
Shani Jayanti Jyeshtha Amavasya
Shani Jayanti Jyeshtha Amavasya Shani Jayanti 2024 Date - 6 जून को ज्येष्ठ अमावस्या है, मान्यता है कि इसी दिन शनि देव का जन्म हुआ था। इसलिए ज्येष्ठ अमावस्या पर शनि जयंती मनाई जाती है, इसे शनि अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। शनि जयंती इस बार गुरुवार के दिन पड़ रही है। शनि जयंती पर शनिदेव की प्रसन्नता के लिए उपवास रखें और शनि की विधिवत पूजा पाठ व मंत्र जाप करें। इससे शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। माना जाता है कि जिसने शनिदेव को प्रसन्न कर लिया उसे जीवन में कभी कोई कष्ट नहीं होता। उनके आशीर्वाद के बिना कोई भौतिक सुख नहीं मिलता।
शनि को क्रूर ग्रह कहकर प्राय: डराया जाता है लेकिन हकीकत यह है कि वे न्याय के देवता है, कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं। अच्छे कर्म किए हो तो शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और बुरे कर्मों की वे सजा देते हैं। जीवन का एक भी सुख शनिदेव की प्रसन्नता के बिना प्राप्त नहीं किया जा सकता। शनि विशेष रूप से वाहन सुख और धन संपत्ति के कारक हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण बुचके के अनुसार शनि जयंती Shani Jayanti Jyeshtha Amavasya ऐसा दुर्लभ अवसर है जिस दिन शनिदेव को सरलता से प्रसन्न किया जा सकता है। धर्म शास्त्रों में शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए कई मंत्रों की रचना की गई है। उन्हीं में से कुछ सरल मंत्र नीचे दिए गए हैं। शनि जयंती पर इनका विधि-विधान से जाप करें तो शनिदेव शीघ्र ही प्रसन्न हो जाएंगे। जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढय्या का प्रभाव है, वे लोग भी इस दिन पूजा कर शनिदेव की कृपा पा सकते हैं। ये मंत्र इस प्रकार हैं-
– सरल मंत्र
ऊं शं शनैश्चराय नम:।
– बीज मंत्र
ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:
– लघु मंत्र
ऊं ऐं ह्लीं श्रीशनैश्चराय नम:।
शनि जयंती मुहूर्त
इस साल ज्येष्ठ अमावस्या तिथि की शुरुआत बुधवार 5 जून 2024 को रात 7.54 बजे हो जाएगी। अमावस्या तिथि बृहस्पतिवार यानि गुरुवार को 6 जून को शाम 6.07 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार शनि अमावस्या गुरुवार यानि 6 जून 2024 को है यानि शनि जयंती Shani Jayanti 2024 Date 6 जून को मनाई जाएगी। गुरुवार को रात 10.09 बजे तक बेहद शुभ धृति योग बन रहा है। इस योग में पूजा साधना जरूर सफल होती है। इस योग में किए काम भी सफल होते हैं। विशेष रूप से गणेशजी की पूजा से मनोवांछित फल मिलते हैं।
ऐसे करें पूजन और जाप
शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद स्वच्छ आसन पर बैठकर सामने शनिदेव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और नीले फूल चढ़ाएं। इसके बाद रूद्राक्ष की माला से उपरोक्त में से किसी एक मंत्र की कम से कम एक माला जप करें। ध्यान रहे कि जितना ज्यादा जाप करेंगे उतना फायदा मिलेगा। जाप के दौरान शनिदेव का मन ही मन ध्यान करते रहें। शनिदेव से अपने बुरे कर्मों के लिए क्षमा जरूर मांगे ओर उनकी प्रसन्नता के लिए प्रार्थना करें। प्रत्येक शनिवार को इस मंत्र का इसी विधि से जाप करने की कोशिश करें। इससे कुछ ही दिनों में शनिदेव की कृपा आपको प्राप्त होने लगेगी।
Published on:
02 Jun 2024 09:28 pm
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