
hafiz saeed
पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। मुंबई में २००८ में २६ नवंबर को हुए आतंककारी हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद को रिहा कर रहा है। लश्करे तैयबा पर प्रतिबंध के बाद जमात उद दावा के नाम से नया संगठन खड़ा करने वाले सईद को जनवरी में नजरबंद किया गया था। लाहौर हाईकोर्ट ने उसे रिहा करने के आदेश दिए हैं। भारत ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पाकिस्तान पर एक खतरनाक आतंककारी को मुख्यधारा में लाने का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया है। इस फैसले से साफ जाहिर होता है कि पाकिस्तान आतंककारियों को पनाह व समर्थन देने की अपनी पुरानी नीतियों पर ही चल रहा है।
सईद ने भी रिहाई के आदेश के बाद कहा कि कश्मीरियों की आजादी की जंग को उनका समर्थन जारी रहेगा। सईद हरदम भारत के खिलाफ जहर उगलता रहा है। पहले लश्कर और अब जमात उद दावा के आतंकी उसकी शह पर कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों में दहशतगर्दी फैलाते रहे हैं। अमरीका ने भी सईद पर एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित कर रखा है। हालांकि उसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के अमरीका व भारत के प्रयासों पर चीन संयुक्त राष्ट्र में अड़ंगा लगाता रहा है। सईद की रिहाई के आदेश में कोर्ट ने कहा कि पाकिस्तान सरकार पर्याप्त सबूत पेश करने में विफल रही है। ऐसा कैसे संभव हो सकता है।
भारत समेत तमाम अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां २६/११ समेत तमाम आतंकी हमलों में हाफिज सईद का हाथ होने के अनेक सबूत पाकिस्तान सरकार को दे चुके हैं। साफ है इन सबूतों को पाक हुक्मरानों ने रद्दी की टोकरी में डाल दिया है। पाकिस्तान आतंकी सरगना को सजा दिलाने के लिए कभी गंभीर नहीं रहा। हालांकि ऐसे संकेत मिले हैं कि वह हाफिज को रिहा होते ही किसी अन्य मामले में गिरफ्तार कर सकता है।
इसके पीछे कारण साफ है। उसे अमरीका व अन्य यूरोपीय देशों से प्रतिबंध का डर है। फिर भी सईद के खिलाफ भारत को अपनी मुहिम जारी रखनी होगी। अब तो हमारे पास आसमान से ही बिना अंतरराष्ट्रीय सीमा पार किए आतंकी ठिकानों को तबाह करने की शक्ति ब्रह्मोस है। पाकिस्तान को यह साफ बता देना चाहिए कि यदि उसने आतंककारियों को पनाह देना जारी रखा तो परिणाम भुगतने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
बड़ी खबरें
View Allओपिनियन
ट्रेंडिंग
