
भारत और यूरोप के बीच रिसर्च पर स्कॅालरशिप मिलने पर खुशी से चहकते स्टूडेंट्स। ( सांकेतिक फोटो: ANI )
India-Europe Student-Ambassador Network: भारत और यूरोप के बीच रिश्ते मधुर करने व रिसर्च बेहतर करने के लिए स्टूडेंट एम्बेसडर नेटवर्क शुरू किया गया है। यूरोपीय संघ-भारत छात्र राजदूत नेटवर्क शुरू होने के बाद, भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हरवे डेल्फिन ने विश्वास व्यक्त किया कि 20 शिक्षण संस्थानों से चयनित छात्र बढ़ते यूरोप-भारत संबंधों को उजागर करने में मदद करेंगे। ध्यान रहे कि यूरोपीय संघ ने भारत भर के 20 विश्वविद्यालयों के 40 छात्र प्रतिनिधियों को जोड़ने के उद्देश्य से 'ईयू-इंडिया स्टूडेंट एम्बेसडर नेटवर्क' की शुरुआत की है।
यूरोपीय संघ के इरास्मस कार्यक्रम में शामिल होने वाले भारतीय छात्रों के समूह के लिए आयोजित प्रस्थान-पूर्व कार्यक्रम में डेल्फिन ने को मीडिया से कहा कि इन राजदूतों को भारत में यूरोप के बारे में जागरूकता बढ़ाने का काम सौंपा जाएगा। उल्लेखनीय है कि 75 भारतीय छात्रों को 2026-28 के लिए 15 यूरोपीय देशों में मास्टर्स डिग्री की पढ़ाई करने के लिए EU की इरास्मस मुंडस स्कॉलरशिप दी गई है। सन 2004 से भारत दुनिया भर में इस स्कॉलरशिप को पाने वाला सबसे बड़ा देश बना हुआ है।
इस कार्यक्रम का लक्ष्य यूरोप में शैक्षणिक और अनुसंधान के अवसरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और साथ ही उभरते हुए ईयू-इंडिया पार्टनरशिप में युवाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है। महाद्वीप भर में उच्च शिक्षा में लगभग 100,000 भारतीय छात्र पहले से ही नामांकित हैं, इसलिए विश्व स्तरीय अनुसंधान और अकादमिक प्रशिक्षण की तलाश करने वालों के लिए यूरोप एक प्रमुख गंतव्य बना हुआ है।
उन्होंने इरास्मस के छात्रों को यूरोप और भारत के बीच संबंधों को बढ़ावा देने के लिए उपयुक्त माध्यम के रूप में पहचाना।
उन्होंने कहा, “हमें यूरोपीय संघ-भारत एजेंडा के राजदूतों की आवश्यकता है, और मुझे लगता है कि इरास्मस छात्रों से बेहतर कोई और इस सकारात्मक बदलाव का सूत्रधार नहीं हो सकता, जो हमारे दोनों भौगोलिक क्षेत्रों के बीच सेतु का काम करे।
डेल्फिन ने कहा, हम राजदूत नेटवर्क की शुरुआत की भी घोषणा कर रहे हैं। हमने भारत में 20 उच्च शिक्षा संस्थानों का चयन किया है, और उनमें से प्रत्येक में, हम भारत में यूरोपीय संघ के राजदूतों की पहचान करने का प्रयास कर रहे हैं क्योंकि हम यूरोप के बारे में जागरूकता बढ़ाने और बेहतर समझ पैदा करने के महत्व में दृढ़ विश्वास रखते हैं, और यूरोप और भारत को जोड़ने वाले सभी पहलुओं को उजागर करना चाहते हैं।”
नेटवर्क के शुभारंभ के साथ ही, यूरोपीय संघ ने 2026-2028 सत्र के लिए 75 भारतीय छात्रों को प्रतिष्ठित दो वर्षीय इरास्मस मुंडस संयुक्त मास्टर डिग्री छात्रवृत्ति प्रदान की है। यह उपलब्धि 2004 से इन छात्रवृत्तियों के शीर्ष प्राप्तकर्ता के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत की है, जिससे वर्तमान प्रवेश अवधि के लिए देश वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन देशों में शामिल हो गया है।
यह समूह फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम और इटली सहित 15 यूरोपीय देशों के विश्वविद्यालयों में अध्ययन करने के लिए तैयार है, जहां वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और फार्मास्युटिकल विज्ञान जैसे क्षेत्रों में अंतःविषयक मास्टर कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। ( इनपुट : ANI)
Published on:
23 Jun 2026 11:31 am
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