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जयपुर ट्रैफिक पर खुला पत्र: ट्रैफिक बना पहेली, क्या सिर्फ बैरिकेड ही है समाधान? वैज्ञानिक सर्वे और संवाद की जरूरत

पुलिस महानिदेशक महोदय, इन दिनों जयपुर के लगभग हर चौराहे, हर दफ्तर और हर चाय की टेबल पर एक ही चर्चा सुनाई देती है-राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था। नि:संदेह आप और आपका पुलिस महकमा भी इस चिंता से अनभिज्ञ नहीं हैं। इसी कारण हाल के दिनों में ट्रैफिक सुधार के नाम पर कई बदलाव किए गए हैं…

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जयपुर

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Anand Prakash Yadav

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विजय चौधरी

Mar 16, 2026

पुलिस मुख्यालय राजस्थान, (फोटो सोर्स: पत्रिका)

पुलिस मुख्यालय राजस्थान, (फोटो सोर्स: पत्रिका)

पुलिस महानिदेशक महोदय, इन दिनों जयपुर के लगभग हर चौराहे, हर दफ्तर और हर चाय की टेबल पर एक ही चर्चा सुनाई देती है-राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था। नि:संदेह आप और आपका पुलिस महकमा भी इस चिंता से अनभिज्ञ नहीं हैं। इसी कारण हाल के दिनों में ट्रैफिक सुधार के नाम पर कई बदलाव किए गए हैं… कहीं डिवाइडर कट बंद हुए, कहीं सर्विस रोड रोकी गई, तो कहीं बैरिकेड लगाकर मार्ग की दिशा ही बदल दी गई।

सी-स्कीम का मालन का चौराहा इसका सबसे जीवंत उदाहरण है, जहांं बैरिकेड लगाने से नागरिकों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है और आस-पास की सड़कों पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे निर्णय केवल एक चौराहे तक सीमित नहीं रहते। उनका असर धीरे-धीरे पूरे इलाके की यातायात व्यवस्था पर दिखाई देता है। अतिरिक्त दूरी, बढ़ता ईंधन खर्च और समय की बर्बादी अब लोगों के रोजमर्रा के अनुभव का हिस्सा बन गई है।

लोगों की उलझन बढ़ा रही व्यवस्था

शहर में ऐसे कई उदाहरण सामने आ रहे हैं जो नागरिकों की उलझन को और बढ़ाते हैं। राम मंदिर सर्कल, हवा सड़क क्षेत्र में 22 गोदाम पुलिया से सिविल लाइंस की ओर जाने वाले मार्ग पर वीआइपी मूवमेंट के समय बैरिकेड हटा दिए जाते हैं, लेकिन सामान्य दिनों में वही रास्ता दिनभर बंद रहता है और रात में खोला जाता है। इसी तरह भवानी सिंह रोड और तिलक मार्ग के बीच वकील आंदोलन के दौरान लगाया गया ट्रैफिक डायवर्जन अब लगभग स्थायी व्यवस्था बन गया है।

कभी बैरिकेड हटा दिए जाते हैं और कभी लगा दिए जाते हैं, जिससे वाहन चालकों को अनिश्चितता और लंबे चक्कर का सामना करना पड़ता है। परकोटा क्षेत्र में कई डिवाइडर कट बंद कर दिए जाने से ट्रैफिक का दबाव छोटी और बड़ी चौपड़ जैसे प्रमुख चौराहों पर आ गया है, जहां पहले ही वाहनों की रेलमपेल रहती है। टोंक रोड पर कमल एंड कंपनी के पास भी ट्रैफिक पुलिस की ओर से बैरिकेड लगाकर कट बंद किया गया है, जिसके कारण लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है और शाम के समय जाम की स्थिति बन जाती है। इसी तरह बाइस गोदाम पुलिया से सरदार पटेल मार्ग की ओर जाने वाला पहला कट भी बंद कर दिया गया है, जिससे आवागमन प्रभावित हो रहा है।

सिर्फ वीआइपी मूवमेंट पर फोकस

इन उदाहरणों का उद्देश्य केवल शिकायत करना नहीं है, बल्कि उस व्यापक चिंता को सामने रखना है जो आज शहर के नागरिक महसूस कर रहे हैं। सबसे बड़ी उलझन इन निर्णयों की प्रक्रिया को लेकर है। आम नागरिक को यह समझ नहीं आता कि किस आधार पर कोई कट बंद होता है, कोई रास्ता रोका जाता है या कोई नई व्यवस्था लागू की जाती है। न कोई सार्वजनिक ट्रैफिक अध्ययन सामने आता है और न ही यह बताया जाता है कि यह व्यवस्था अस्थायी है या स्थायी। परिणामस्वरूप नागरिकों को यह सब शहर पर किए जा रहे प्रयोग जैसा लगता है।

इससे यह प्रश्न भी उठता है कि ट्रैफिक ड्यूटी पर लगाए गए अधिकारियों की वास्तविक भूमिका क्या है? क्या वे केवल वीआइपी मूवमेंट के समय सड़कों पर दिखाई देने के लिए हैं? ऐसा क्यों होता है कि जब मुख्यमंत्री या राज्यपाल का काफिला गुजरता है, वरिष्ठ अधिकारी के साथ ही समूचा प्रोटोकॉल सक्रिय हो जाता है? क्या ये आला अफसर आम नागरिकों की रोजमर्रा की यातायात समस्याओं को समझने और हल करने के लिए भी तैनात किए गए हैं?

बार-बार, यह भी कहा जाता है कि शहर में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की संख्या आवश्यकता से कम है। यदि ऐसा है तो यह स्थिति और अधिक सक्रिय प्रबंधन की मांग करती है। सड़कें बंद करना या बैरिकेड खड़े कर देना आसान उपाय हो सकता है, लेकिन इससे समस्या समाप्त नहीं होती। इससे ​तो समस्या केवल अगले चौराहे तक खिसक जाती है।

ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव की समग्र समीक्षा जरूरी

राजधानी जयपुर में एक और प्रवृत्ति भी दिखाई देती है। अधिकारी आते हैं, कुछ प्रयोग लागू करते हैं और स्थानांतरण के बाद आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन उन प्रयोगों का असर लंबे समय तक नागरिकों को झेलना पड़ता है। इसलिए यह आवश्यक है कि हर बड़े ट्रैफिक निर्णय के पीछे स्पष्ट जवाबदेही और समय-समय पर समीक्षा की व्यवस्था हो।

नागरिकों का मानना है कि यदि आपके स्तर पर पहल हो, तो हालात में बहुत सुधार आ सकता है। जयपुर के प्रमुख मार्गों और चौराहों पर किए गए ट्रैफिक परिवर्तनों की समग्र समीक्षा कराई जाए, विशेषज्ञों की मदद से वैज्ञानिक ट्रैफिक सर्वे किए जाएं और नागरिकों से संवाद स्थापित किया जाए, तो स्थिति काफी बदली हुई दिखेगी। साथ ही यह भी जरूरी है कि ट्रैफिक अधिकारी समय-समय पर स्वयं सडक़ पर उतरकर व्यवस्था को देखें और लोगों से सीधे बात करें।

ट्रैफिक: जीवन की गति से जुड़ा प्रश्न

राजधानी का ट्रैफिक केवल एक विभाग का विषय नहीं है, यह शहर की जीवन गति से जुड़ा प्रश्न है। और ऐसे प्रश्नों का समाधान उच्च स्तर से ही होना चाहिए, इसलिए यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि आप अपने समस्त अधिकारों और अनुभव का पूरा उपयोग करते हुए इस दिशा में स्वयं आगे आएं और एक स्पष्ट, वैज्ञानिक तथा नागरिक-हितैषी ट्रैफिक व्यवस्था का मार्गदर्शन करें।

जयपुर तेजी से बढ़ता शहर है। यदि यहां की यातायात व्यवस्था सुविचारित और संतुलित होगी, तो वह पूरे प्रदेश के लिए एक उदाहरण बन सकती है। विश्वास है कि आप इस विषय को एक साझा चिंता के रूप में देखेंगे। एक ऐसे शहर की चिंता, जिसे हम सब मिलकर बेहतर और जीने योग्य बनाना चाहते हैं।