
Cancer is knocking at every door, our plate and habits are becoming the cause of death.
चार फरवरी का दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि कैंसर के खिलाफ समाज को जागरूक करने का संकल्प दिवस है। आज इंसान तकनीक के मामले में भले ही ‘स्मार्ट’ हो गया हो, लेकिन उसकी जीवनशैली तेजी से ‘डेंजर जोन’ में पहुंच रही है। कैंसर का सबसे बड़ा कारण हमारी रोजमर्रा की आदतें बन चुकी हैं। गुटखा व तंबाकू के अलावा मिलावटी तेल-मसाले, पैकेटबंद खाद्य पदार्थ, फास्ट फूड और शारीरिक श्रम की कमी कैंसर को न्योता दे रही है। राजस्थान में पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो कैंसर रोगियों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जिसमें युवाओं की बढ़ती भागीदारी बेहद चिंताजनक है।
प्रोसेस्ड फूड जैसे चिप्स, बर्गर, पिज्जा और शुगरयुक्त ड्रिंक्स आम हो गए हैं, जो कैंसर कोशिकाओं के विकास में सहायक माने जाते हैं। गर्म भोजन को प्लास्टिक के बर्तनों में रखना धीमे जहर जैसा है। सब्जियों और फलों को बिना धोए खाना भी कैंसर के बड़े कारण बने हुए हैं।
कैंसर अचानक नहीं होता, बल्कि यह धीरे-धीरे शरीर में पनपता है और कई संकेत देता है। नजरअंदाज करने की लापरवाही बीमारी को तीसरे या चौथे स्टेज तक पहुंचा देती है, जहां इलाज कठिन हो जाता है। सरकारी अस्पतालों में निशुल्क जांच सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद मरीज देर से अस्पताल पहुंचते हैं।
शरीर में बिना दर्द की गांठ, तीन हफ्तों से अधिक खांसी या आवाज में भारीपन, मल-मूत्र त्याग की आदतों में बदलाव, त्वचा पर तिल या मस्से के रंग-आकार में परिवर्तन, बिना प्रयास वजन का तेजी से घटना ये सभी कैंसर के संभावित संकेत हो सकते हैं। बचाव के लिए रोजाना 30 मिनट योग या व्यायाम, संतुलित आहार, फल-सब्जियों का सेवन और पर्याप्त नींद कैंसर के खतरे को कम करती है।
कैंसर अब लाइलाज नहीं है। इसकी सबसे बड़ी दवा समय पर पहचान है। पहले स्टेज में पहचान होने पर रिकवरी दर 90 प्रतिशत से अधिक होती है। स्क्रीनिंग से डरने के बजाय इसे आदत बनाएं और अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव करें।
डॉ. ओमप्रकाश शर्मा, ईएनटी एवं मुख कैंसर विशेषज्ञ, एमजीएच
Published on:
03 Feb 2026 08:33 pm
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