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भीतर की शक्ति जगाएं, आध्यात्मिक ऊर्जा से करें नववर्ष का शंखनाद

भगवान हम सब के अंदर बसते हैं। वे हमारा हर कार्य देख रहे हैं, लेकिन सामाजिक द्वंद्वों के कारण हम उन्हें पहचान नहीं पाते और उनसे संवाद स्थापित नहीं कर पाते।

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जयपुर

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Opinion Desk

Jan 01, 2026

-अमितासना दास अध्यक्ष, गुप्त वृंदावन धाम, जयपुर

नववर्ष का सूर्योदय अपने साथ नई आशाएं, नई उम्मीदें, नए संकल्प और नए रास्ते लेकर आया है। आज कैलेंडर की तारीख और साल बदल गए हैं और ये बदलाव इंगित करता है हमारी नई सोच और नजरिए को। कहते है 'चेंज इज द ओनली कॉन्स्टेंट थिंग' और ये परिवर्तन है नए रास्तों पर आगे बढऩे का और अपने सपनों को पूरा करने का। जीवन के कठिन रास्तों पर चलने के लिए हमें पर्याप्त शक्ति की आवश्यकता होती है और यह ऊर्जा हमें आध्यात्मिकता से मिलती है। ये ऐसी नाव है, जिस पर सवार होकर हम जीवन के गूढ़ सागर को पार कर सकते हैं। नववर्ष के पहले दिवस पर मैं आपसे ये अपील करता हूं कि आप जीवन में आध्यात्मिकता को शामिल करने का संकल्प लें और इसी संकल्प के साथ अपने जीवन के दूसरे संकल्पों को पूरा करने का प्रयास करें। प्रार्थना एक ऐसी शक्ति है, जो असंभव को भी संभव कर देती है।

गत वर्ष के आपके ऐसे बहुत सारे कार्य होंगे जो अभी पूरे नहीं हुए होंगे, जिन्हें आप इस वर्ष पूरा करना चाहेंगे और जिनके लिए आप नई रूपरेखा भी तैयार कर रहे होंगे। ऐसे बहुत से सपने होंगे, जिन्हें आप पिछले साल पूरा नहीं कर पाए लेकिन इस वर्ष आप पूरा करना चाहेंगे और मैं ये बात आपसे पूरे विश्वास के साथ कहता हूं कि अपने सपनों को साकार करने के लिए अगर आप प्रार्थना के द्वारा ईश्वर का हाथ पकड़ेंगे तो निश्चित ही आपके सभी सपने साकार होंगे और आपको अपने कार्यों में सफलता मिलेगी। हो सकता है शुरुआत में आपको कई मुश्किलों का सामना करना पड़े लेकिन विश्वास रखिए आध्यात्मिकता आपको ऐसी ऊर्जा देगी, जिससे आप अपने जीवन की सारी मुश्किलों को बड़ी ही आसानी से पार कर लेंगे। मैं आपको बड़ा ही सुनहरा मूलमंत्र दे रहा हूं जब भी आपको लगे कि कठिनाइयों के समय कोई रास्ता नहीं दिख रहा, तब बस, अपने अंदर बैठे ईश्वर से संवाद कीजिए, वे अवश्य ही आपको रास्ता दिखाएंगे। भगवान हम सब के अंदर बसते हैं। वे हमारा हर कार्य देख रहे हैं, लेकिन सामाजिक द्वंद्वों के कारण हम उन्हें पहचान नहीं पाते और उनसे संवाद स्थापित नहीं कर पाते। यकीन मानिए, जैसे ही हम अपने भगवान से प्रार्थना के द्वारा अपने भावों को स्पष्ट करेंगे, वैसे ही वे हमें आगे बढऩे का मार्ग दिखाएंगे। प्रार्थना तो एक माध्यम है ईश्वर से जुडऩे का, आध्यात्मिकता हमें अंधेरे से उजाले की ओर ले जाती है और जीवन में आगे बढऩे का मार्ग प्रशस्त करती है।

आज नूतन वर्ष प्रारंभ हो चुका है, हम हर साल नववर्ष के संकल्प लेते है, अपने सपनों, स्वास्थ्य, आदतों और अधूरे कार्यों को लेकर, इनमें से कुछ हम पूरे कर पाते हैं, कुछ नहीं। इस वर्ष आप एक अनूठा 'संकल्प' लीजिए और वह है जीवन में आध्यात्मिकता को शामिल करने का और फिर देखिए आपके जीवन में कैसा परिवर्तन आता है। इसे आप स्वयं महसूस करेंगे, आप जो भी कार्य करें उसमें प्रार्थना को शामिल करें। ये एक ऐसी औषधि है, जो नकारात्मकता के सारे रोगों को दूर कर देती है। जैसे-जैसे आप भगवान के नजदीक आते जाते हैं, आपको अपनी समस्याओं के हल अपने आप मिलने लग जाते हैं। जैसे-जैसे हम आध्यात्मिक जीवन में प्रगति करते हैं, वैसे-वैसे हम अपने अंदर शांति महसूस करने लगते हैं। हम 'रिएक्ट' करना बंद कर देते हैं और 'रिस्पॉन्ड' करना शुरू कर देते हैं, आध्यात्मिकता मानसिक के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य को भी लाभ पहुंचाती है, हमारा तनाव कम करती है। ईश्वर से जुडऩे के कई तरीके हैं जैसे ध्यान, नाम जप, धार्मिक किताबें पढऩा आदि, जिससे हमारे जीवन में सकारात्मकता आती है।

हम अपने जीवन से समस्याएं तो खत्म नहीं कर सकते क्योंकि ये तो जीवन का हिस्सा हैं लेकिन आध्यात्मिकता के द्वारा उनसे लडऩे की ताकत हम जरूर अर्जित कर सकते हैं। कितना ही कठिन समय हो, अगर हमने ईश्वर का हाथ पकड़ लिया तो फिर हमारी सफलता निश्चित है। इतना मुश्किल भी नहीं है ईश्वर का हाथ थामना, वो हमारे अंदर ही बसते हैं। अगर आप भगवान के नाम का जाप करते हैं तो आप सीधा उनसे जुड़ जाते हैं और उनकी कृपा आप पर बरसना शुरू हो जाती है। अपनी दिनचर्या में से कुछ समय आध्यात्मिकता के लिए निकालिए और फिर देखिए क्या बदलाव महसूस होता है। नववर्ष के पहले दिन ईश्वर से जुडऩे और कृपा पाने का संकल्प लीजिए और ये संकल्प सिर्फ एक वर्ष के लिए नहीं, बल्कि पूरे जीवन भर के लिए लीजिएगा। यह नया वर्ष सपने साकार करे, आपके जीवन में स्वास्थ्य, सम्पन्नता की वृद्धि हो।