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Kota: अजीब दास्तां हैं ये…डॉक्टर बनने के लिए मारामारी, फिर भी हर साल सैकड़ों सीटें रह जाती खाली

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार साल में देश के चिकित्सा महाविद्यालयों में स्नातक की 3038 और स्नातकोत्तर की 14021 सीटें खाली रह गईं।

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कोटा

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Ashish Joshi

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आशीष जोशी

Mar 20, 2026

Medical Seat

Photo: AI

वाकई में यह अजीब दास्तां है। एमबीबीएस की करीब सवा लाख सीटों के लिए लगभग 23 लाख स्टूडेंट्स दिन-रात तैयारी करते हैं, फिर भी मेडिकल कॉलेजों में यूजी की सैकड़ों सीटें हर साल खाली रह जाती हैं। इतना ही नहीं, यूजी के बाद पीजी के लिए भी बेहद ‘टफ कॉम्पिटिशन’ होने के बावजूद हजारों सीटें रिक्त रह रही हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार साल में देश के चिकित्सा महाविद्यालयों में स्नातक की 3038 और स्नातकोत्तर की 14021 सीटें खाली रह गईं। दरअसल, यूजी में खाली रहीं अधिकांश सीटें निजी मेडिकल कॉलेजों की भारी-भरकम फीस वाली वो सीटें हैं, जो मध्यम वर्गीय परिवार वहन नहीं कर पाते। वहीं पीजी में नॉन-क्लिनिकल (एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री आदि) ब्रांचेज में एमबीबीएस डॉक्टरों की कम होती रूचि के कारण ऐसी हजारों सीटें हर साल खाली रह जाती हैं।

सबसे ज्यादा डॉक्टर देकर भी छठे स्थान पर हम

हैरानी की बात है कि कोटा-सीकर जैसी कोचिंग सिटी के बुते प्रदेश हर साल हजारों डॉक्टर देता है, लेकिन मेडिकल कॉलेजों के मामले में राजस्थान देश में छठें स्थान पर है। हमसे तो यूपी-महाराष्ट्र बेहतर िस्थति में है। उत्तरप्रदेश 88 मेडिकल कॉलेजों के साथ देश में पहले पायदान पर है। वहीं 85 कॉलेजों के साथ महाराष्ट्र दूसरे, तमिलनाडु (78) तीसरे, कर्नाटक (72) चौथे, तेलंगाना (66) पांचवें स्थान पर है। वहीं राजस्थान सरकारी और निजी मिलाकर कुल 49 मेडिकल कॉलेजों के साथ छठें पायदान पर है।

वर्षवार वृदि्ध : हर साल इतनी बढ़ोतरी

वर्ष UG सीट PG सीट
2021-228790 4705
2022-237398 2874
2023-249652 4713
2024-258641 4186
2025-2611682 8416

...और इतनी खाली रह गईं

वर्ष UG सीट PG सीट
2021-22141 3744
2022-232027 4400
2023-24490 3028
2024-25380 2849
2025-2611682 8416

  • 1,29,603 एमबीबीएस सीटों के लिए होगी नीट यूजी
  • 23 लाख के लगभग विद्यार्थी देंगे परीक्षा
  • 824 मेडिकल संस्थानों में होगा प्रवेश
  • 350 करोड़ से ज्यादा आमदनी नीट आवेदन से एनटीए को

निजी मेडिकल कॉलेजों में सीटें ज्यादा

  • सरकारी मेडिकल कॉलेज: 450, एमबीबीएस सीट : 63160
  • निजी मेडिकल कॉलेज: 374, एमबीबीएस सीट : 66443

काउंसलिंग में कुछ स्टूडेंट्स निजी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन तो ले लेते हैं, लेकिन बादमें कई कारणों से वे इतनी फीस जमा नहीं करवा पाते। कुछ को लोन नहीं मिल पाता और कुछ अन्य कारणों से फीस की व्यवस्था करने में सफल नहीं रहते। ऐसे में वह सीट खाली रह जाती है। पीजी में नॉन क्लिनिकल ब्रांचों के प्रति मेडिकोज का रुझान कम होने से सीटें रिक्त रह जाती हैं।


पारिजात मिश्रा, मेडिकल कॅरियर काउंसलिंग एक्सपर्ट

आजकल अधिकतर विद्यार्थी केवल क्लीनिकल विषयों में ही करियर बनाना चाहते हैं। वे नॉन-क्लीनिकल विषयों को चुनने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। यही कारण है कि प्री-क्लीनिकल और पैरामेडिकल विषयों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। दुर्भाग्य की बात यह है कि इस वर्ष इन विषयों की करीब 90 प्रतिशत सीटें खाली रह गई हैं। इससे कई मेडिकल कॉलेजों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है। सरकार को इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और ऐसे कदम उठाने चाहिए, जिससे विद्यार्थियों को प्री-क्लीनिकल और पैरामेडिकल विषयों की उपयोगिता और महत्व के बारे में जागरूक किया जा सके।
नितिन शर्मा, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, अनंता मेडिकल इंस्टीटयूट एंड रिसर्च सेंटर