क्या स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया जाना चाहिए?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 10 Jun 2021, 05:01 PM IST

पहला सुख निरोगी काया
कोविड़ - 19 महामारी के इस दौर में 'पहला सुख निरोगी कायाÓ वाली कहावत एक दम सच्ची प्रतीत होती है। इस दौर में हमने यह भी जाना कि स्वास्थ्य मामलों में अभी हमें बहुत आगे बढऩे की जरूरत है। स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बना देने से जनता की स्वास्थ्य जरूरतें भी सरकारों के एजेंडे में आ जाएंगी। वास्तव में स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बना देने से सरकारें सामूहिक नीतियां बनाने पर विवश हो जाती हैं और उसकी चिंता के दायरे में बड़ा वर्ग आ जाता है।
-अरुण कारपेंटर, अकतासा, झालावाड़
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स्वास्थ्य तंत्र का ढांचा मजबूत होगा
स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया जाना जरूरी है। मौलिक अधिकार के दायरे में आने से हर व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा सरकार की जिम्मेदारी बन जाएगी। स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाए जाने से स्वास्थ्य सेवा तंत्र का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा। कोरोना ने स्वास्थ्य सेवा तंत्र की खामियों को उजागर किया है।
-खुशवंत कुमार, चित्तौड़गढ़
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सुझाव पर अमल हो
भारत सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, जहां लोगों के मौलिक अधिकारों को न्यायिक रूप से सुरक्षा प्रदान की जाती है। इसमें स्वास्थ्य संबंधित अधिकारों को जोडऩा एक बढ़िया सुझाव है। स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार का दर्जा मिलने पर, लोग स्वास्थ्य के संबंध में जागृत होंगे, मिलावटी खाद्य सामग्री पर अंकुश लगाया जा सकेगा। जो दूसरों लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हैं, उनके लिए कड़ी सजा का प्रावधान जरूरी है। स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार का दर्जा देने के सुझाव पर अमल किया जाना चाहिए।
-रितु शेखावत जयपुर
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स्वास्थ्य सेवाओं को सरकार अपने हाथ में ले
सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह से अपने हाथ में ले ले, तभी प्राइवेट अस्पतालों की लूट से लोग बच सकते हैं। हाल-फिलहाल सरकारी अस्पतालों में लोगों को सस्ता और सुलभ इलाज मिला और वे निजी अस्पतालों की लूट से बच गए। सरकार को स्वास्थ सेवाओं के साथ शिक्षा की जवाबदारी भी अपने हाथों में ले लेनी चाहिए, ताकि बच्चों को सस्ती शिक्षा मिल सके।
-शकुंतला महेश नेनावा, इंदौर, मप्र
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जरूरी है स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाना
कोरोना वायरस के प्रसार ने इस बात को स्पष्ट कर दिया है कि स्वास्थ्य चिंताओं को लेकर एक साझा और समन्वित दृष्टिकोण के साथ आगे बढऩे की जरूरत है। इस मामले में विकासशील देशों और विकसित देशों की समझ में फर्क नहीं होना चाहिए, क्योंकि इस महामारी ने सभी देशों को प्रभावित किया है और सभी देशों में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे की कमियों को उजागर किया है। यह समय इस बात को समझने का है कि स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाना नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए जरूरी हो गया है।
-डॉ.अजिता शर्मा, उदयपुर
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ठोस कदम उठाने की जरूरत
अच्छा स्वास्थ्य सभी मनुष्यों की सबसे बुनियादी जरूरतों में से एक है। कोरोना काल में जीवन रक्षक उपकरणों की कालाबाजारी हुई। रोगियों के साथ अस्पतालों में उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। हर इंसान को गरिमापूर्ण जीवन तथा मृत्यु का अधिकार है। भारतीय नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधी मौलिक अधिकार दिलवाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। जाति, समुदाय और धर्म से परे प्रत्येक रोगी को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करवाई जानी चाहिए।
कनिष्क माथुर, जयपुर
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यूनिवर्सल हेल्थ सिस्टम की जरूरत
स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का निवास होता है। सरकार को स्वास्थ्य क्षेत्र में जन कल्याण तथा जन भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए नीति निर्देशक तत्वों में शामिल स्वास्थ्य क्षेत्र को अब मौलिक अधिकार का दर्जा देना चाहिए। हमें आने वाले भविष्य के लिए इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, वरना हम हमारे पड़ोसी देशों की अर्थव्यवस्था से भी पिछड़ जाएंगे। इस क्षेत्र पर अधिक खर्च कर एक यूनिवर्सल हेल्थ सिस्टम बनाया जाए, जिससे सभी को इलाज मिल सके।
-सिद्धार्थ शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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विकास का आधार स्वास्थ्य
देश के संविधान में जन स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न प्रावधान हैं। नीति निर्देशक सिद्धांतों में लोक स्वास्थ्य में सुधार करना राज्य का कर्तव्य माना गया है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण अनुच्छेद -21 है। यह नागरिकों को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है। बेहतर तो यह है कि स्वास्थ्य के अधिकार को एक मौलिक अधिकार के रूप मे चिह्नित किया जाए। देश मे अब भी स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। अगर व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा होगा तब ही वह अन्य सुविधाओं और संसाधनों का उपयोग कर पाएगा। स्वास्थ्य किसी भी देश के विकास के लिए महत्त्वपूर्ण मानकों मे से एक है।
तेजपाल गुर्जर, हाथीदेह, श्रीमाधोपुर
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जीवन के अधिकार में शामिल है स्वास्थ्य का अधिकार
स्वास्थ्य का अधिकार अप्रत्यक्ष रूप से अनुच्छेद 21 अर्थात जीवन एवं स्वतंत्रता के अधिकार में सम्मिलित माना गया है। आवश्यकता है स्वास्थ्य के अधिकार को लेकर जनता में जागरूकता फैलाई जाए, जिससे कि आमजन अपने इस अधिकार उचित क्रियान्वयन की मांग सरकार से कर सके। साथ ही सरकार का यह सर्वोपरि कर्तव्य है कि वह स्वास्थ्य के क्षेत्र में आधारभूत संरचना के विकास के लिए बेहतर से बेहतर प्रयास करें और स्वास्थ्य सुविधाओं को समावेशी स्तर प्रदान करते हुए स्वास्थ्य के अधिकार को लागू करने का भरसक प्रयत्न करें।
-रवि शर्मा, गंगापुर सिटी
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मौलिक अधिकार का दर्जा देना जरूरी
स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत बनाने के लिए स्वास्थ्य को मौलिक अधिकारों की श्रेणी में लाना बहुत जरूरी है। इस कोरोना महामारी ने हमारे स्वास्थ्य तंत्र की दुर्गति को उजागर कर दिया। लाखों लोगों ने बिना ऑक्सीजन के अस्पताल के बाहर ही दम तोड दिया। सभी गरीब , वंचित, ओर आम आदमी को बेहतर इलाज मिल सके, उसके लिए जल्द से जल्द सरकार को इस दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए।
-शिवओम पाराशर, अहमदाबाद, गुजरात
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जरूरी है स्वास्थ्य की रक्षा
जिस प्रकार शिक्षा को मूल अधिकार का दर्जा दिया गया है, उसी प्रकार स्वास्थ्य भी प्रत्येक व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकता है। इसलिए इसे मौलिक अधिकार का दर्जा दिया जाना चाहिए।
भागीरथ सिंह, गदरियावास(भींडर), उदयपुर
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जाएगा सकारात्मक संदेश
स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार का दर्जा देना उचित होगा। इस कदम से देश में स्वास्थ्य सेवा के पूरे तंत्र को मजबूत किया जा सकेगा । कोरोना महामारी के कारण हर कोई निराशा है। स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार का दर्जा देने से लोगों में सकारात्मक संदेश जाएगा। कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्गति उजागर हो गई है। ऑक्सीजन, बेड के अभाव के कारण हजारों लोगों ने दम तोड़ दिया। निजी अस्पतालों की मनमानी तथा लापरवाही भी उजागर हो चुकी है। सभी को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो, यह अति आवश्यक है। इसके लिए स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार का दर्जा देना जरूरी है।
- सरिता प्रसाद, पटना, बिहार
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स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करने की जरूरत
पहला सुख निरोगी काया को ध्यान में रखते हुए सरकार स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार में व्यापक रूप से स्थान दे सकती है। हमारे देश की बड़ी आबादी स्वास्थ्य पर खर्च के कारण गरीबी रेखा के नीचे चली जाती है। इसका कारण यह है कि भारत में स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च बहुत कम है। अब हमें स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार में शामिल करने पर ध्यान देना होगा। आने वाले समय में कोरोना वायरस के घातक वेरिएंट उत्पन्न हो सकते हैं। इसलिए स्वास्थ्य तंत्र मजबूत करने की जरूरत है।
-एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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कमियां आईं सामने
कोरोना महामारी के दौरान हमारी स्वास्थ्य सेवाओं की कमियां हमारे सामने है। सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल पाएं, इसके लिए स्वास्थ्य तंत्र को अधिक मजबूत बनाना होगा, ज्यादा संसाधन लगाने पड़ेंगे। स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाकर पूरे स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत किया जा सकता है। स्वास्थ्य को संवैधानिक अधिकार का दर्जा दिया जाए, यह समय की जरूरत है।
- दिव्यांश अमित शर्मा, श्रीमाधोपुर, सीकर
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संवैधानिक बाध्यता
देश में स्वास्थ्य सेवा के तंत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए स्वास्थ्य को मूल अधिकार का दर्जा देना जरूरी है। इससे गरीब, वंचित और आम व्यक्ति को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाने से राज्य स्वास्थ्य के प्रति संवैधानिक तौर पर बाध्य भी होंगे।
-नरेश सुथार, बीकानेर
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स्वस्थ शरीर का महत्व
स्वास्थ्य मनुष्य की पहली और प्रमुख आवश्यकता है, क्योंकि इसे ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का मूल माना जाता है। आत्मा को स्वस्थ बनाने रखने के लिए जिन गुणों की आवश्यकता है, उसमें पहला स्थान स्वस्थ शरीर का है। स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया जाना चाहिए।
-पारस रूहानी, जयपुर
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साकार होगी स्वस्थ भारत की कल्पना
स्वास्थ्य ही जीवन है और जीवन की समस्त गतिविधियों को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए शरीर का स्वस्थ होना बेहद जरूरी है। इसलिए स्वस्थ भारत की परिकल्पना को साकार रूप देने के लिए स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार का दर्जा मिलना बेहद जरूरी है। स्वस्थ राष्ट्र की मजबूत नींव पर ही सशक्त व समर्थ राष्ट्र का निर्माण संभव है !
- कैलाश सामोता , शाहपुरा, जयपुर
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स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार का दर्जा दिए जाने की जरूरत।
स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार का दर्जा दिए जाने की जरूरत है। आज कोरोना वायरस के चलते जनता में डरी हुई है। इस बीमारी ने तबाही मचाई है। लोगों में यह डर बैठ गया है कि न जानें कब उनकी सांसें बंद हो जाएं। कोरोना महामारी ने अपने से अपनों को दूर कर दिया है। चिकित्सा नहीं मिलने से कई लोगों को मौत हुई है। अतः: स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया जाना चाहिए।
-डॉ. अशोक, पटना, बिहार

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