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सजा कब की हो गईं पूरी, पाकिस्तानी जेल में फिर भी सिसकते भारतीय मछुआरे

– हाल ही में कैद मछुआरों के परिजन, दमण-दीव सांसद व अन्य विदेश मंत्री से मिले दिनेश भारद्वाज. सूरत. भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री सीमा में मछली पकड़ने गए सैकड़ों भारतीय मछुआरे अक्सर अनजाने में अंतरराष्ट्रीय जल सीमा पार कर पाकिस्तानी हिरासत में पहुंच जाते हैं। इसके बाद वे वर्षों जेल की सलाखों के […]

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- हाल ही में कैद मछुआरों के परिजन, दमण-दीव सांसद व अन्य विदेश मंत्री से मिले

- हाल ही में कैद मछुआरों के परिजन, दमण-दीव सांसद व अन्य विदेश मंत्री से मिले

दिनेश भारद्वाज. सूरत.

भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री सीमा में मछली पकड़ने गए सैकड़ों भारतीय मछुआरे अक्सर अनजाने में अंतरराष्ट्रीय जल सीमा पार कर पाकिस्तानी हिरासत में पहुंच जाते हैं। इसके बाद वे वर्षों जेल की सलाखों के पीछे रहने को मजबूर होते हैं। बीती एक जनवरी को दोनों देशों ने 2008 के कांसुलर एक्सेस समझौते के तहत कैदियों और मछुआरों की नवीनतम सूची साझा की है। इस सूची के अनुसार, पाकिस्तान की जेलों में 199 भारतीय मछुआरे और 58 नागरिक कैदी हैं। इनमें से 167 भारतीयों ने सजा पूरी कर ली है। फिर भी उनकी रिहाई का इंतजार लंबा होता जा रहा है। भारत ने सजा पूरी कर चुके लोगों की तत्काल रिहाई और स्वदेश वापसी की मांग की है।- मछुआरों की रिहाई के हो ठोस प्रयासपाकिस्तानी जेलों में बंद भारतीय मछुआरों की रिहाई के लिए गुजरात के समुद्री श्रमिक सुरक्षा संघ, कोडिनार के प्रमुख बालूभाई सोचा ने गुजरात सरकार और विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है। हाल ही में मछुआरा हितों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली का दौरा किया। इसमें शामिल दमण-दीव के सांसद उमेश पटेल, सामाजिक कार्यकर्ता जतिन गांधी, जीवन जूंगी, छगन बामनिया व कैद मछुआरों की परिजन महिलाओं ने विदेश मंत्री एस जयशंकर व अन्य अधिकारियों से मुलाकात की और जेलों में बंद मछुआरों की दयनीय स्थिति की जानकारी दी।पहलगाम हमले का साया: तनाव ने बढ़ाई मुश्किलें2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने भारत-पाकिस्तान संबंधों को गहरे तनाव में डाल दिया। इस हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव हुआ। हालांकि टकराव समाप्त हो गया, लेकिन राजनयिक संबंध ठंडे पड़ गए हैं। इस तनाव का सीधा असर कैदियों और मछुआरों की रिहाई पर पड़ा है।

- मुश्किल भरा समय, सरकार ने दिया आश्वासन

गरीब मछुआरों के परिवार के लिए यह मुश्किल भरा समय है। सरकार ने उनकी जल्द रिहाई का आश्वासन दिया है।

- उमेश पटेल, सांसद, दमण-दीव- मानवीय मुद्दे पर सहमति बनाएं

यह मुद्दा केवल आंकड़ों का नहीं, सैकड़ों परिवारों की जिंदगी का सवाल है। समय आ गया है कि भारत और पाकिस्तान इस मुद्दे पर सहमति बनाएं और इन निर्दोष मछुआरों को उनके घर वापस भेजें।

- जतिन देसाई, सामाजिक कार्यकर्ता

समझौते की मुख्य धाराएं

कैदियों की सूची का साल में दो बार आदान-प्रदान।राष्ट्रीयता की पुष्टि और सजा पूरी होने के एक महीने के अंदर रिहाई।

कैदियों को मानवीय आधार पर तत्काल कांसुलर एक्सेस।नावों की वापसी का प्रावधान, लेकिन वास्तविकता में ये प्रावधान अक्सर कागजी रह जाते हैं।

हाल की कुछ रिहाइयां

2025 फरवरी: पाकिस्तान ने 22 भारतीय मछुआरों को रिहा किया, जो सजा पूरी करने के बाद घर लौटे।

2023 से अब तक: 500 भारतीय मछुआरे और 13 नागरिक कैदी पाकिस्तान से वापस लाए गए। फिर भी, 200 कैदी अभी भी इंतजार में हैं।