इसमें कोई दोराय नहीं कि कार्बन तटस्थता की अवधारणा को जमीन पर लाने के लिए ऐसे लक्ष्य कारगर साबित हो सकते हैं। यह बात जरूर है कि ऐसे प्रयास जितने लुभावने लगते हैं, उतनी ही मुश्किलें इनको धरातल पर उतारने में सामने आती हैं।
कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए देशभर में हो रहे प्रयासों के बीच सिक्किम सरकार का ‘मेरो रुख मेरो संतति’ कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण को लेकर जनता के जुड़ाव की दिशा में अहम कदम माना जा सकता है। सिक्किम में इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक बच्चे के जन्म पर १०० पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। वहां जनता भी इस अभियान में रुचि दिखा रही है। इसमें कोई दोराय नहीं कि कार्बन तटस्थता की अवधारणा को जमीन पर लाने के लिए ऐसे लक्ष्य कारगर साबित हो सकते हैं। यह बात जरूर है कि ऐसे प्रयास जितने लुभावने लगते हैं, उतनी ही मुश्किलें इनको धरातल पर उतारने में सामने आती हैं।
जलवायु परिवर्तन के खतरे पिछले सालों में दुनिया भर में नई चुनौती के रूप में उभर कर सामने आए हैं। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस काम की जरूरत भी है। सब यह भी जानते हैं कि जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए सिक्किम जैसे संकल्प लेने की देश के दूसरे हिस्सों में भी आवश्यकता है। खास तौर पर उन इलाकों में जहां हरियाली चौपट होती जा रही है। हरियाली बढ़ाने के प्रयास परोक्ष रूप से लोगों को रोजगार देने वाले भी होंगे। ऐसे में दूरगामी फायदों को देखते हुए पौधारोपण के काम को किसी यज्ञ में आहुति की तरह से लिया जाना चाहिए। सिक्किम में यह अभियान सफल रहा तो निश्चित ही यह दूसरों के लिए प्रेरणा देने वाले मॉडल के रूप में भी अपनी जगह बनाएगा। सिक्किम की परिस्थितियां हरियाली के विस्तार की दृष्टि से अनुकूल हैं। लेकिन देश के कई राज्यों में इस तरह के अभियान चलाने और लक्ष्य को हासिल करने में चुनौतियां कम नहीं हैं। इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि वन क्षेत्रों के विस्तार और पौधारोपण के सरकारी स्तर पर जो प्रयास हुए हैं उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही। पौधारोपण कागजों में करने से लेकर जो पौधे लगाए जाते हैं उनको जीवित रखने के प्रयासों को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। बड़ी समस्या यह भी है कि शहरी क्षेत्रों में पौधारोपण के लिए समुचित जगह का अभाव है।
जिस तरह देश के शहर आबादी दबाव के कारण कंक्रीट के जंगलों में तब्दील होते जा रहे हैं वहां ऐसे प्रयास मजबूत संकल्प से ही पूरे हो सकते हैं। फिलहाल तो ऐसी जगह भी मुश्किल से मिलती है जहां कोई परिवार किसी सार्वजनिक स्थान पर पौधे लगा सके। नियोजित रूप से यह काम हो तो शहर हरे-भरे तो होंंगे ही, इन प्रयासों से नेट जीरो के लक्ष्य को भी आसानी से हासिल किया जा सकेगा।