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छोटे शहरों में MSMEs को मिल रहा डिजिटल और लॉजिस्टिक्स का मजबूत आधार, जानें कैसे?

भारत में क्षेत्रीय D2C ब्रांड्स तेजी से बढ़ रहे हैं। Shiprocket लॉजिस्टिक्स चुनौतियों को सुलझाकर MSMEs को सशक्त बना रहा है, जिससे छोटे शहरों के व्यापारी अब बिना बड़े निवेश के राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों में अपनी पहचान बना रहे हैं।

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नोएडा

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Abrar Ahmad

Apr 09, 2026

Small town MSMEs are gaining a strong digital and logistics base know how

भारत में ई-कॉमर्स का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। अब यह केवल बड़े शहरों और बड़े मार्केटप्लेस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सूरत, लखनऊ, कोच्चि और रायपुर जैसे शहरों के छोटे और मझोले ब्रांड्स भी अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। ये ब्रांड्स अपने वेबसाइट और सोशल मीडिया चैनलों के जरिए सीधे ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) मॉडल को तेजी से अपना रहे हैं।

इस बदलाव के केंद्र में Shiprocket उभरकर सामने आया है, जो MSMEs के लिए एक अग्रणी ई-कॉमर्स एनेबलमेंट प्लेटफॉर्म के रूप में काम कर रहा है। Shiprocket एक एंड-टू-एंड, मर्चेंट-फर्स्ट और एपीआई-आधारित समाधान प्रदान करता है, जो शिपिंग, फुलफिलमेंट, चेकआउट और पोस्ट-ऑर्डर मैनेजमेंट जैसी सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है।

उद्योग से जुड़े हालिया अध्ययनों के अनुसार, एमएसएमई पहले से ही देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं और आने वाले सालों में ऑनलाइन रिटेल ग्रोथ में उनकी भूमिका और अधिक बढ़ने वाली है। विशेष रूप से D2C सेगमेंट पारंपरिक मार्केटप्लेस की तुलना में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें मेट्रो शहरों के बाहर के क्षेत्रों का योगदान उल्लेखनीय है।

इन रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि छोटे शहरों और ग्रामीण भारत में ऑनलाइन उपभोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ रहे हैं। साथ ही, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम  जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से सोशल और चैट कॉमर्स एक नए बाजार के रूप में उभर रहा है, जिसमें लोकल बुटीक, क्षेत्रीय फूड ब्रांड्स और किराना स्टोर्स सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

हालांकि, एमएसएमई के सामने कई चुनौतियां भी हैं। उच्च शिपिंग लागत, विभिन्न सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच समन्वय की कमी, मल्टीपल कूरियर पार्टनर्स और पेमेंट गेटवे का प्रबंधन, रिटर्न्स और रिकॉन्सिलिएशन की जटिलता ये सभी समस्याएं छोटे व्यापारियों के लिए बाधा बनती हैं। इसके अलावा, अधिकांश छोटे व्यवसायों के पास अलग से तकनीकी टीम रखने की क्षमता भी नहीं होती।

इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए Shiprocket ने एक सरल और प्रभावी समाधान विकसित किया है। इसका प्लेटफॉर्म कई कूरियर पार्टनर्स को एक ही इंटरफेस में जोड़ता है, जिससे व्यापारी हर ऑर्डर के लिए कीमत, डिलीवरी समय और रेटिंग की तुलना आसानी से कर सकते हैं। इसके फुलफिलमेंट सेंटर और यूनिफाइड कॉमर्स सिस्टम ऑनलाइन और ऑफलाइन चैनलों को जोड़ते हैं, जिससे लोकल स्टोर का स्टॉक भी ऑनलाइन ऑर्डर पूरा कर सकता है।

इसके अतिरिक्त, Shiprocket का क्रॉस-बॉर्डर समाधान भारतीय व्यापारियों को 100 से अधिक देशों में अपने उत्पाद भेजने में सक्षम बनाता है। वहीं, वन-क्लिक चेकआउट सुविधा प्री-फिल्ड एड्रेस, मल्टीपल पेमेंट ऑप्शन और फ्रॉड कंट्रोल के जरिए बेहतर ग्राहक अनुभव प्रदान करती है, जिससे कन्वर्जन रेट में सुधार होता है और कार्ट छोड़ने की समस्या कम होती है।

इस तरह, सेलम की साड़ी ब्रांड से लेकर भोपाल के स्नैक मेकर तक, Shiprocket अब केवल एक सेवा प्रदाता नहीं बल्कि एक रणनीतिक साझेदार बन चुका है। यह प्लेटफॉर्म क्षेत्रीय D2C ब्रांड्स को बिना बड़े निवेश के राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार तक पहुंचने का अवसर प्रदान कर रहा है।