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कुपोषण छीन रहा बच्चों की मुस्कान, ढाई माह में 100 से ज्यादा केंद्र में भर्ती

problem of child malnutrition नरसिंहपुर. जिले में बेटा-बेटियों में फर्क के प्रति समाज की धारणा भले ही बदली है लेकिन बच्चों के उचित पोषण और देखभाल के प्रति अभी भी कई स्तर पर लापरवाही बनी है। जिसकी वजह से जिले में बच्चों में कुपोषण बढऩे की समस्या पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। गर्मी […]

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जिले के प्रमुख जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में करीब ढाई माह में ही 100 से अधिक कुपोषित बच्चे आ चुके हैं। कई बच्चे तो यहां ऐसे भी लाए जाते हैं जिनके परिजन

पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चे की जांच करते हुए आहार विशेषज्ञ।

problem of child malnutrition नरसिंहपुर. जिले में बेटा-बेटियों में फर्क के प्रति समाज की धारणा भले ही बदली है लेकिन बच्चों के उचित पोषण और देखभाल के प्रति अभी भी कई स्तर पर लापरवाही बनी है। जिसकी वजह से जिले में बच्चों में कुपोषण बढऩे की समस्या पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। गर्मी जैसे-जैसे असर बढ़ा रही है, शहरी क्षेत्र से लेकर गांव-कस्बों तक कुपोषित बच्चे मिल रहे हैं, जिसमें कई तो जिले में चल रहे पोषण पुनर्वास केंद्रों तक पहुंच रहे हैं वहीं कुछ बच्चों की आवक नहीं हो पा रही है। जिले के प्रमुख जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में करीब ढाई माह में ही 100 से अधिक कुपोषित बच्चे आ चुके हैं। कई बच्चे तो यहां ऐसे भी लाए जाते हैं जिनके परिजन जांच कराने के बाद बच्चे को भर्ती करने से परहेज करते हैं और घर लौट जाते हैं।
जिले में कुपोषण की जद से बच्चे बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। बताया जाता है कि वर्ष 2025 में जनवरी से दिसंबर तक कुपोषित बालक-बालिकाओं की संख्या में उतार-चढ़ाव बना रहा, वहीं वर्ष 2026 में भी यह सिलसिला जारी है। आंकड़े बताते हैं कि तमाम प्रयासों के बावजूद कुपोषण की समस्या पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार कुपोषण बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करता है, इसलिए समय पर पहचान और संतुलित पोषण बेहद जरूरी है। जिले में आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन मैदानी स्तर पर योजनाओं, कार्यक्रमों से प्रभावी जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी तय नहीं हो रही है। जिससे कुपोषित बच्चों का केंद्रों तक लगातार पहुंचना हो रहा है।
कुपोषण से बचाव के उपाय
बच्चों को संतुलित और पौष्टिक आहार दें
नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें
हरी सब्जियां, दाल, दूध और फल आहार में शामिल करें
स्वच्छता और साफ पेयजल का विशेष ध्यान रखें
अभिभावकों में पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाएं
एक्सपर्ट ब्यू
बच्चों में कुपोषण का मुख्य कारण संतुलित आहार की कमी और खानपान में अनियमितता है। बच्चों के भोजन में प्रोटीन, हरी सब्जियां, दाल, दूध और मौसमी फल शामिल करना जरूरी है। साथ ही समय-समय पर स्वास्थ्य जांच और अभिभावकों में जागरूकता आवश्यक है, तभी कुपोषण की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
मनीषा नेमा, आहार विशेषज्ञ पोषण पुनर्वास केंद्र नरसिंहपुर
खास-खास
वर्ष 2025 का कुल आंकड़ा
कुल कुपोषित बालक- 219
कुल कुपोषित बालिकाएं- 197
वर्ष 2026 में अब तक की स्थिति
जनवरी- बालक 19, बालिका 23
फरवरी- बालक 17, बालिका 23
15 मार्च तक- बालक 13 बालिका 11