
वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, मशीन लर्निंग, डिजिटल तकनीक और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। ऐसे पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच के साथ रोजगार के लिए तैयार करें। शिक्षा केवल सैद्धांतिक न होकर नवाचार और व्यावहारिकता से जुड़ी हो, ताकि छात्र बदलती दुनिया के अनुरूप खुद को ढाल सकें। - निर्मला वशिष्ठ, राजगढ़ (अलवर)
पाठ्यक्रम ऐसे हों जो डिग्री के साथ-साथ विद्यार्थियों में तकनीकी दक्षता और व्यावहारिक समझ विकसित करें। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि रोजगार योग्य बनाना भी होना चाहिए। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा, उद्यमशीलता, डिजिटल मार्केटिंग, अंतरराष्ट्रीय कानून और वित्तीय साक्षरता जैसे विषय शामिल हों। स्थानीय समझ और वैश्विक कौशल का संतुलन आज की आवश्यकता है। - लहर सनाढ्य, उदयपुर
बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए उनकी जिज्ञासा को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। उन्हें प्रश्न पूछने, तर्क करने और स्वयं समाधान खोजने का अवसर मिलना चाहिए। प्रयोग आधारित शिक्षा, विज्ञान किट, पुस्तकों और प्रकृति अवलोकन से सीखना अधिक प्रभावी बनता है। असफलताओं को सीख का हिस्सा मानते हुए संवाद और डिजिटल संसाधनों का रचनात्मक उपयोग बच्चों की सोच को गहराई देता है। - दीपु पाटीदार, झालावाड़
स्कूल शिक्षा में ऐसा वातावरण बनाया जाना चाहिए जो विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करे। इससे उनकी सृजनशीलता बढ़ेगी और पढ़ाई के प्रति रुचि भी मजबूत होगी। वैज्ञानिक सोच न केवल ज्ञान बढ़ाती है, बल्कि समस्याओं को समझने और समाधान खोजने की क्षमता भी विकसित करती है, जो आज के समय में अत्यंत आवश्यक है। - प्रियव्रत चारण, जोधपुर
उच्च गुणवत्ता वाली समावेशी शिक्षा के लिए पाठ्यक्रमों को पारंपरिक ढांचे से बाहर निकालना होगा। इन्हें आधुनिक, वैज्ञानिक और व्यावहारिक कौशलों पर केंद्रित किया जाना चाहिए। साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। भविष्य की नौकरियों के लिए व्यावसायिक, व्यवहारिक और कौशल आधारित शिक्षा का संतुलित मॉडल अपनाना आवश्यक है। - शिवजी लाल मीना, जयपुर
शिक्षा प्रणाली को ऐसा बनाया जाना चाहिए जो विद्यार्थियों को रोजगार योग्य, नवाचारी और सामाजिक रूप से जिम्मेदार बनाए। आज केवल पुस्तकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है। पाठ्यक्रमों को लचीला और बहुआयामी बनाकर तकनीकी और जीवनोपयोगी शिक्षा पर जोर देना होगा, ताकि विद्यार्थी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें। - डॉ. महेंद्र कुमार चौधरी, अजमेर
वर्तमान पाठ्यक्रम वैश्विक अपेक्षाओं को पूरी तरह पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए शिक्षा को रटने के बजाय कौशल और प्रयोग आधारित बनाना जरूरी है। विद्यार्थियों में क्रिटिकल थिंकिंग, समस्या समाधान, प्रभावी संचार और विदेशी भाषाओं का ज्ञान विकसित किया जाना चाहिए। इससे वे वैश्विक स्तर पर आने वाली चुनौतियों का बेहतर सामना कर सकेंगे। - डॉ. प्रेमराज मीना, करौली
शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर कौशल, नवाचार और व्यवहारिकता से जोड़ा जाना चाहिए। पाठ्यक्रमों में तकनीकी दक्षता के साथ उद्यमिता, स्टार्टअप संस्कृति, बिजनेस प्रबंधन और वित्तीय साक्षरता को शामिल करना जरूरी है। उद्देश्य ऐसे युवाओं को तैयार करना होना चाहिए जो नौकरी खोजने के बजाय रोजगार सृजन में सक्षम हों। - डॉ. मुकेश भटनागर, भिलाई (छत्तीसगढ़)
Published on:
23 Mar 2026 02:37 pm
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