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बदलाव: नींबू घास के तेल से महक रहा किसानों का जीवन, तेल, साबुन, अगरबत्ती के साथ ही दवाएं बनाने में उपयोग

औषधीय पौधों को रास आ रही बुंदेलखंड की जलवायु, कृषि विज्ञान केंद्र ने परिस्थितियों के अनुकूल नींबू घास की खेती शुरू कराई है टीकमगढ़. बुंदेलखंड की जलवायु नींबू घास को खासी रास आ रही है। इससे निकलने वाला खास तेल अब यहां के किसानों के जीवन में सुगंध भर रहा है। दवाओं एवं सौंदर्य प्रसाधन […]

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औषधीय पौधों को रास आ रही बुंदेलखंड की जलवायु, कृषि विज्ञान केंद्र ने परिस्थितियों के अनुकूल नींबू घास की खेती शुरू कराई है

टीकमगढ़. बुंदेलखंड की जलवायु नींबू घास को खासी रास आ रही है। इससे निकलने वाला खास तेल अब यहां के किसानों के जीवन में सुगंध भर रहा है। दवाओं एवं सौंदर्य प्रसाधन के लिए उपयोग आने वाले इसके तेल की किसानों को बाजार में अच्छी कीमत मिल रही है तो इसकी जड़ तक किसानों को मालामाल कर रही है। ऐसे में लगातार किसान अब इसकी खेती की ओर आगे आ रहे हैं।

बुंदेलखंड में अवर्षा, उमस और गर्मी के साथ ही 40 डिग्री से ऊपर पहुंचने वाला तापमान जहां पारंपरिक फसलों के लिए प्रतिकूल है तो यह मौसम सुगंधित पौधों की खेती के लिए पूरी तरह से अनुकूल बना है। ऐसे में कृषि विज्ञान केंद्र ने बुंदेलखंड की जलवायु और परिस्थितियों के अनुकूल नींबू घास की खेती शुरू कराई है। पिछले 3 सालों से इस खेती में जुटे 25 किसानों को इससे खासा मुनाफा हुआ है। ऐसे में जहां यह किसान अब इसका रकबा बढ़ाने की बात कह रहे है तो नए बड़े किसान भी इसके लिए आगे आ रहे है।

फूल से लेकर जड़ तक उपयोगी
कृषि विज्ञान केंद्र में यह परियोजना शुरू करने वाले वैज्ञानिक डॉ आरके प्रजापति ने बताया कि जिले में बारिश की अनिश्चितता के चलते हर बार किसानों को पारंपरिक खेती में नुकसान होता था। यहां की बंजर भूमि, सूखा इलाका, मवेशियों के साथ ही कीट व्याधी फसल पैदा करने के लिए किसानों के लिए बड़ी चुनौती थी। ऐसे में उन्होंने इन परेशानियों को देखते हुए ग्राम काटी के 25 किसानों को इसके लिए राजी किया। उन्होंने बताया कि नींबू घास में जहां कीड़े नहीं लगते वहीं है तो इसे मवेशी भी नहीं खाते। इसमें पानी की भी ज्यादा आवश्यकता नहीं होती नही है। नींबू घाट की खेती हर प्रकार से यहां के पर्यावरण के अनुकूल थी। इन किसानों ने एक-एक एकड़ जमीन में खेती कर दो साल में 16 से 20 लाख रुपए कमाए है।

बड़ा रहे रकबा
नींबू घास की खेती करने वाले किसान मथुरा प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2020-21 में यह खेती शुरू की थी। एक एकड़ में नींबू घास का तेल बेच कर जहां 3 लाख रुपए कमाए थे तो इसकी जड़ बेच कर 16 लाख रुपए की आय हुई थी। इस बार वह एक हैक्टेयर में इसकी बोवनी करेंगे।

यह होता है उपयोग

  • नींबू घास का उपयोग तेल, साबुन, अगरबत्ती के साथ ही दवाएं बनाने के लिए किया जाता है।
  • एंटी-फंगल, एंटी-एसिडिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं बनाई जाती हैं। नींबू घास के तेल का उपयोग कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने, पाचन तंत्र, तनाव दूर करने, शरीर को डिटॉक्स करने के लिए किया जाता है।
  • एक बार इसकी जड़ लगाने पर यह पांच सालों तक घास देती है। साल में तीन से चार बार इसकी कटाई की जाती है। वहीं एक पेड़ में तीन साल में 300 से 500 जड़े हो जाती है। इसकी जड़ भी बेची जाती है।