
छिंदवाड़ा. ‘मां’ वह शब्द है जो दुनिया के हर इंसान के लिए सबसे खास है। मां और बच्चों का रिश्ता सबसे प्यारा होता है। मां का प्यार एक सामान्य इंसान को असंभव काम करने में सक्षम बनाता है। हम सभी के जीवन में मां का स्थान सबसे उपर होता है, क्योंकि मां वो पहली गुरु होती हैं जिन्होंने हमें चलना, बोलना और प्यार करना सिखाया। हर साल मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे काफी खास और अनोखे तरीकों से मनाया जाता है। इस वर्ष ये खास दिन आज है। मां पल-पल जितने बलिदान अपने बच्चे के लिए देती है उसका शुक्रिया अदा करने लिए एक दिन तो क्या बल्कि पूरी उम्र कम है, लेकिन फिर भी एक खास दिन को मां के नाम कर दिया गया है। इस खास मौके पर हमने शहर की ऐसी मां से उनके अनुभव जानें, जो पहली बार मां बनी हैं। सभी का कहना था कि पहली बार मां बनना और फिर एक अच्छी मां बनना बड़ी चुनौती होती है। आप एक बहू भी होती हैं और एक पत्नी भी और न जाने कितने ऐसे रिश्ते होते हैं जिन्हें आपको संभालना है। घर के कामकाज को व्यवस्थित करना है और अगर आप कामकाजी महिला हैं तो वहां भी आपको शत प्रतिशत देना है। इन सबसे पहले आपके आपने बच्चे को अच्छी तरह पालना है।
सात साल बाद पहली बार मां बनकर हुआ सुखद एहसास
हर वक्त लोग आपको करते हैं जज
खट्टा मीठा होता है पहली बार मां बनने का अनुभव
वत्सला दामले की चार वर्षीय बेटी नवी दामले हैं। उन्होंने बताया कि पहली बार मां बनने का अनुभव खट्टा मीठा होता है। एक युवती पत्नी और फिर मां बन जाती है और फिर उसकी सारी प्राथमिकता बदल जाती है। स्त्रियों को हमेशा से सजने का बहुत शौख रहता है, लेकिन जब वह मां बनती है तो अपने बच्चे के लिए सजना-संवरना छोड़ देती है। मां के लिए प्राथमिकता बदल जाती है। पहले बच्चा, फिर परिवार और फिर खुद को देखती है। बच्चे के पालन पोषण के दौरान लोगों के आरोप-प्रत्यारोप भी लगते हैं। बच्चे को चोट लग गई तो मां दोषी, बच्चा बिस्तर से गिर गया तो मां दोषी। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता जाता है जिम्मेदारी बड़ी होती जाती है। इन सबको निभाते हुए एक मां बच्चे की परवरिश में कोई कसर नहीं छोड़ती।
Published on:
12 May 2024 09:37 am

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