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Raipur Municipal Corporation: 300 करोड़ प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराना बड़ी चुनौती, बकायादारों का घर सील करने लगा निगम

रायपुर नगर निगम प्रशासन (The Raipur Municipal Corporation administration) ने अब बकायादारों (defaulters) का घर सील करना (sealing the houses ) शुरू कर दिया है। निगम प्रशासन के लिए शहर की सफाई व्यवस्था (city's cleanliness system ) की रैंकिंग बढ़ाना और 300 करोड़ रुपए प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराना बड़ी चुनौती है। इसके लिए पूरा जोर लगाया जा रहा है।

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Raipur Municipal Corporation: 300 करोड़ प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराना बड़ी चुनौती, बकायादारों का घर सील करने लगा निगम

बकायादारों का घर सील

सख्त कार्रवाई, भुगतान कर रहे लोग

निगम सभी जोनों के बकायादारों को डिमांड बिल, नोटिस एवं अंतिम सूचना देकर सीलबंदी की कार्रवाई करने उतरा है। क्योंकि मार्च आखिरी तक करोड़ों रुपए राजस्व बकाया है। जोन 3 की टीम वार्ड 29 की बकायादार नूरजहां के भवन को सील करने पहुंची। वार्ड 47 में कुर्की की नोटिस पर तत्काल चेक से 1 लाख 72 हजार 741 रुपए भुगतान किया। वार्ड 1 में भारत सेलून से 56 हजार , वार्ड 19 में ?ुलाल फैक्ट्री से 3 वर्ष का 1 लाख 84 हजार बकाया वसूला। आयुक्त विश्वदीप के निर्देश पर अपर आयुक्त राजस्व राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, उपायुक्त राजस्व डॉ अंजलि शर्मा, राजस्व अधिकारी खीरसागर नायक राजस्व जमा करवाने मैदान में उतरे।

ताला लगाकर सीलबंद

जोन 3 कमिश्नर विवेकानंद दुबे ने बताया कि वार्ड 29 की बकायेदार नूरजहां पति अब्दुल अजीज द्वारा बकाया राशि 1 लाख 61 हजार 449 को अदा नहीं करने पर भवन पर ताला लगाकर सीलबंद की कार्रवाई की गई। कुर्की के नोटिस पर 1 लाख 72 हजार 741 रुपए चेक से भुगतान कर दिया। गुलाल फैक्ट्री के शांति देवी केडिया, आयुष केडिया ने तीन साल का बकाया 3 लाख 71 हजार में से 1 लाख 84 रुपए चेक से भुगतान किया।

गंदगी फैलाने पर दुकानदारों पर 17300 जुर्माना

निगम जोन 10 स्वास्थ्य विभाग ने लालपुर ओवरब्रिज से देवपुरी फल बाजार तक मुख्य मार्ग में गंदगी फैलाने पर दुकानदारों पर 17300 रुपए जुर्माना लगाया। इससे पहले सुंदरनगर क्षेत्र में कार्रवाई की गई। दुकानदारों को डस्टबिन रखना अनिवार्य है, लेकिन पालन नहीं करते।

राष्ट्रीय सर्वे टीम राज्य में

राष्ट्रीय सर्वे टीम छत्तीसगढ़ पहुंच गई है। इसमें 40 से 45 सदस्य हैं, जो प्रदेश के सभी निकायों की सफाई व्यवस्था की फाइल तैयार करेंगे। सफाई के मामले में रायपुर निगम पिछले दो सालों से काफी पिछड़ा हुआ है। निगरानी प्रणाली काफी लचर होने से सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति चल रही है। जोन पर हर वार्ड का अलग-अलग ठेका होने के बावजूद भी सफाई में कोई सुधार नहीं हुआ। निगम के स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार ठेकेदारों का बिल भुगतान कराने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं। अभी हाल ही में दो दिन जांच हुई तो 10 से 12 वार्डों में 40 से 45 सफाई कर्मचारियों की जगह 15 से 20 ही मिले।