मनोविश्लेषण के सिद्धांत का नेतृत्व में है अद्भुत महत्त्व, सफल लीडर बनने के लिए यह कौशल है आवश्यक
प्रो. हिमांशु राय
निदेशक, आइआइएम इंदौर
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मनोगतिकी अर्थात ‘साइकोडायनामिक्स’ का अच्छा और सफल लीडर बनने से क्या संबंध है, पिछले आलेख में हमने यह जाना। यह भी कि हमारी भावनाएं और अनुभव हमारे व्यवहार और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करते हैं और इसका असर न सिर्फ व्यक्तिगत, अपितु पेशेवर जीवन पर भी पड़ता है। यही कारण है कि एक लीडर के लिए ‘साइकोडायनामिक्स’ समझना अनिवार्य है।
सिगमंड फ्रायड द्वारा प्रस्तावित और विकसित, मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत यानी ‘साइकोएनालिटिक थ्योरी’ मानव मन के अचेतन घटकों को समझने का प्रयास करते हैं। फ्रायड ने सुझाव दिया कि मानव आचरण का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा अचेतन प्रेरणाओं और इच्छाओं से प्रेरित होता है और इन उद्देश्यों और आकांक्षाओं को समझने का तरीका अचेतन मन के विश्लेषण, या यों कहें कि ‘परीक्षा’ के माध्यम से होता है। इस सिद्धांत के अनुसार, मानव मानस को तीन अलग-अलग घटकों में विभाजित किया जा सकता है। इड - इदम् : यह मन का अचेतन, अधिक मौलिक घटक है जो किसी के सबसे मौलिक आवेगों और इच्छाओं द्वारा नियंत्रित होता है। ईगो - अहम् : यह मानस का सचेत पहलू है जो इड और बाहरी दुनिया के बीच मध्यस्थता करता है। सुपर ईगो - परा-अहम् : यह मन का नैतिक घटक है जो हमारे आचरण का मार्गदर्शन करता है।
तो नेतृत्व के लिए मनोविश्लेषणात्मक दृष्टिकोण क्या महत्त्व रखता है? यह सिद्धांत नेतृत्व के मनोविश्लेषणात्मक दृष्टिकोण की नींव बनाता है, जो यह समझने की कोशिश करता है कि एक लीडर अपने अचेतन से कैसे प्रभावित होता है। इस सिद्धांत के अनुसार, शक्तिशाली पदों वाले लोग पूरी तरह से तर्कसंगत कार्य नहीं करते हैं; बल्कि, वे इच्छा, भय और चिंता के एक जटिल मिश्रण से प्रेरित होते हैं जो चेतन और अचेतन दोनों हैं। यह बताता है कि एक प्रमुख किस तरह से व्यवहार करता है, साथ ही साथ उसके आचरण को कैसे ढाला और प्रभावित किया जा सकता है। इसी तरह लीडर अधीनस्थों का व्यवहार समझने में भी इसका उपयोग कर सकता है।
‘शैडो सेल्फ’ यानी ‘छाया आत्म’ की अवधारणा: शैडो सेल्फ की धारणा नेतृत्व पर मनोविश्लेषणात्मक परिप्रेक्ष्य के केंद्र में है। हमारे मानस का वह भाग जिसमें दमित आकांक्षा, भय और चिंता रहती हैं, शैडो सेल्फ कहा जाता है। हममें से प्रत्येक के पास शैडो सेल्फ है। यही हमारे अचेतन का मूल होता है। बचपन के दौरान हम कुछ ऐसे आग्रहों और कार्यों को दबाना सीखते हैं जिन्हें सामाजिक रूप से अनुचित माना जाता है। यह प्रक्रिया ही हमारे शैडो सेल्फ के निर्माण को जन्म देती है। ये दबी हुई इच्छाएं अंतत: हमारे अचेतन मन का हिस्सा बन जाती हैं, और उनमें हमारे जीवन के दौरान हमारे आचरण पर प्रभाव जारी रखने की क्षमता होती है।
एक लीडर की शैडो सेल्फ में अद्भुत शक्ति होने की क्षमता होती है जो उसके द्वारा लिए गए निर्णयों को प्रभावित करती है। जो लीडर अपने ‘छाया-आत्म’ के प्रति जागरूक है, वह इस जानकारी का उपयोग अपने स्वयं के आचरण के बारे में अपनी समझ को बेहतर बनाने और उच्च स्तर की जागरूकता के साथ निर्णय लेने में करता है। दूसरी ओर, जो प्रबंधक या प्रमुख अपनी इस परछाई से अनभिज्ञ होते हैं वे स्वयं को उन तरीकों से कार्य करते हुए पा सकते हैं जो उनके संगठन में हानिकारक या अनुत्पादक हैं। इस प्रकार, शैडो सेल्फ, साइकोडायनामिक्स और साइकोएनालिसिस एक लीडर के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।