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नाले की जमीन पर धौंस दिखाकर लगा दी गन्ने की फसल, मारपीट, ठेमी थाना के ग्रामीण परिवार ने की शिकायत

जिले में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने प्रशासन की सख्ती से कार्रवाई चलने के बाद भी कई जगह अवैध कब्जे झगड़े की वजह बन रहे हैं। मंगलवार को ठेमी थाना के ग्राम मगरधा शेढ़ टपरिया से आए एक ग्रामीण परिवार ने कलेक्टर के नाम शिकायत दी है।

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जिले में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने प्रशासन की सख्ती से कार्रवाई चलने के बाद भी कई जगह अवैध कब्जे झगड़े की वजह बन रहे हैं। मंगलवार को ठेमी थाना के ग्राम मगरधा शेढ़ टपरिया से आए एक ग्रामीण परिवार ने कलेक्टर के नाम शिकायत दी है।

अतिक्रमण हटवाने की मांग लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचा परिवार।

Narsinghpur नरसिंहपुर. जिले में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने प्रशासन की सख्ती से कार्रवाई चलने के बाद भी कई जगह अवैध कब्जे झगड़े की वजह बन रहे हैं। मंगलवार को ठेमी थाना के ग्राम मगरधा शेढ़ टपरिया से आए एक ग्रामीण परिवार ने कलेक्टर के नाम शिकायत दी है। जिसमें आरोप लगाया है कि शासकीय नाला एवं रास्ते की जगह पर बासनपानी टपरिया निवासी कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर गन्ने की फसल लगाई है। जिससे आने जाने में परेशानी हो रही है, अतिक्रमण का विरोध किया जाता है तो झगड़ा-मारपीट की जाती है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अतिक्रमणकारियों के परिजन पुलिस में है और जबलपुर जिले में कार्यरत हैं जिनकी धौंस देकर उन्हें परेशान किया जा रहा है। शिकायतकर्ता रामकुमार चौधरी का आरोप है कि बीते 29 अप्रेल को उसकी बेटी का विवाह था जिससे बारात निकलना भी मुश्किल रहा। इस दौरान आने-जाने की बात पर से झगडृ़ा करते हुए बारातियों से भी मारपीट की गई। जब उसने डायल 112 को सूचना देकर बुलाया तो पुलिस ने अपने सामने बारात निकलवाई थी। पीडि़त परिवार ने मामले में विस्तार से पूरे घटनाक्रम को बताते हुए कार्रवाई की मांग की है।

चार दशक से रह रहे वनवासियों ने मांगा शासकीय भूमि का पट्टा
ग्रामीणों का आरोप कच्चे मकान हटाने दबाब बना रहे अधिकारी

जिले की गाडरवारा तहसील के चीचली निवासी 11 वनवासी परिवारों ने मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर को आवेदन दिया है। ग्रामीणों ने शासकीय वन भूमि का पट्टा दिए जाने की गुहार लगाई। इन परिवारों ने बताया कि वे बीते 40 से 50 वर्षों से चीचली गांव की वन भूमि पर कच्चे मकान बनाकर निवास कर रहे हैं। उनके पास अपनी कोई भूमि नहीं है और वे मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्हें अभी तक उक्त भूमि का पट्टा प्रदान नहीं किया गया है, जबकि उनके पास आधार कार्ड, परिचय पत्र और राशन कार्ड जैसे सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि अब अधिकारी उन्हें परेशान कर रहे हैं और उनके कब्जे की भूमि से कच्चे मकान हटाने के लिए नोटिस भी दिए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने भूमि सर्वेक्षण के लिए 6000 रुपए जमा किए थे, लेकिन उन्हें केवल 5000 रुपए की रसीद दी गई।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इसी जमीन पर पेड़ लगाए हैं और दो नलकूप भी लगाए हैं। उनका पशुधन भी इसी जमीन पर आश्रित है। उनके पास आय का कोई अन्य साधन नहीं है। ग्रामीण हरि बाई ठाकुर, मूलचंद ठाकुर, रिद्धा बाई, सावित्री, सीताबाई, नर्मदा बाई, नेवेंद्र कौरव, महेश, किशोरी ठाकुर, मंजू ठाकुर, विनोद सहित अन्य ग्रामीणों ने पट्टा प्रदान करने मांग की है।

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