एमवाय अस्पताल में 21 जुलाई 2014 को हुई कैदी रामदयाल की हत्या के मामले में लगी जनहित याचिका पर मंगलवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस पीके जायसवाल और जस्टिस डीके पालीवाल की युगल पीठ के समक्ष जेल विभाग और शासन द्वारा पेश जवाब में खुलासा हुआ, जिस कैदी जितेंद्र उर्फ जेडी की जगह गलती से रामदयाल की हत्या हुई थी, उसे जेल से अस्पताल शिफ्ट करने के लिए अधिकृत रूप से किसी ने भी आदेश नहीं दिया था।
जेल के मेडिकल ऑफिसर की अनुशंसा पर ही उसे एमवाय भेज दिया था। जेल रजिस्टर में 15 जुलाई (जिस दिन जेडी को अस्पताल भेजा गया था) को जो एंट्री है वह भी बाद में की गई थी। जेल का रजिस्टर देखने के बाद कोर्ट ने इस पर आपत्ति ली है। कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। एक दो दिन में फैसला आने की उम्मीद है। सुनवाई के दौरान जेल डीआईजी के अलावा जेल अधीक्षक संजय पांडे, तत्कालीन जेल अधीक्षक गोपाल ताम्रकार भी कोर्ट में उपस्थित थे। कोर्ट ने जेल विभाग से इस घटना से जुड़ा सारा ओरिजनल रिकॉर्ड भी ले लिया है।
मैं दोषी नहीं हूं
डिप्टी जेलर शशिभूषण शरण ने इनटरविनर याचिका लगाकर कोर्ट को बताया है, जेडी की जान को खतरे को लेकर सूचना मिलते ही मैने आला अधिकारियों को जानकारी दी थी, जिसकी इंट्री डेली रिपोर्ट में भी की थी, इसलिए मैं कहीं भी दोषी नहीं हूं।
सख्त की सुरक्षा
शासन के वकील पुष्यमित्र भार्गव ने कोर्ट को बताया, घटना के बाद जेल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और पुख्ता कर दी है। कैदियों को लाने ले जाने के लिए सशस्त्र जवान और रिजर्व गार्ड की संख्या भी बढ़ाई गई है।
मुआवजा बढऩे की संभावना
एडवोकेट चंपालाल यादव के माध्यम से संस्था जस्टिस फॉर लॉयर के सचिव मनीष यादव की याचिका में मृत कैदी रामदयाल के परिजन को मुआवजा एवं दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। शासन कैदी के परिजन को दो लाख रुपए का मुआवजा दे चुका है। मंगलवार को यादव ने कोर्ट के समक्ष जेल मेन्युअल सहित कानूनी पक्ष बिंदुओं का हवाला देते हुए बताया, शासन ने कम मुआवजा दिया है, नियमों के अनुसार उन्हें चार लाख रुपए दिए जाना चाहिए।