भारत को पाकिस्तानी फौज की गतिविधियों पर पहले से ज्यादा नजर रखने की जरूरत है। घरेलू मोर्चे पर हताश वहां की फौज भारत की सुरक्षा के लिए खतरे खड़े कर सकती है।
पाकिस्तान के नए सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर कट्टर भारत विरोधी हैं, यह सभी जानते हैं। तीन साल पहले जब वह आइएसआइ प्रमुख थे, भारत में पुलवामा आतंकी हमले को अंजाम दिया गया था। भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक कर हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया था। अब पद संभालते ही जनरल मुनीर ने भारत को ‘मुंहतोड़ जवाब’ देने की बात कही है। सेना प्रमुख बनने के बाद पहली बार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) और गिलगित-बालटिस्तान दौरे पर पहुंचे जनरल मुनीर ने कहा कि अगर उनके देश पर हमला हुआ तो पाकिस्तानी सेना न सिर्फ अपनी जमीन की एक-एक इंच की हिफाजत करेगी, बल्कि युद्ध के लिए भी तैयार है। उनकी यह प्रतिक्रिया भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारत के नॉर्दर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी के हालिया बयानों को लेकर आई है। राजनाथ सिंह ने कहा था कि गिलगित-बालटिस्तान भारत का हिस्सा है, जबकि उपेंद्र द्विवेदी का कहना था कि पीओके को भारत में मिलाने के लिए सेना को सरकार के आदेश का इंतजार है।
जनरल मुनीर की भारत को यह धमकी घरेलू समस्याओं से अपनी जनता का ध्यान हटाने की कोशिश से ज्यादा कुछ नहीं है। दरअसल, इस समय पाकिस्तान पर उन विघटनकारी संगठनों का खतरा मंडरा रहा है, जिन पर वह अंकुश नहीं लगा सका है। इनमें पाकिस्तान का तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) शामिल है। इसी साल जून में इस संगठन के साथ पाकिस्तान सरकार ने युद्धविराम समझौता किया था। पाकिस्तान में मुजाहिदीनों के खिलाफ सेना के अभियान से नाराज टीटीपी ने जनरल मुनीर के पद संभालने से एक दिन पहले यह समझौता तोडक़र पाकिस्तान में आतंकी हमले शुरू करने का फरमान जारी कर दिया। दूसरी तरफ पाकिस्तान के लिए सिरदर्द की वजह है अफगानिस्तान का आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (आइएसकेपी), जिसने पिछले शुक्रवार को काबुल में पाकिस्तान दूतावास पर हुए हमले की जिम्मेदारी भी ली है।
आतंकी संगठनों को पालने-पोसने वाले पाकिस्तान के सामने टीटीपी और आइएसकेपी ने बड़ी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। फिलहाल वक्त का तकाजा यही है कि भारत के खिलाफ भड़ास निकालने के बजाय जनरल मुनीर घरेलू मोर्चे की चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी ऊर्जा और योग्यता का इस्तेमाल करें। अगर भारत को धमकी देना ही उनकी प्राथमिकता बना रहा, तो पाकिस्तान में हालात बद से बदतर होते जाएंगे। भारत को पाकिस्तानी फौज की गतिविधियों पर पहले से ज्यादा नजर रखने की जरूरत है। घरेलू मोर्चे पर हताश वहां की फौज भारत की सुरक्षा के लिए खतरे खड़े कर सकती है।