भारत की अध्यक्षता में आयोजित जी-20 की बैठकों में हुए विचार-मंथन की देश-दुनिया में चर्चा है। जी-20 का एक महत्त्वपूर्ण समूह कृषि कार्य से संबंधित है, जिसकी अलग-अलग शहरों में बैठकें हुईं। इनमें सतत कृषि के माध्यम से खाद्य सुरक्षा एवं जलवायु सहिष्णुता को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
नरेंद्र सिंह तोमर
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री
भारत की अध्यक्षता में आयोजित जी-20 की बैठकों में हुए विचार-मंथन की देश-दुनिया में चर्चा है। जी-20 का एक महत्त्वपूर्ण समूह कृषि कार्य से संबंधित है, जिसकी अलग-अलग शहरों में बैठकें हुईं। इनमें सतत कृषि के माध्यम से खाद्य सुरक्षा एवं जलवायु सहिष्णुता को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। हरित क्रांति के युग के बाद हाल के दशकों में हम स्वयं को एक जलवायु परिवर्तन की चुनौतीपूर्ण दुनिया में पाते हैं, जहां एक विश्वसनीय और सतत खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देना आवश्यक हो गया है। इस वर्ष भारत की जी-20 अध्यक्षता ने जलवायु-स्मार्ट दृष्टिकोण के साथ सतत कृषि पर विशेष ध्यान केंद्रित किया।
जी-20 सदस्य और आमंत्रित देशों के बीच चर्चा का एक प्रमुख क्षेत्र हरित और जलवायु-सहिष्णु कृषि का समर्थन करने के लिए वित्तपोषण तंत्र के साथ-साथ सतत कृषि उत्पादन के लिए जलवायु-सहिष्णु प्रौद्योगिकियों और कृषि मॉडल को बढ़ावा देना था। जी-20 देशों ने क्षेत्रीय, राष्ट्रीय व स्थानीय स्तर पर सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय मुद्दों से निपटने के लिए अच्छी कृषि पद्धतियों, विज्ञान और साक्ष्य-आधारित नवाचारों के उपयोग और अनुकूलन के महत्त्व पर जोर दिया है। जी-20 देशों ने जलवायु परिवर्तन की स्थितियों का सामना करने के लिए जलवायु-लचीली प्रौद्योगिकियों, प्रकृति-आधारित समाधानों और पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित उपागमों पर सहयोग करने का भी वादा किया है। इसके अलावा, कृषि कार्य समूह की बैठकों के परिणामों का उद्देश्य सतत कृषि का समर्थन करने के लिए पारंपरिक और स्थानीय ज्ञान के प्रसार को बढ़ावा देना, टिकाऊ पोषक तत्व और मिट्टी प्रबंधन के प्रति उनके समर्पण को दोहराना और एक एकीकृत 'वन हेल्थ' उपागम का पक्ष लेना है, जो अनेक क्षेत्रों तक विस्तृत हों। सतत कृषि की अपनी तलाश में, हम जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों, सटीक कृषि और जैविक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं।
कृषि में आपदा और जलवायु सहिष्णुता के लिए भारत सरकार ने अनेक कार्यक्रम कार्यान्वित किए हैं। परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत जैविक उत्पादों के विपणन के लिए राज्य द्वारा विभिन्न ब्रांड विकसित किए गए हैं। खाद्य सुरक्षा बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल होने की आवश्यकता है। भविष्य के लिए अनुकूल और सुरक्षित खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करने में सतत कृषि और जलवायु-स्मार्ट परिपाटियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। जी-20 के मंच के माध्यम से सामने आया मंथन किसानों की भलाई के लिए भी हरसंभव उपाय सुनिश्चित करेगा।