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पिछले 5 वर्षों में कई न्यायाधीशों को रिटायर होने के बाद मिला बड़ा पद, जानिए इनके नाम और नई जिम्मेदारी के बारे में

SC Judges Post Retirement Posts: क्या पूर्व न्यायधीशों को उनकी रिटायरमेंट के बाद किसी संवैधानिक या वैधानिक पदों पर रहना चाहिए, यह एक ऐसा विषय है जिस पर वर्षों से बहस होती रही है। ऐसे में हम आपको उन न्यायधीशों के नाम बताएंगे जिनकी रिटायमेंट पिछले पांच सालों के दौरान हुई है और इसके तुरंत बाद किसी बड़े पद की जिम्मेदारी उन्हें दी गई।

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पिछले 5 वर्षों में कई न्यायाधीशों को रिटायर होने के बाद मिला बड़ा पद, जानिए इनके नाम और नई जिम्मेदारी के बारे में

पिछले 5 वर्षों में कई न्यायाधीशों को रिटायर होने के बाद मिला बड़ा पद, जानिए इनके नाम और नई जिम्मेदारी के बारे में

SC Judges Post Retirement Posts: सर्वोच्च न्यायालय के जज पर उस समय प्रश्न खड़ा नहीं होता जब वो अदालत में अपना काम कर रहे होते हैं, लेकिन उनके लिए मुश्किलें तब खड़ी हो जाती है, जब वो पद से रिटायर होते हीं किसी बड़े पद पर नियुक्त हो जाते हैं। रिटायरमेंट के बाद न्यायाधीशों को आधिकारिक पद धारण करना चाहिए या नहीं यह एक ऐसा विषय है जिस पर लंबे समय से बहस होती रही है। कुछ लोग इस निर्णय पर प्रश्न करते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है इससे न्यायपालिका पर लोगों का विश्वास कम होगा। लोगों को या विपक्ष को ऐसा लगने लगता है की इस जज ने किसी केस में सरकार की मदद की, जिसके चलते उन्हें ऐसा बड़ा पद दिया गया है। लोगों की नजर में न्यायधीशों द्वारा ऐसा पद ग्रहण करना, केंद्र की चाटुकारिता करने जैसा है। जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रभावित करता है। उनके निर्णय लेने की क्षमता को कम करता है।


इस मामले में सरकार से जब भी सवाल किया जाता है तो उनका कहना होता है कि किसी बड़े विभाग में बड़ी भूमिका निभाने के लिए सर्वोच्च सत्यनिष्ठा वाले न्यायिक कर्मियों की आवश्यकता होती है और संविधान में ऐसा कुछ भी नहीं है जो सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को नियुक्त करने से रोकता हो। ऐसे मामलों में हमें लगता है की कुछ बड़े और महत्वपूर्ण पद के लिए इनकी नियुक्ति सबसे उपयुक्त है। इसीलिए हम ऐसा निर्णय लेते हैं। इस मामले पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए।

आइये हम सुप्रीम कोर्ट के उन सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के नाम जानते हैं, जिन्होंने पिछले पांच वर्षों के दौरान रिटायर होने के तुरंत बाद किसी संवैधानिक या वैधानिक पदों को ग्रहण किया है।

1. न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल
सेवानिवृत्ति की तिथि: 6 जुलाई, 2018
सेवानिवृत्ति के बाद नियुक्ति की तिथि: 6 जुलाई, 2018
जस्टिस गोयल को 6 जुलाई, 2018 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था, उसी दिन वो शीर्ष अदालत से सेवानिवृत्त हुए थे।

2. जस्टिस अरुण मिश्रा
सेवानिवृत्ति की तिथि: 2 सितंबर, 2020
सेवानिवृत्ति के बाद नियुक्ति की तिथि: 2 जून, 2021
न्यायमूर्ति मिश्रा, जिन्होंने छह साल से अधिक समय तक शीर्ष अदालत के न्यायाधीश का पद संभाला था, उनकी सेवानिवृत्ति के लगभग एक साल बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।

3.जस्टिस अशोक भूषण
सेवानिवृत्ति की तिथि: 4 जुलाई, 2021
सेवानिवृत्ति के बाद नियुक्ति की तिथि: 8 नवंबर, 2021
4 जुलाई 2021 को कार्यालय छोड़ने के बाद, न्यायमूर्ति भूषण को 8 नवंबर, 2021 को राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।

4.जस्टिस हेमंत गुप्ता
सेवानिवृत्ति की तिथि: 16 अक्टूबर, 2022
सेवानिवृत्ति के बाद नियुक्ति की तिथि: 22 दिसंबर, 2022
22 दिसंबर केंद्र सरकार ने न्यायमूर्ति गुप्ता को नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया, जो संस्थागत मध्यस्थता के लिए एक स्वतंत्र और स्वायत्त शासन बनाने के उद्देश्य से स्थापित एक निकाय है।

5. जस्टिस एस अब्दुल नजीर
सेवानिवृत्ति की तिथि: 4 जनवरी, 2023
सेवानिवृत्ति के बाद नियुक्ति की तिथि: 12 फरवरी, 2023
सेवानिवृत्ति के बाद, न्यायमूर्ति नज़ीर अब आंध्र प्रदेश के 24 वें राज्यपाल के रूप में कार्यरत हैं।

6. न्यायाधीश रंजन गोगोई
सेवानिवृत्ति की तिथि: 17 नवंबर, 2019
सेवानिवृत्ति के बाद नियुक्ति की तिथि: 19 मार्च, 2020
जस्टिस गोगोई को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था। पूर्व CJI ने राज्यसभा के सभापति की उपस्थिति में राज्यसभा में संसद सदस्य के रूप में पद की शपथ ली थी। सर्वोच्च न्यायालय के इतिहास में सेवानिवृत्ति के बाद की सबसे चर्चित नियुक्तियों में से एक पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई की थी, जिन्हें कार्यालय छोड़ने के छह महीने के भीतर राज्यसभा सदस्य के रूप में नामित कर लिया गया था।

बता दें कि, न्यायाधीशों को रिटायरमेंट के बाद ऐसे पदों को स्वीकार करने से रोकने के लिए हमारे देश में कोई नियम नहीं है, एमसी सीतलवाड़ की अध्यक्षता में चौदहवें विधि आयोग की रिपोर्ट ने सिफारिश की कि न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के बाद सरकार से नौकरी नहीं लेनी चाहिए। शीर्ष अदालत के कई न्यायाधीशों ने पहले भी रिटायरमेंट के बाद कोई नौकरी नहीं लेने की बात कही है, जिनमें जस्टिस चेलामेश्वर और पूर्व सीजेआई जेएस खेहर, आरएम लोढ़ा और एसएच कपाड़िया शामिल थे।