7 अप्रैल 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

स्कूलों में बच्चों की प्यास बुझाने संसाधनों की कमी, वॉटर स्टैंड बदहाल, व्यवस्थाएं बेहतर नहीं कर सके जिम्मेदार

facilities in state-run schools नरसिंहपुर. शासन का भले ही सरकारी स्कूलों में व्यवस्थाओं को सुधारने जोर हो लेकिन मैदानी स्तर पर स्कूलों की हालत बेकार है। अधिकांश स्कूलों में बच्चों की प्यास बुझाने न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही कोई अच्छी व्यवस्था। ज्यादातर स्कूल हैंडपंप और निकाय-पंचायत की नलजल योजनाओं के भरोसे हैं। […]

2 min read
Google source verification
अधिकांश स्कूलों में बच्चों की प्यास बुझाने न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही कोई अच्छी व्यवस्था। ज्यादातर स्कूल हैंडपंप और निकाय-पंचायत की नलजल योजनाओं के भरोसे हैं। स्कूलों में जो वॉटर स्टैंड बने हैं वह बदहाल हो चुके हैं।

स्कूल में टूटे पड़े वॉटर स्टैंड जिनकी मरम्मत नहीं हो सकी।

facilities in state-run schools नरसिंहपुर. शासन का भले ही सरकारी स्कूलों में व्यवस्थाओं को सुधारने जोर हो लेकिन मैदानी स्तर पर स्कूलों की हालत बेकार है। अधिकांश स्कूलों में बच्चों की प्यास बुझाने न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही कोई अच्छी व्यवस्था। ज्यादातर स्कूल हैंडपंप और निकाय-पंचायत की नलजल योजनाओं के भरोसे हैं। स्कूलों में जो वॉटर स्टैंड बने हैं वह बदहाल हो चुके हैं। कहीं हैंडपंप बेकार हैं तो कहीं उनका दुरुपयोग हो रहा है, जिससे बच्चों के साथ ही शिक्षकों को भी नए सत्र से परेशानी बढ़ रही है।
जिले में नए सत्र के साथ ही विभिन्न स्कूली गतिविधियां तो शुरू हो गई हैं लेकिन स्कूल आने वाले बच्चों के लिए पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कोई जतन नहीं हो रहे हैं। शिक्षा विभाग में स्कूलों की पेयजल व्यवस्था के जो श्रेणीवार आंकड़े हैं उसके अनुसार 1338 स्कूलों में पेयजल का मुख्य स्रोत हैंडपंप है, जबकि नलजल (टैप वॉटर) की सुविधा केवल 57 स्कूलों में ही उपलब्ध है। इसके अलावा 36 स्कूल प्रोटेक्टेड वेल की श्रेणी वाले हैं। जबकि 20 स्कूल अन्य स्रोतों से पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। बताया जाता है कि विकासखंड चांवरपाठा के ग्राम उमाहा में तो स्कूल परिसर में लगे हैंडपंप में मोटर डालकर खेतों में सिंचाई हो रही है। जबकि सतधारा में प्राथमिक शाला परिसर में पानी की कोई व्यवस्था नहीं होने से वैकल्पिक व्यवस्था से कार्य चल रहा है। नगर के तलापार स्कूल में तो लंबे से निकाय की जलप्रदाय योजना से ही बच्चों को पानी मिलता है। यहां एक स्कूल परिसर में लगा हैंडपंप पर्याप्त पानी नहीं दे पाता। कई बार शिक्षकों को बाहर से पानी बुलाना पड़ता है। यह स्थिति स्पष्ट कर रही है कि स्कूलों तक आधुनिक पेयजल सुविधाओं का विस्तार अभी भी शेष है।
गर्मी के मौसम में हैंडपंप आधारित व्यवस्था पर अधिक दबाव बढऩे की आशंका रहती है, जिससे कई स्कूलों में जल संकट की स्थिति भी बन सकती है। ऐसे में नलजल योजना के विस्तार की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और नियमित पेयजल उपलब्ध हो सके।
वॉटर स्टैंड के औचित्य पर उठ रहे सवाल
स्कूलों में बच्चों को सहजता के साथ पानी मिले इसके लिए वॉटर स्टैंड भी बनाए गए थे। लेकिन अधिकांश स्कूलों में बने यह वॉटर स्टैंड खराब हो चुके हैं। कहीं फाउंडेशन खराब है तो कहीं नलों से टोंटियां गायब है। वॉटर स्टैंड सूखे-बदहाल पड़े हैं।
वर्जन
स्कूलों में बच्चों के लिए पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा। जल्द ही इस मामले में समीक्षा करते हुए कार्य कराए जाएंगे।
डॉ. अनिल कुशवाहा, जिला शिक्षा अधिकारी नरसिंहपुर