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MBA करने वाले अधिकतर छात्र उद्यमी बनने की बजाय कर्ज के बोझ तले दब रहे हैं

MBA करोगे तो नौकरी जल्दी मिल जाएगी और सैलरी भी बेहतरीन होगी, परंतु क्या सच में ऐसा होता है? क्या देश में एमबीए करने वाले छात्रों को नौकरी मिलती है? अगर आप आंकड़ों को देखें तो पाएंगे कि केवल 5-10 फीसदी एमबीए करने वाले बच्चों को अच्छी सैलरी मिल जाती है। जिन्हें सैलरी नहीं मिलती वो अपने शिक्षा के लिए कर्ज के बोझ तले दबने लगते हैं। ये बोझ वर्तमान में छात्रों को Entrepreneur कम कर्जदार अधिक बना रहा है। इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि आखिर कैसे MBA के कारण छात्रों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है।

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MBA create crippling student debt, not entrepreneurs

हमारे देश में अपने बच्चों को शिक्षित करने को लकेर होड़ पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ी है। एमबीबीएस, आईआईटी जैसे कॉर्से में पढ़ाई को लकेर तो क्रेज बढ़ा ही है परंतु बिजनस स्कूलोन में पढ़ने वालों छात्रों की भी तादाद बढ़ी है। MBA करो और अच्छी नौकरी मिलनी तय है! इसी बात को आजकल के कई छात्र आसान समझ निकल पड़ते हैं MBA करने और घरवाले भी बड़े बड़े कर्ज लेकर उन्हें मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) करते हैं। पर क्या MBA से एक बेहतरीन नौकरी मिल जाएगी? क्या जिन छात्रों ने MBA किया आज वो सभी एक बेहतरीन सैलरी के साथ एक अच्छी कंपनी में काम कर रहे हैं? अगर आप आंकड़ों को देखें वास्तविकता कुछ और दिखाई देती है। आंकड़ों में सामने आया है कि दुनियाभर के कई देशों में MBA करने वाले छात्र उद्यमी कम, कर्ज के बोझ तले अधिक दब रहे हैं।

भारत में लोन लेकर भी बेरोजगार

भारत की बात करें तो आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 29 जनवरी, 2021 तक, शिक्षा ऋण में ₹64,000 करोड़ का बैंक ऋण था। वर्तमान में भारत में 3000 से अधिक MBA कॉलेज हैं। वर्ष 2016 की रिपोर्ट में सामने आया था कि इन कॉलेज से पास होकर निकलने वाले 93 फीसदी एमबीए ग्रेजुएट छात्र बेरोजगार हैं। इनमें कई छात्रों ने शिक्षा के लिए लोन लिया परंतु उसे चुकाने में सफल नहीं हो पा रहे।

डिग्री तो है मगर हुनर नहीं

आज देश में लाखों बच्चे देश या विदेश से MBA की डिग्री तो ले रहे, परंतु उन्हें अच्छी नौकरी नहीं मिल पा रही। इसके पीछे का कारण संस्थानों द्वारा मोटी फीस लेना परंतु शिक्षा और शिक्षक दोनों ही ढंग के नहीं मिल रहे।

उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय के एक पूर्व प्रोफेसर अभिजीत सेन ने भी एक बार इसपर प्रकाश डाला था। उन्होंने कहा था कि 'देश में ऐसे कई स्कूल और शिक्षा संस्थान बन चुके हैं जो मुनाफे के लिए छात्रों को तरह तरह के विज्ञापन के जरिए लुभाते हैं। एमबीए के लिए मोटी फीस वसूलते हैं और छात्र करियर के लिए फीस देकर एडमिशन भी ले लेते हैं परंतु ज्ञान के नाम पर उन्हें कुछ नहीं मिलता, ऐसे में नौकरी भला कैसे मिलेगी?'

वास्तव में अधिकतर प्राइवेट संस्थान छात्रों को ढंग की शिक्षा नहीं दे रहे जिस कारण ये छात्र कंपनियों द्वारा लिए जा रहे इन्टरव्यू को पास नहीं कर पा रहे। इससे हताश हो MBA करने के बावजूद कई छात्र गार्ड तक कि नौकरी करने को मजबूर हैं।

बैंक के पैसे चुकाने में असमर्थ क्यों हुए छात्र?

पिछले साल मार्च में सामने आए एक आँकड़े के अनुसार पिछले तीन साल में एजुकेशन लोन में जितना ऋण बैंको ने दिया उसका 9.95 फीसदी पैसा NPA हो गया जोकि वित्त वर्ष 2019-20 की तुलना में कहीं अधिक रही। दरअसल, बैंक से छात्र लोन तो लेते हैं, परंतु उसे अच्छी नौकरी न मिल पाने के कारण चुकाने की समस्या बढ़ रही है। शायद यही कारण है कि NPA के मामले में एजुकेशन लोन टॉप पर है। आंकड़ों के अनुसार अकेले MBA के छात्रों ने कुल 9,541 करोड़ रुपये लोन लिए थे। इसमें से 685 करोड़ रुपये NPA हो गए है। ये केवल भारत की ही बात नहीं है बल्कि बाहरी देशों क हाल भी यही है।

अमेरिका में छात्रों पर $ 1.74 ट्रिलियन कर्ज

संयुक्त राज्य अमेरिका में, पिछले कई दशकों में छात्रों पर कर्ज बढ़ा है। फेडरल रिजर्व की ही एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 की चौथी तिमाही में अमेरिका में छात्रों पर $ 1.74 ट्रिलियन कर्ज है। वर्ष 2020 की तुलना में ये आंकड़ा 3 फीसदी अधिक है। Biden प्रशासन द्वारा फेडरल छात्रों के ऋण ब्याज दरों पर दी गई राहत के बावजूद आंकड़ों में वृद्धि ने चिंता बढ़ा दी है।

संयुक्त राज्य अमेरिका के शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए नए आंकड़ों के अनुसार, यूएस के MBA ग्रेजुएट्स पर सामूहिक रूप से 3.7 बिलियन डॉलर का शैक्षणिक ऋण है। नेशनल सेंटर ऑफ एजुकेशन स्टैटिस्टिक्स के डेटा से पता चलता है कि वर्ष 2016 में अमेरिका के MBA ग्रेजुएट छात्रों पर 66, 300 डॉलर का कर्ज था, अर्थात् करीब 50 लाख का औसत छात्र ऋण था। ये ऋण हर साल बढ़ रहा है और संस्थानी की ट्यूशन फीस भी । अमेरिका के हार्वर्ड और शिकागो की ट्यूशन फीस ही $73,400 और $73,000 है।

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Updated on:
02 Mar 2022 03:09 pm
Published on:
02 Mar 2022 02:51 pm
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