
YoungInvestors
सतीश सिंह, वरिष्ठ बैंकिंग एवं आर्थिक स्तंभकार
वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मी जेनरेशन-जेड यानी जेन-जी का बड़ा हिस्सा अभी शिक्षा, रोजगार या कॅरियर के शुरुआती पड़ाव पर है। इसके बावजूद शेयर बाजार में उसकी बढ़ती भागीदारी, उपभोग पर प्रभाव और ऋण चुकाने में दिख रहा अनुशासन संकेत देता है कि यह पीढ़ी भारतीय अर्थव्यवस्था की भावी दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
वित्त वर्ष 2019-20 से 2025-26 के बीच शेयर बाजार से जुड़े प्रत्येक 10 नए निवेशकों में लगभग 6 की आयु 30 वर्ष से कम रही है। वर्ष 2019-20 में कुल निवेशकों में जेन-जी की हिस्सेदारी 23.5 प्रतिशत थी, जो 2025-26 में बढकऱ 38.3 प्रतिशत हो गई। इस प्रकार छह वर्षों में उसकी भागीदारी करीब डेढ़ गुना हो चुकी है। नए निवेशकों में भी जेन-जी का अनुपात 52.1 प्रतिशत से बढकऱ 59 प्रतिशत हो गया। इसी अवधि में नए निवेशकों की औसत आयु 29 वर्ष से घटकर 27 वर्ष रह गई। इसका सीधा अर्थ है कि भारत में निवेश की शुरुआत अब पहले की तुलना में कम उम्र में हो रही है।
शेयर बाजार के कुल निवेशक आधार में जेन-जी की 38.3 प्रतिशत हिस्सेदारी
एक समय शेयर बाजार को बड़े शहरों, ऊंची आय वाले परिवारों और अपेक्षाकृत अधिक उम्र के निवेशकों का क्षेत्र माना जाता था। जेन-जी ने इस धारणा को काफी हद तक बदल दिया है। स्मार्टफोन, सस्ती इंटरनेट सेवा, आधार-आधारित सत्यापन, ऑनलाइन डीमैट खाते, डिजिटल भुगतान और निवेश मंचों ने छोटे शहरों तथा कस्बों के युवाओं के लिए भी बाजार के दरवाजे खोल दिए हैं।
शेयर बाजार के कुल निवेशक आधार में जेन-जी की 38.3 प्रतिशत हिस्सेदारी उसकी बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है। हर दस निवेशकों में करीब चार का इस पीढ़ी से होना भारतीय शेयर बाजार की सामाजिक और भौगोलिक संरचना में आ रहे व्यापक बदलाव को रेखांकित करता है।
युवा निवेशकों की बढ़ती संख्या के कारण घरेलू बचत का एक हिस्सा पारंपरिक जमा साधनों से निकलकर वित्तीय परिसंपत्तियों की ओर बढ़ रहा है। नियमित और दीर्घकालीन निवेश में वृद्धि होने पर कंपनियों को बाजार से पूंजी जुटाने में सुविधा मिलती है। इस पूंजी का उपयोग उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई परियोजनाएं शुरू करने और रोजगार सृजित करने में किया जा सकता है। इसलिए युवा निवेशकों की भागीदारी का प्रभाव केवल शेयरों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वास्तविक अर्थव्यवस्था तक भी पहुंचता है।
सेबी के निवेशक सर्वेक्षण 2025 के अनुसार, प्रतिभूति बाजार के उत्पादों के प्रति जेन-जी में जागरूकता 66 प्रतिशत थी, जो अन्य कई आयु-वर्गों की तुलना में अधिक है। इससे स्पष्ट है कि युवा केवल निवेश मंचों तक नहीं पहुंच रहे, बल्कि शेयर, म्यूचुअल फंड, विनिमय कारोबार वाले कोष और अन्य वित्तीय साधनों को समझने का प्रयास भी कर रहे हैं। कम उम्र में निवेश शुरू करने से उन्हें चक्रवृद्धि प्रतिफल का लाभ उठाने के लिए लंबी अवधि मिलती है।
ऋण लेने के साथ चुकौती में अनुशासन
जेन-जी को अक्सर आवेग में खर्च करने वाली और कर्ज पर निर्भर पीढ़ी के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन ऋण संबंधी आंकड़े इस धारणा का दूसरा पक्ष सामने रखते हैं। फिनटेक कंपनियों और नई पीढ़ी की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का कुल ऋण पोर्टफोलियो करीब 1.43 लाख करोड़ रुपए है। इसमें असुरक्षित ऋण की हिस्सेदारी लगभग 1.01 लाख करोड़ रुपए है, जिसमें से करीब 50,000 करोड़ रुपए का ऋण जेन-जी को दिया गया है। इस प्रकार इन संस्थानों के असुरक्षित ऋण में जेन-जी की हिस्सेदारी लगभग 49.5 प्रतिशत है।
संबंधित ऋणों की डिफॉल्ट दर दिसंबर 2024 में 0.42 प्रतिशत से घटकर जून 2025 में 0.35 प्रतिशत रह गई। यानी इसमें 0.07 प्रतिशत-बिंदु की कमी आई है। यह गिरावट संकेत देती है कि जेन-जी के अधिकांश उधारकर्ता समय पर ऋण चुका रहे हैं और असुरक्षित ऋण लेने के बावजूद उनमें वित्तीय अनुशासन दिखाई दे रहा है।
इसके बावजूद असुरक्षित ऋणों को लेकर सावधानी जरूरी है, क्योंकि इनमें किसी संपत्ति की जमानत नहीं होती। आसान डिजिटल ऋण, तत्काल स्वीकृति और आकर्षक प्रस्ताव युवाओं को आय से अधिक उधारी के लिए प्रेरित कर सकते हैं। एक ऋण चुकाने के लिए दूसरा ऋण लेना आगे चलकर वित्तीय दबाव और चूक का कारण बन सकता है।
उपभोग में प्रभावशाली भूमिका
भारत में जेन-जी की आबादी करीब 37.7 करोड़ है। उपलब्ध अध्ययनों के मुताबिक यह पीढ़ी प्रत्यक्ष रूप से अथवा पारिवारिक खरीद-निर्णयों के माध्यम से लगभग 860 अरब डॉलर (करीब 71 लाख करोड़ रुपए) के वार्षिक उपभोग को प्रभावित करती है। यह देश के कुल उपभोग का लगभग 43 प्रतिशत है। वर्ष 2035 तक जेन-जी से जुड़ा उपभोग करीब 1.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इससे आने वाले वर्षों में उसकी आर्थिक शक्ति और अधिक व्यापक होने का संकेत मिलता है। जेन-जी द्वारा प्रभावित 43 प्रतिशत उपभोग अर्थव्यवस्था में उसकी मांग-सृजन क्षमता को दर्शाता है। यह माँग उत्पादन, बिक्री, निवेश और रोजगार को गति देती है। युवा जिन उत्पादों और सेवाओं को प्राथमिकता देते हैं, कंपनियां उसी के अनुरूप उत्पादन, विपणन और निवेश की रणनीति बनाती हैं।
यह पीढ़ी केवल खरीदार ही नहीं है। वह ऐप-आधारित सेवाओं की उपयोगकर्ता, डिजिटल सामग्री की निर्माता, स्टार्टअप की संस्थापक, स्वतंत्र पेशेवर, ऑनलाइन विक्रेता और निवेशक है। कृत्रिम मेधा, वित्तीय प्रौद्योगिकी, ई-कॉमर्स, त्वरित वाणिज्य, डिजिटल मनोरंजन और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की मांग बढ़ाने में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है। इस तरह जेन-जी अर्थव्यवस्था में मांग और उत्पादन, दोनों पक्षों को प्रभावित कर रही है।
अवसर के साथ जोखिम भी
युवा निवेशकों की बढ़ती संख्या बाजार के लिए शुभ संकेत है, लेकिन डिजिटल दक्षता अपने आप वित्तीय परिपक्वता की गारंटी नहीं होती। सोशल मीडिया पर मिलने वाली अधूरी सलाह, प्रभावशाली व्यक्तियों की अप्रमाणित सिफारिशें, वायदा एवं विकल्प कारोबार का आकर्षण, क्रिप्टो परिसंपत्तियों की अस्थिरता और बिना पर्याप्त समझ के लिया गया असुरक्षित ऋण गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
शेयर बाजार दीर्घकालीन संपत्ति निर्माण का माध्यम है, त्वरित कमाई का साधन नहीं। जेन-जी को निवेश और सट्टेबाजी के अंतर, जोखिम-विविधीकरण, आपातकालीन कोष, बीमा, चक्र वृद्धि प्रतिफल और जिम्मेदार ऋण-व्यवहार की समझ देना आवश्यक है। वित्तीय संस्थानों और नियामकों को भी युवाओं के लिए सरल भाषा में वित्तीय शिक्षा, पारदर्शी ऋण शर्तें और प्रभावी निवेशक संरक्षण सुनिश्चित करना होगा।
जेन-जी की वास्तविक शक्ति केवल उसके युवा होने में नहीं, बल्कि तकनीक के साथ उसकी सहजता, सीखने की तत्परता और परंपरागत आर्थिक व्यवहार बदलने की क्षमता में है। यदि उसे रोजगार, गुणवत्तापूर्ण वित्तीय शिक्षा, जिम्मेदार ऋण और सुरक्षित निवेश के अवसर मिलते हैं, तो उसकी बचत उत्पादक पूंजी में बदल सकती है। इससे कंपनियों को दीर्घकालीन संसाधन, बाजार को व्यापक निवेशक आधार और अर्थव्यवस्था को टिकाऊ मांग मिलेगी।
जेन-जी के हाथ में स्मार्टफोन है और उसी स्क्रीन पर बैंक खाता, डीमैट खाता, ऋण, कारोबार तथा निवेश के अवसर भी हैं। चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि उसकी उंगलियां केवल बाजार की तेजी का पीछा न करें, बल्कि जोखिम को समझते हुए भविष्य की संपदा का निर्माण करें। ऐसा होने पर जेन-जी शेयर बाजार की नई सहभागी भर नहीं होगी, बल्कि भारत की निवेश-संस्कृति और आर्थिक विकास की मजबूत धुरी बन सकती है।
Updated on:
24 Jul 2026 06:18 pm
Published on:
24 Jul 2026 06:18 pm
