
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक अहम फैसले में कहा है कि सेवानिवृत्त कर्मचारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि विभागीय कार्यवाही 'कारण बताओ नोटिस' से नहीं, बल्कि आरोपपत्र जारी होने के बाद शुरू होती है। शीर्ष कोर्ट ने इसके साथ झारखंड हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ भारतीय स्टेट बैंक की याचिका को खारिज कर दिया जिसमें नवीन कुमार सिन्हा के खिलाफ जारी बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया गया था।
जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि विभागीय कार्यवाही केवल कारण बताओ नोटिस जारी करने पर शुरू नहीं होती बल्कि तभी शुरू होती है जब आरोपपत्र जारी किया जाता है, क्योंकि सक्षम प्राधिकारी की ओर से कर्मचारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर विचार करने की तिथि यही होती है। उक्त मामले में हाईकोर्ट ने कहा था कि अनुशासनात्मक कार्रवाई उनकी सेवानिवृत्ति के बाद शुरू की गई, जिसमें सेवा की विस्तारित अवधि भी शामिल थी।
जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की तरफ से लिखे फैसले में 1991 के 'भारत सरकार बनाम के.वी. जानकीरमन' और 1997 के 'स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बनाम सी.बी.ढल' फैसलों का भी उल्लेख किया गया है। कोर्ट ने माना है कि यह अपने आप में एक स्थापित व्यवस्था है कि रिटायरमेंट के बाद कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं हो सकती। अगर वह पहले से चल रही हो, तो उसे जारी रखा जा सकता है।
Updated on:
21 Nov 2024 09:18 am
Published on:
21 Nov 2024 09:18 am
