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Patrika Opinion : बहुत जरूरी है वायु प्रदूषण पर लगाम

Patrika Opinion : गंगा के मैदानी क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर नियमित रूप से दुनिया में कहीं और पाए जाने वाले स्तर से बहुत अधिक है।
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नई दिल्ली

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Patrika Desk

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Updated: 2 Sep 2021, 8:01 AM IST

Patrika Opinion : बहुत जरूरी है वायु प्रदूषण पर लगाम

Patrika Opinion : बहुत जरूरी है वायु प्रदूषण पर लगाम

Patrika Opinion : देश में वायु प्रदूषण (Air pollution) की वजह से व्यक्ति की जीवन प्रत्याशा में कमी आई है। अगर प्रदूषण को लेकर हम सजग नहीं हुए तो जीवन प्रत्याशा में नौ साल तक की कमी हो सकती है। यह चौंकाने वाला खुलासा अमरीका के एक शोध समूह ने किया है। शिकागो विश्वविद्यालय (University of Chicago) के वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 48 करोड़ से अधिक लोग उत्तर में गंगा के मैदानी क्षेत्रों में रहते हैं। यहां प्रदूषण का स्तर नियमित रूप से दुनिया में कहीं और पाए जाने वाले स्तर से बहुत अधिक है। विश्वविद्यालय के 'एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट' के अध्ययन से पता चलता है कि अगर कोई व्यक्ति स्वच्छ हवा में सांस लेता है, तो वह कितने समय तक जीवित रह सकता है।

रिपोर्ट दावा करती है कि दिल्ली ने साफ हवा में सांस केवल गर्मियों में तब ली थी, जब पूरे देश में लॉकडाउन लगा हुआ था। अब देश के कई शहरों में हवा में प्रदूषण का स्तर सामान्य से काफी ज्यादा है। यह खुलासा नया नहीं है। इससे पहले भी कई रिपोर्टों में इस बात का खुलासा हुआ है कि देश में तेजी के साथ वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार शहरों का बेतरतीब विकास और वहां रहने वाले लोगों की लाइफ स्टाइल है। सड़कों पर बढ़ती गाडिय़ों की भीड़ भी लगातार कार्बन की मात्रा बढ़ा रही है। ऐसे में सवाल यही है कि सरकारें और नगरीय विकास विभाग शहर की योजनाओं को बनाते समय प्रदूषण जैसे मुद्दे पर गंभीरता से क्यों नहीं सोचते हैं? क्यों नहीं शहरी विकास की कार्ययोजना में प्रदूषण कम करने के बारे में चर्चा होती है? हम साफ सुथरी हवा को लोगों के मूलभूत अधिकार के तौर पर क्यों नहीं देखते हैं?

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विकास की अंधी दौड़ में हमने प्रदूषण खासकर वायु प्रदूषण को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है। नगर नियोजन की योजनाएं बनती हैं और कागजों में दफन हो जाती हैं। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत भी देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित 102 शहरों में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए अभियान चल रहा है। कोशिश है कि 2024 तक इसमें 20 से 40 फीसदी की कमी लाई जाए। यह दावा कागजों में ही बेहतर लगता है, लेकिन जब तक हम शहर की कार्य योजना में इस मद्दे को शामिल नहीं करेंगे, तब तक कुछ नहीं हो सकता। हमें इस पर एक बार फिर से सोचने की जरूरत है। शहर के लोगों के साथ जिम्मेदारों को आगे आने की जरूरत है, तभी नियोजित विकास के जरिए इस पर काबू पाया जा सकता है।