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संपादकीय: कनाडा में अप्रवासियों के लिए आम चुनाव अहम

अप्रवासी बढऩे से कनाडा आवास के संकट के अलावा बढ़ती महंगाई और घटती नौकरियों की समस्या से भी जूझ रहा है। इन समस्याओं से निपटने में नाकाम रहने के कारण ही जस्टिन ट्रूडो को प्रधानमंत्री की कुर्सी छोडऩी पड़ी।

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जयपुर

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VIKAS MATHUR

Apr 28, 2025

भारत समेत दुनिया के तमाम देशों की नजरें कनाडा में 28 अप्रेल को होने वाले आम चुनाव पर टिकी हैं। इस बार के चुनाव डोनल्ड ट्रंप के टैरिफ और कनाडा को अमरीका का 51वां राज्य बनाने की धमकी की पृष्ठभूमि में हो रहे हैं।

अमरीका और कनाडा कभी दुनिया के बड़े कारोबारी साझेदार हुआ करते थे। दोनों के रिश्तों में कितनी खटास आ चुकी है, यह कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बयान से पता चलता है। उन्होंने कहा था कि ट्रंप के पैदा किए खतरे से निपटने के लिए हमें मजबूत जनादेश की जरूरत है। चुनाव प्रचार के दौरान कार्नी की लिबरल पार्टी ही नहीं, प्रतिपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी भी ट्रंप की आक्रामक नीतियों का खुलकर विरोध कर रही है।

कनाडा काफी समय से अप्रवासियों की समस्या से जूझ रहा है। वहां 2015 से लिबरल पार्टी की सरकार है, जिसकी कमान इस साल जनवरी तक जस्टिन ट्रूडो संभाल रहे थे। आरोप लगते रहे हैं कि ट्रूडो के शासन काल में लचीली इमिग्रेशन नीतियों के कारण कनाडा में अप्रवासियों के मामले में हालात बद से बदतर होते गए। कनाडा के अप्रवास, शरणार्थी और नागरिकता मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में 4,71,808 अप्रवासी कनाडा पहुंचे। यह संख्या 2022 के मुकाबले 7.8 फीसदी ज्यादा थी।

अप्रवासी बढऩे से कनाडा आवास के संकट के अलावा बढ़ती महंगाई और घटती नौकरियों की समस्या से भी जूझ रहा है। इन समस्याओं से निपटने में नाकाम रहने के कारण ही जस्टिन ट्रूडो को प्रधानमंत्री की कुर्सी छोडऩी पड़ी। मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद इमिग्रेशन, पीआर (स्थायी आवास) और स्टूडेंट परमिट से जुड़ी नीतियों में बड़े बदलाव किए गए। पीआर नियमों में बदलाव ने अप्रवासी विद्यार्थियों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। इनमें से ज्यादातर के पास स्टूडेंट और वर्क परमिट है। वे पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी भी करते हैं। इन दोनों परमिट की मियाद खत्म होने पर स्थायी आवास परमिट के अभाव में वे कनाडा में नहीं रह सकेंगे।

कनाडा में करीब 18.6 लाख भारतीयों में अच्छी-खासी संख्या विद्यार्थियों की है। इनमें से ज्यादातर पंजाब और गुजरात के हैं। अप्रवासी पहले से महंगाई, किफायती आवास और नौकरियों की कमी की समस्याओं से जूझ रहे थे। नई नीतियों ने ये चुनौतियां और बढ़ा दी हैं। आम चुनाव में अप्रवासियों पर अंकुश के साथ-साथ आवास संकट भी बड़ा मुद्दा है। आबादी के मुकाबले नए मकान नहीं बनने से कनाडा में हिसाब-किताब गड़बड़ा गया है। सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी और प्रतिपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी आवास संकट से पार पाने के दावे कर रही हैं।

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ कंजर्वेटिव पार्टी के नेता पियरे पॉलिवेर भी कई लाख नए मकान बनवाने का वादा कर रहे हैं। लेकिन अप्रवासियों को लेकर कनाडा का भावी रोडमैप क्या होगा, इसका दोनों ने स्पष्ट खुलासा नहीं किया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस मुद्दे पर कनाडा की नई सरकार लचीला रुख अपनाएगी, ताकि अप्रवासियों के लिए कनाडा में शिक्षा और रोजगार के द्वार खुले रहें।
— दिनेश ठाकुर