतकर्ताओं, मीडिया को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

Story Loader