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जानिए, RSS से जुडे रोचक FACTS

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भारत ही बल्कि दुनिया के कई देशों में अपनी पहुंच बनाई है। दुनिया के सबसे बड़े संगठन RSS का नेटवर्क 45 देशों में पहुंच गया है। 

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Nitesh Tripathi

Mar 19, 2016

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भारत ही बल्कि दुनिया के कई देशों में अपनी पहुंच बनाई है। दुनिया के सबसे बड़े संगठन RSS का नेटवर्क 45 देशों में पहुंच गया है। यहां स्वयं सेवक संघ के नाम से शाखाएं भी लगती है। यह नेटवर्क अब अमरीका और ब्रिटेन सहित मिडल ईस्ट तक बढ़ गया है।

हिन्दुस्तान के बाद नेपाल में संघ की सबसे ज्यादा शाखाएं लगती हैं। इसके बाद US का नंबर आता है, जहां 146 जगहों पर संघ की शाखाएं लगती हैं। संघ का दावा है कि US में तो शाखाएं बीते 25 साल से लग रही हैं। यूएस में ये शाखाएं हफ्ते में एक बार लगती हैं जबकि ब्रिटेन में दो बार। ब्रिटेन में कुल 84 जगहों पर शाखाएं लगती हैं।

हॉफ पेंट से फुल होने में लग गए 90 साल
RSS में खाकी नेकर की बजाय फुल पेंट पहनने को मंजूरी मिल गई। 90 नब्बे साल पुरानी इस यूनीफॉर्म को बदलने को लेकर 16 वर्षों से चर्चा चल रही थी। अब जाकर फुल पेंट पर मुहर लग पाई। भैयाजी कहते हैं कि बदलाव जीवन का हिस्सा है, ड्रेस कोड के नए कलेवर को भी इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए। संघ के आलोचक गुजरते जमाने का बताते हैं। धीरे-धीरे ही सही पर संघ की यूनीफॉर्म में कई बार बदलाव किया जा चुका हैं।


RSS में अब तक यह हुए बदलाव
1925 में 27 सितंबर दशहरे (विजयादशमी) पर डॉ.केशवराम बलिराम हेडगेवार ने इस संगठन को खड़ा किया था। इसके पीछे हेडगेवार की मंशा समाज और राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोने की थी। इस संगठन को 90 साल पूरे हो गए हैं।

-1925 में द्वितीय विश्व युद्ध के शुरुआत के दौरान RSS में ड्रेस कोड खाकी ही था। इसे प्रथम सरसंघचालक हेडगेवार ने ही डिजायन किया था। उन्होंने इसे कांग्रेस सेवा दल के ड्रेस से प्रेरित होकर यह निर्णय लिया था। 1939 तक यही खाकी यूनीफार्म के रूप में बनी रही।


-1940 में खाकी कमीज को सफेद शर्ट में तब्दील कर दिया गया। इससे पहले तक खाकी शर्ट ही पहना जाता था।

-1973 में फिर एक बदलाव हुआ। संघ ने अपनी यूनीफॉर्म में शामिल जूतों को बदल लिया। पहले फौजियों के समान बूट चलन में थे। उसके बाद चमड़े के जूते शामिल कर लिए गए। बाद में इन जूतों की खरीद पर भी छूट मिलती थी।

-2010 में फिर बदलाव हुआ और यूनीफॉर्म में शामिल बेल्ट को बदल दिया गया। पहले कैनवास का बेल्ट पहना जाता था, जिसे चमड़े का कर दिया गया।

2016 आरएसएस के सदस्य अभी तक खाकी हाफ पैंट और पूरी बांहों वाली सफेद कमीज पहनते थे, जो कुहनी तक मुड़ी होती है। अपनी नई यूनीफॉर्म में वे काली टोपी भी पहनते हैं।


हर धर्म के लोगों के एक हैं पूर्वज
देश को एक सूत्र में पिरोने के लिए संघ की स्थापना हुई। इसमें सभी जाति-धर्म के लोगों का समान स्थान है। सभी एक भारत माता की संतान हैं। अपने भारत को माता के रूप में मानकर हम देश के सभी लोगों को एक सूत्र में पिरो सकते हैं। प्रेरणा की दृष्टि से भी भारत माता को उचित स्थान दिलाना, देश का गौरव बढ़ाना, देश की संस्कृति जन-जन तक पहुंचाना संघ का उद्देश्य है। संघ में अलग-अलग उपासना पद्धति होने के बाद भी हम सब एक हैं। हर धर्म के लोगों के पूर्वज एक ही हैं। इस नाते भी हम एक हैं।
नरेंद्र जैन, क्षेत्र संघ प्रचार, मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़