
kulish janm shti versh
भीलवाड़ा। पत्रकारिता के पुरोधा और पत्रिका समूह के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश के जन्म शताब्दी वर्ष में मंगलवार को सेवा का एक नया अध्याय लिखा। 'सेवा परमो धर्म' के ध्येय वाक्य को धरातल पर उतारते हुए राजस्थान पत्रिका और राजस्थान जनमंच के संयुक्त तत्वावधान में सौ जरूरतमंद परिवारों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी। रामधाम के पीछे काशीपुरी-वकील कॉलोनी िस्थत माहेश्वरी भवन में आयोजित गरिमामय समारोह में संतों और गणमान्य नागरिकों के हाथों निःशुल्क बिस्तर वितरित हुए, तो सेवा का संकल्प एक आत्मीय उत्सव में बदल गया।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों ने मंत्रोच्चार के साथ दीप प्रज्ज्वलन से की। राजस्थान पत्रिका भीलवाड़ा संस्करण के सम्पादकीय प्रभारी अनिल सिंह चौहान ने अतिथियों और आगंतुकों का स्वागत करते हुए श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जन्म शताब्दी वर्ष पर हो रहे कार्यक्रम की जानकारी दी। कार्यक्रम में अतिथियों ने ओजस्वी उद्बोधन में पत्रिका की पहल को 'ईश्वर की वास्तविक पूजा' बताया।
उनका कहना था कि कर्पूर चन्द्र कुलिश जी ने राजस्थान में पत्रकारिता के माध्यम से वैचारिक क्रांति का सूत्रपात किया। उन्होंने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को न केवल मजबूती दी, बल्कि उसे आम आदमी की समस्याओं से जोड़ा। उन्होंने प्रकृति, संस्कृति और समाज के बीच गहरा तालमेल बिठाया। इस अवसर पर अतिथियों ने झुग्गी-झोपड़ियों और कच्चे मकानों में रह रहे सौ परिवारों को बिस्तर वितरित किए।
राजस्थान जन मंच के अध्यक्ष कैलाश सोनी ने आभार जताया। संचालन हंसा व्यास ने किया। कार्यक्रम मे नगर निगम के आयुक्त हेमाराम चौधरी, भीलवाड़ा इलेक्टि्क एसोसिएशन के संरक्षक रामपाल सोनी, समाज सेवी कुंज बिहारी जागेटिया, सुरेश बिड़ला, शिवप्रकाश चन्नाल, रामचन्द्र मूंदड़ा, जगदीश सेन, जयनारायण जोशी, चिंटू शर्मा, सूरज करण शर्मा, दीपक चन्नाल, वेदांत सोनी, मोनू प्रजापत, लोकेश खारोल तथा अशोक सैनी मौजूद रहे।
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बोले वक्ता.....
कुलिश जी केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और वेदों के मर्मज्ञ थे। उन्होंने 'शब्द' को ब्रह्म माना और उसे जन-सेवा का माध्यम बनाया। उनकी जन्म शताब्दी पर परिवारों को बिस्तर वितरण करना उनके उसी 'परहित' के विचार को जीवित रखना है।
- महंत मोहन शरण शास्त्री, निम्बार्क आश्रम
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पत्रकारिता के पुरोधा होने के साथ वे एक महान समाज सुधारक भी थे। राजस्थान पत्रिका आमजन के सुख-दुख में हमेशा खड़ा रहा है। वहीं सामाजिक सरोकार में भी पत्रिका की भूमिका हमेशा अग्रणी रही है।
- संत दास महाराज, हाथीभाटा आश्रम
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कुलिश जी ने सदैव निर्भीक होकर सच का साथ दिया, उनके भीतर एक अत्यंत कोमल और संवेदनशील हृदय था, जो समाज के वंचित वर्ग के लिए सदैव द्रवित रहता था।
- पुजारी मुरारी पांडे, पंचमुखी हनुमान मंदिर पुर रोड
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श्रद्धेय कुलिश जी ने सदैव निर्भीक पत्रकारिता के साथ सामाजिक सरोकारों को सर्वोपरि रखा। आज का यह आयोजन उसी विरासत को आगे बढ़ाने की एक विनम्र कोशिश है, जहां कलम के साथ कदम भी समाज सेवा की ओर बढ़ रहे हैं।
- राकेश पाठक, निवर्तमान महापौर, नगर निगम
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कुलिश जी एक ऐसे युगपुरुष थे जिन्होंने प्रकृति, संस्कृति और समाज के बीच तालमेल बिठाया। उनके लेखन में मिट्टी की सोंधी खुशबू और ग्रामीण परिवेश की चिंता झलकती थी। कोई छोटा हो या बड़ा सबके साथ आत्मीयता से मिलते थे।
- बाबूलाल जाजू, पर्यावरण विद
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यह बोला परिवार
मेरे लिए आज का दिन किसी उत्सव से कम नहीं है। हम जैसे गरीब परिवारों के लिए सर्द रातें काटना बहुत भारी पड़ता है। राजस्थान पत्रिका और जनमंच ने हमें ये बिस्तर देकर बड़ा सहारा दिया।
- खुशबू
कुलिश जी ने जिस अखबार की नींव रखी, वह आज हमारे दुख-दर्द में भागीदार बन रहा है। राजस्थान पत्रिका सामाजिक सरोकार में हमेशा आगे रहा है।
- लक्ष्मी देवी कुचबंदा
जब मुझे टोकन मिला, तो यकीन नहीं हुआ कि कोई हमें मुफ्त में नए बिस्तर देगा। संतों के हाथों से यह भेंट पाकर मन भर आया। कुलिश जी के बारे में यहां आकर बहुत कुछ सुना, वे वाकई बड़े इंसान थे।
- साक्षी देवी
हम लोग समाज के उस कोने में रहते हैं जहां अक्सर मदद पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ देती है। कुलिश जी के जन्म शताब्दी वर्ष पर पत्रिका ने हमें याद रखा, यह बड़ी बात है।
- पूनम
इंसान दूसरों के दुख को अपना समझे वही बड़ा होता है। कुलिश जी ऐसे ही महापुरुष रहे, तभी आज उनके जाने के इतने साल बाद भी लोग उनके नाम पर पुण्य के काम कर रहे हैं।
- सपना
Published on:
25 Feb 2026 01:14 pm
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