
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (फोटो- एएनआई)
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को चंडीगढ़ स्थित महात्मा गांधी राज्य लोक प्रशासन संस्थान (एमजीएसआइपीए) में हरियाणा विधानसभा और संवैधानिक और संसदीय अध्ययन संस्थान (आइसीपीएस) के सहयोग से आयोजित विधायी प्रारूपण पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिरला ने कहा, लोकतंत्र की असली शक्ति जनता के विश्वास में निहित होती है और यह विश्वास तभी मजबूत होता है जब विधानसभाएं और संसद पारदर्शी, व्यवस्थित और उत्तरदायी ढंग से कार्य करें।
बिरला ने आगे कहा, कानून का मूल ड्राफ्ट बनाते समय कभी भी 'ग्रे एरिया' नहीं छोड़ना चाहिए, यदि कानून की ड्राफ्टिंग में 'ग्रे एरिया' होगा तो न्यायपालिका के हस्तक्षेप की गुंजाइश बढ़ जाएगी। जब कानूनी भाषा स्पष्ट और सरल होगी तो न्यायिक समीक्षा करते समय अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं होगा। उन्होंने आगे कहा, कार्यपालिका की जवाबदेही तय हो और लोगों को त्वरित न्याय मिले, यही कानून का मूल उद्देश्य हो। विधायी प्रारूपण बिल्कुल स्पष्ट और निश्चित होना चाहिए। तभी अच्छा कानून बनेगा।
बिरला ने कहा कि ड्राफ्टिंग में विराम, पूर्णविराम, अर्धविराम का भी उतना ही ध्यान रखना जरूरी है, जितना कि भाषा का। ड्राफ्टिंग जनता के लिए सहज और सरल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्पष्ट, सरल और पारदर्शी कानून ही लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाते हैं। समय के साथ बदलती परिस्थितियों के अनुरूप कानूनों में संशोधन और नए कानूनों का निर्माण आवश्यक है। हमारा प्रयास है कि आने वाले समय में ऐसे विधायी मसौदे तैयार कर सकें, जो नागरिकों के कल्याण और राज्य के विकास के लिए अधिक प्रभावी साबित हों।
बिरला ने यह भी कि विधायी प्रारूपण केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की आत्मा है। स्पष्ट और सरल विधायी भाषा प्रभावी कानूनों की आधारशिला है। इस दृष्टि से इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत उपयोगी हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी, हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण, कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष यू.टी. खादर फरीद, हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण लाल मिड्ढा तथा लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
Published on:
27 Sept 2025 09:42 am
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