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PATRIKA OPINION डेटा लीक के खतरे हजार, सतर्कता जरूरी

हर बार डेटा लीक की ऐसी खबरें आती हैं तो एकाध दिन शोर मच कर रह जाता है। खबरों के खण्डन का दौर संबंधित प्लेटफार्म की तरफ से भी कम नहीं होता। ज्यादा ही शोर मचे तो जांच की खानापूर्ति होकर रह जाती है। जाहिर है सरकारों को तो ठोस कानूनी उपाय तो करने ही होंगे, साथ ही साथ सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वालों को खुद भी सतर्क रहना होगा।

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किसी भी व्यक्ति या संस्था का नाम-पता, मोबाइल नंबर व लोकेशन आदि की जानकारी किसी दूसरे के हाथ लग जाए तो खतरे हजार हैं। साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं की ओर से जब यह जानकारी सामने आती है कि फेसबुक (मेटा) से करीब एक लाख यूजर्स के पर्सनल डेटा लीक हो गए हैं तो ऐसे खतरों को लेकर चिंता बढऩा स्वाभाविक है। लीक हुआ यह डेटा ब्रीच फोरम पर भी उपलब्ध बताया जा रहा है। जाहिर है, किसी भी प्लेटफार्म के माध्यम से व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक होने पर साइबर अपराधियों की सक्रियता बढ़ सकती है और प्रभावित लोग आसानी से साइबर क्राइम के शिकार भी हो सकते हैं।
यह कोई पहली बार नहीं है जब सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिए लोगों की निजी जानकारी लीक होने के मामले सामने आए हैं। सूचना प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया के दौर में व्यक्तियों और कंपनियों के डेटा बेशकीमती होते जा रहे हैं। इसलिए इन्हें सुरक्षित रखने के जितने उपाय किए जा रहे हैं उससे ज्यादा तकनीक का गलत इस्तेमाल इन्हें लीक करने में हो रहा है। हालांकि अभी यह सामने आना बाकी है कि यह किसी साइबर अपराधी समूह की कारगुजारी है अथवा इसके पीछे हैकर्स या फिर अन्य कोई संस्था है। लेकिन जिन फेसबुक यूजर्स की निजी जानकारी इस तरह से लीक हुई है, वे फिशिंग हमले के आसान शिकार बन ही सकते हैं।
दुनियाभर में बढ़ते साइबर हमलों के कारण इंटरनेट पर मौजूद निजी जानकारी के लीक होने या उसका दुरुपयोग किए जाने की चिंता अकेले भारत की ही हो, ऐसा नहीं है। दुनिया के तमाम देश डेटा लीक के खतरों से आए दिन दो-चार होते हैं। इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल की कोई एक वजह नहीं है। आज के दौर में हर सुविधा के इस्तेमाल के लिए तकनीक का उपयोग जरूरी हो गया है। ऐसे में लोगों के डेटा सुरक्षित नहीं हो तो चिंता स्वाभाविक है। डेटा चोरी के साथ-साथ साइबर अपराध जिस तरह से चुनौती बनते जा रहे हैं, उसमें यह जरूरी हो गया है कि इनकी रोकथाम के उपाय भी मजबूती से हों। डिजिटल स्पेस में आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि यूजर्स का डेटा कितना सुरक्षित है?
हर बार डेटा लीक की ऐसी खबरें आती हैं तो एकाध दिन शोर मच कर रह जाता है। खबरों के खण्डन का दौर संबंधित प्लेटफार्म की तरफ से भी कम नहीं होता। ज्यादा ही शोर मचे तो जांच की खानापूर्ति होकर रह जाती है। जाहिर है सरकारों को तो ठोस कानूनी उपाय तो करने ही होंगे, साथ ही साथ सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वालों को खुद भी सतर्क रहना होगा।