राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तीन साल: देश में जल्द स्थापित होगी एक डिजिटल यूनिवर्सिटी
धर्मेन्द्र प्रधान
केंद्रीय शिक्षा एवं कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री
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भारत में एक दौर में नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय स्तर के ज्ञान केन्द्र रहे हैं। हमारे वेद और उपनिषद भी सदियों तक ज्ञान के विशाल स्रोत बने रहे हैं। समय के साथ विदेशी आक्रांताओं ने इस ज्ञान संपदा को काफी नुकसान पहुंचाया लेकिन ये आक्रांता भारत के गुरुओं और योगियों से सदैव पराजित हुए। ऐसे में जब भारत, ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक स्तर पर पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है तो यह वक्त भी आ गया है जब हम एक बार फिर ज्ञान का केंद्र बनकर चौथी औद्योगिक क्रांति में दुनिया का नेतृत्व करें।
इन्हीं अपेक्षाओं के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2014 में देश की शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की वैश्विक ज्ञान महाशक्ति में बदलने का दृष्टिकोण रखा था। विभिन्न हितधारकों से विचार-विमर्श के बाद 29 जुलाई 2020 को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की शुरुआत की गई। 260 मिलियन से अधिक स्कूली बच्चों और 40 मिलियन से अधिक उच्च शिक्षा प्राप्त छात्रों के साथ यह दुनिया की सबसे बड़ी शिक्षा प्रणालियों में से एक है। एनईपी की तीसरी वर्षगांठ पर 29 जुलाई को ही दो दिवसीय शिक्षा समागम रूपी महाकुंभ का आयोजन भी किया जा रहा है। एनईपी के पिछले तीन साल उपलब्धियों भरे हैं। बच्चे के मस्तिष्क का अस्सी प्रतिशत से अधिक विकास आठ वर्ष की उम्र से पहले होता है। इसीलिए बच्चों की देखभाल व शिक्षा को औपचारिक स्कूली शिक्षा प्रणाली में एकीकृत किया गया है। ३ से 8 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए खेल आधारित शिक्षाशास्त्र पर जोर है।
नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (एनसीएफ-एसई) के तहत बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देते हुए करीब 150 नई पाठ्यपुस्तकें प्रकाशित होंगी। ये कम से कम 22 भारतीय भाषाओं में होंगी। प्रधानमंत्री ई-विद्या के माध्यम से पाठ्य-पुस्तकों के डिजिटल संस्करण भी सुलभ बनाते हुए पीएम श्री स्कूल भी देश भर में स्थापित किए जा रहे हैं। अध्ययनरत छात्रों और बीच में ही पढ़ाई छोडऩे वालों को कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण देने के लिए स्कूलों में 5000 कौशल केंद्र भी स्थापित किए जा रहे हैं। एकीकृत राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीआरएफ), कौशल शिक्षा एवं प्रशिक्षण क्षेत्रों में विभिन्न स्तरों पर एकाधिक प्रवेश और निकास को सक्षम बनाते हुए छात्रों को अपने जीवन में किसी भी समय उच्च शिक्षा प्रणाली में फिर से प्रवेश करने की अनुमति देता है। मान्यता के लिए क्रेडिट छात्र के अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) में जमा हो जाएगा। यह नीति प्रौद्योगिकी छात्रों को ऑनलाइन डिग्री कार्यक्रम हासिल करने में सक्षम बना रही है। शीघ्र ही देश में अलग तरह की डिजिटल यूनिवर्सिटी स्थापित की जाएगी। युवाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों का कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर विदेश में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के उद्देश्य से 30 अंतरराष्ट्रीय कौशल केंद्र भी स्थापित किए जा रहे हैं। जेईई, एनईईटी और सीयूईटी जैसी प्रमुख प्रवेश परीक्षाएं भी अब 13 भाषाओं में उपलब्ध हैं।
भारत के संस्थान विदेशों में परिसर स्थापित कर रहे हैं। आइआइटी मद्रास का जांजीबार-तंजानिया में अपने परिसर के साथ वैश्विक रूप से विस्तार हो रहा है। इस महीने के प्रारंभ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में संयुक्त अरब अमीरात में आइआइटी दिल्ली के परिसर को स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए। विदेशी विश्वविद्यालय भी गुजरात की गिफ्ट सिटी में अपने परिसर स्थापित कर रहे हैं। निकट भविष्य में विदेशों में एक स्कूल बोर्ड सहित अन्य भारतीय संस्थानों की उपस्थिति का और विस्तार करने की योजना भी है। अब जबकि एनईपी अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर रहा है, इसकी सफलता का मतलब होगा कि 2047 तक एक विकसित भारत बनेगा, जिसमें ज्ञान साझाकरण एवं शांति पर केंद्रित वैश्विक विश्व व्यवस्था होगी।