भाजपा नेतृत्व को प्रदेश अध्यक्ष की ओर से सौंपी रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के सभी 6 क्षेत्रों पश्चिमी यूपी, ब्रज, कानपुर-बुंदेलखंड, अवध, गोरखपुर और काशी क्षेत्र में 2019 की तुलना में पार्टी के मतदान प्रतिशत में 8त्न की कमी आने से सीटों का नुकसान हुआ। मिसाल के तौर पर पश्चिम और काशी क्षेत्र की 28 में से सिर्फ 8 सीटें पार्टी जीत सकी। वहीं ब्रज क्षेत्र में पार्टी को 13 में से 8 तो गोरखपुर में 13 में से केवल 6 सीटों से संतोष करना पड़ा। अवध की 16 में से 7 सीटें और कानपुर-बुंदेलखंड में 10 में से केवल 4 सीटों पर ही कमल खिला।
दलबदलू हारे
उत्तर प्रदेश में दूसरे दलों से आए 22 लोगों को पार्टी ने टिकट दिया, 12 को जनता ने नकार दिया।हार के 10 बड़े कारण
- पेपर लीक की घटनाओं से युवाओं में आक्रोश।
- संविदाकर्मियों की भर्ती में सामान्य वर्ग को प्राथमिकता से विपक्ष के संविधान बदलने वाले नैरेटिव को बल मिला।
- सांसदों-विधायकों पर हावी नौकरशाही को जनता ने नापसंद किया।
- अपनी ही सरकार में सुनवाई नहीं होने से कार्यकर्ताओं में असंतोष।
- कुर्मी, मौर्य, शाक्य, लोध, प्रजापति आदि ओबीसी जातियों का मोहभंग।
- बसपा का 10 फीसदी वोट सपा-कांग्रेस में शिफ्ट हो गया।
- टिकट कटने से कई क्षेत्रों में कोर वोटर राजपूतों का नहीं मिला वोट।
- कई चरण होने से आखिरी चरण तक कार्यकर्ताओं का उत्साह कम हुआ।
- सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों में पुरानी पेंशन का मुद्दा बना।
- अग्निवीर योजना के कारण युवाओं और उनके परिवार में नाराजगी।
कोर वोटर के नाम हटाए
बीएलओ स्तर के कर्मियों की ओर से भाजपा के कोर मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से साजिश के तहत काटे गए। लगभग सभी सीटों पर 30 हजार से 40 हजार पार्टी के कोर वोटर के नाम वोटर लिस्ट से काटे गए। यह भी पढ़ें
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