
हिन्दू धर्म में पूजा-पाठ और अन्य कर्मकांडों का विशेष महत्व है, पूजा के दौरान घटित होने वाली शुभ घटनाएं तो भले ही किसी की नजर में आएं या ना आएं, लेकिन अगर कुछ ऐसा घटित हो जाए जो सही नहीं है तो मन में वहम जरूर आ जाता है। सभी मंदिरों में लगभग हर श्रद्धालु नारियल जरुर चढ़ाता है। श्रीफल को हम ईश्वर को भेंट के रुप में अर्पित करते हैं। कई लोग इसे नारियल के नाम से भी जानते हैं, दरअसल नारियल का संस्कृत शब्द श्रीफल होता है, और श्री का अर्थ लक्ष्मी से होता है, लक्ष्मी के बिना कोई भी शुभ कार्य पूर्ण नहीं हो सकता है इसलिए शुभ कार्यों में नारियल अवश्य रखा जाता है।
ऐसा माना जाता है कि नारियल को फोडते समय हम भगवान के सामने अपना अहंकार को समर्पित कर रहे हैं। ऐसा करने पर अज्ञानता और अहंकार का कठोर कवच टूट जाता है और नारियल के सफेद हिस्से के रूप में ये आत्मा की शुद्धता और ज्ञान का द्वार खोलता है। सामान्यत: जल, सफेद और चांदी की वस्तुओं में चंद्र का वास होता है और जहां चंद्रमा का वास होता है वहां शांति स्थापित होती है। नारियल की शिखाओं में सकारात्मक ऊर्जा का भंडार भी होता है यही वजह है कि पूजन कार्यों और शुभ कार्यों में नारियल को कलश पर रखकर इसकी पूजा की जाती है।
क्या आप जानते हैं एकाक्षी नारियल का महत्व
एकाक्षी नारियल माता लक्ष्मी का साक्षात स्वरूप माना जाता हैए एकाक्षी नारियल का अपना अलग महत्व है। नारियल में दो काले बिंदू होते हैं जो की नारियल की आंखे कहलाती है लेकिन बहुत ही कम मात्रा में ऐसे नारियल प्रयास करने से मिल जाते हैं, जिस पर एक ही आंख होती है। एकाक्षी नारियल घर में स्थायी सम्पतिए ऐश्वर्य और आनन्द देता है। नारियल पर चंदन, केशर, रोली मिलाकर उसका तिलक ललाट पर लगाने से व्यक्ति हर कार्य में पूर्ण सफलता प्राप्त करने लगता है। एकाक्षी नारियल में धन आकर्षण की अद्भुत क्षमता होती है।
आपको बताते है एकाक्षी नारियल की पूजा कैसे करें?
एकाक्षी नारियल प्राप्त होने पर किसी शुभ मुहूर्त जैसे दीपावली, रवि-पुष्य, गुरु-पुष्य, होली इत्यादि में इसका विधि के अनुसार पूजन करें।
Published on:
25 Apr 2018 02:02 pm
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