Flying Beast Gaurav Taneja: यूट्यूबर गौरव तनेजा ने कहा कि समय की पाबंदी बनाए रखने के लिए ग्राउंड स्टाफ दबाव में होते है। इसलिए वे विमान की समस्याओं को अनदेखा कर देते हैं।
Air India Plane Crash: 12 जून को गुजरात के अहमदाबाद में एयर इंडिया का प्लेन क्रैश हो गया था। इस पर पूर्व पायलट और यूट्यबूर गौरव तनेजा (Gaurav Taneja) ने प्रतिक्रिया दी है। साथ ही उन्होंने पायलट रहते अपने एक अनुभव को भी शेयर किया है। यूट्यूबर गौरव तनेजा को ऑनलाइन फ्लाइंग बिस्ट (Flying Beast) के नाम से भी जाना जाता है। गौरव तनेजा के यूट्यूब चैनल पर करीब 10 मिलियन सब्सक्राइबर्स भी है। अहमदाबाद प्लेन क्रैश को लेकर गौरव तनेजा ने कहा कि यह इंजन की फेल के कारण भी हादसा हो सकता है। इसके अलावा उन्होंने मानवीय भूल भी बताया। लेकिन अब एक इंटरव्यू में यूट्यूबर ने मानवीय भूल किन कारणों से होती है उसके बारे में समझाया।
फ्लाइंग बिस्ट के नाम से मशहूर गौरव तनेजा ने एयर इंडिया के पायलटों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इस हादसे से पहले पायलटों को एयरलाइनों द्वारा की जा रही कटौती के बारे में पूरी जानकारी थी, लेकिन उनके पास आदेश और प्रोटोकॉल को पूरा करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था।
यूट्यूबर गौरव तनेजा ने कहा कि समय की पाबंदी बनाए रखने के लिए ग्राउंड स्टाफ दबाव में होते है। इसलिए वे विमान की समस्याओं को अनदेखा कर देते हैं और पायलटों से अपील करते हैं कि वे अपनी चिंताओं को बाद में बताएं।
इस दौरान उन्होंने अपना एक अनुभव भी बताया। तनेजा ने कहा कि उन्होंने एक बार उड़ान भरने से पहले एक पंख पर खून देखा था और उन्होंने एक ग्राउंड इंजीनियर के सामने यह मुद्दा उठाया क्योंकि उन्हें पक्षी के टकराने का संदेह था। उन्होंने कहा कि उस मामले में विमान की अच्छी तरह से जांच की जानी चाहिए थी। ग्राउंड स्टाफ ने कहा, 'सर, साफ़ कर देता हूं, ले जाओ'। मैंने कहा, 'क्या बात कर रहा है?' कुछ भी हो सकता है। फ़्लैप प्रभावित हो सकते हैं, इंजन प्रभावित हो सकता है। एक समय के बाद, मैंने यह सब करना बंद कर दिया।
यूट्यूबर गौरव तनेजा ने कहा कि शेड्यूल बनाना एक बड़ा मुद्दा है। एक पायलट पूरी रात उड़ान भरता है और उसे अपनी थकान मिटाने के लिए भी पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है। उसे दूसरी उड़ान नहीं देनी चाहिए। जब जांच होती है तो ये सब बाते सामने आती है।
गौरव तनेजा ने कहा कि समय पर विमान के प्रस्थान और आगमन को सुनिश्चित करने के लिए इंजीनियरों पर बहुत दबाव होता है। "वे लगातार डरे रहते हैं। उन्हें देरी के लिए डांट पड़ने की चिंता सताती रहती है। वे पायलटों से कहते रहते हैं कि वे एयर ट्रैफिक कंट्रोल को दोष दें, कंपनी को बताएं कि उन्हें विमान समय पर मिला था, लेकिन एटीसी ने देरी की। ऐसा नहीं है कि कंपनी उन्हें करोड़ों में भुगतान कर रही है। वे नियमित वेतन पाते हैं, लेकिन वे हमेशा चिंतित रहते हैं। उन्होंने कहा कि जब ऑडिट खुलता है तो सब कांड खुलते है।