
शरद पवार और अजित पवार (Photo: IANS)
Sharad Pawar Ajit Pawar alliance: शरद पवार और अजित पवार के पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर पालिका चुनाव के लिए हाथ मिलाने से कई सवाल खड़े हुए हैं। सबसे पहला तो यही कि क्या चाचा-भतीजे में सब कुछ ठीक हो गया है और क्या भविष्य में भी दोनों साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे? इसके अलावा, एक सवाल यह भी है कि क्या भतीजे अजित, चाचा शरद पवार को भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन का हिस्सा बनने के लिए राजी कर पाएंगे? अजित पवार की एनसीपी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद सुनील तटकरे ने इन सवालों के जवाब देने का प्रयास किया है।
नेशनल कांग्रेस पार्टी (NCP) लीडर सुनील तटकरे का कहना है कि पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर पालिका चुनाव के लिए हमने शरद पवार की एनसीपी से हाथ जरूर मिलाया है, लेकिन हम भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा बने रहेंगे। इसे लेकर हमारे रुख में कोई बदलाव नहीं है। शरद पवार के एनडीए में शामिल होने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि यह फैसला शरद पवार को ही करना है। तटकरे ने कहा कि एनसीपी के दोनों गुट एकसाथ आए हैं, लेकिन इसे किसी अलग नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। स्थानीय स्तर पर कुछ असामान्य गठबंधन होते हैं। नगर परिषद चुनाव में उद्धव ठाकरे की शिवसेना और एकनाथ शिंदे की शिवसेना कुछ जगह पर एक साथ आए, तो क्या यह मान लेना चाहिए कि शिवसेना एक होने वाली है।
सुनील तटकरे ने कहा कि पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनाव में BJP और हमने यह सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का रणनीतिक फैसला लिया कि विपक्ष को कोई जगह न मिले। यह फैसला मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ महायुति की बैठक में लिया गया था। उन्होंने आगे कहा कि भले ही दोनों पार्टियां एक साथ चुनाव लड़ रही हैं, लेकिन हमारे रुख में कोई बदलाव नहीं आया है, हम एनडीए के साथ हैं और आगे भी रहेंगे। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, तटकरे ने दावा किया कि 1999 में सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठाने के बाद शरद पवार को कांग्रेस से निकाल दिया गया था। उन्होंने कहा कि 1999 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और NCP ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा था। किसी को भी पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने शरद पवार को फोन करके NDA के साथ राज्य में सरकार बनाने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन उन्होंने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। मैं नहीं जानता कि उन्होंने ऐसा क्यों किया, क्योंकि उस समय मैं दूसरे दर्जे का नेता था।
महाराष्ट्र में सत्ताधारी गठबंधन महायुति में चल रहे मतभेद पर उन्होंने कहा कि नगर निगम चुनाव को लेकर रिश्तों में जो थोड़ी बहुत कड़वाहट है, वो चुनाव बाद दूर हो जाएगी। एनपीसी लीडर ने कहा कि कल्याण-डोंबिवली नगर निगम चुनाव के प्रचार के दौरान एकनाथ शिंदे ने निराशा में इस्तीफे की चेतावनी दी थी, लेकिन बाद में सब ठीक हो गया। इस बार भी सबकुछ ठीक हो जाएगा। 16 जनवरी को नतीजे आने के बाद हम साथ बैठेंगे, तिलगुड़ बांटेंगे, और अपने रिश्तों में मिठास लाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि महायुति राज्य में हर जगह एक साथ चुनाव नहीं लड़ रही है, ठीक वैसे ही जैसे महा विकास अघाड़ी भी अलग-अलग चुनाव लड़ रही है। महायुति ने नगर पालिका-नगर पंचायत चुनावों में 80 प्रतिशत सीटें जीती थीं और नगर निगम चुनावों में भी यही दोहराया जाएगा।
Updated on:
08 Jan 2026 09:10 am
Published on:
08 Jan 2026 09:05 am
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