
कर्नाटक हाईकोर्ट (File Photo)
कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने राज्य सरकार के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसके तहत 52 आपराधिक मामलों में मुकदमे वापस लेने की मंजूरी दी गई थी। इन मामलों में वर्ष 2022 के कलबुर्गी जिले के आलंद के लाडले मशक दरगाह दंगे से जुड़े मामले भी शामिल हैं। पिछली सिद्धारमैया सरकार ने मई महीने में इन मुकदमों को वापस लेने का निर्णय लिया था। हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश ने अगली सुनवाई तक फैसले को रोक दिया है। सुनवाई की अगली तारीख की फिलहाल जानकारी नहीं दी गई है।
मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और न्यायाधीश के.एस. हेमलेखा की बेंच ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमे वापस लेने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 321 का उपयोग प्रथम दृष्टया हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुरूप प्रतीत नहीं होता। कोर्ट ने इस पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार और अभियोजन निदेशालय को नोटिस जारी किया तथा दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
अधिवक्ता गिरीश भारद्वाज की ओर से दायर याचिका में 27 मई के उस सरकारी आदेश को रद्द करने की मांग की गई है, जिसमें सरकारी वकीलों को सीआरपीसी, 1973 की धारा 321 अथवा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के संबंधित प्रावधानों के तहत विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज मामलों को वापस लेने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था। गौरतलब है कि राज्य मंत्रिमंडल ने 21 मई को 52 आपराधिक मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया था।
आपराधिक मामलों को वापस लेने का निर्णय के दौरान विपक्षी बीजेपी (BJP) ने कांग्रेस (Congress ) की सरकार पर निशाना साधा था। बीजेपी ने कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया था कि वो तुष्टिकरण की राजनीति के लिए कानून के शासन से समझौता कर रही है। गौरतलब है कि 1 मार्च 2022 को आलंद स्थित लाडले मशक दरगाह में कथित रूप से शिवलिंग के अपवित्र होने के आरोप के बाद कुछ बीजेपी कार्यकर्ता वहाँ शुद्धिकरण अनुष्ठान करना चाहते थे। इस विवाद के बाद सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी, जिसके चलते प्रशासन को क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी थी।
Updated on:
03 Jul 2026 12:27 am
Published on:
03 Jul 2026 12:22 am
