पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं मिलीं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं…
प्लास्टिक की वस्तुओं से होने वाले नुकसान को समझें
हर घरेलू उपयोग में आने वाली प्लास्टिक की वस्तु के स्थान पर अन्य वस्तु को काम लेने का विकल्प मौजूद है। केवल उसे अपने व्यवहार में लाने की जरूरत है। यदि हम प्लास्टिक की वस्तुओं के दुष्प्रभाव को समझ जाएंगे तो फिर उसका इस्तेमाल भी नहीं करेंगे। धीरे धीरे यह हमारी आदत बन जायेगी। इस तरह हम प्लास्टिक का इस्तेमाल कम कर सकते हैं।
—राजकुमार पाटीदार, सुनेल, झालावाड़
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सरकार को करनी होगी सख्ती
दैनिक जीवन में प्लास्टिक का इस्तेमाल बहुत अधिक हो गया है। यह बहुत हल्का व मजबूत होता है। यह न केवल मिट्टी और भूजल को दूषित करता है बल्कि आवारा गायों के इसे खाने से मौत हो जाती है। पर्यावरण के लिए प्लास्टिक बहुत हानिकारक है। लोगों को इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना होगा। सरकार को भी इसे रोकने के लिए कानून बनाकार उसे अमल में लाना होगा।
कपड़े की थैली लेकर निकलें
दुकान पर सामान खरीदते समय घर से कपड़े के थैले लेकर निकलना चाहिए। इससे दुकानदारों को प्लास्टिक की थैली देेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार को भी प्लास्टिक की थैली पर बैन लगाना चाहिए एवं इसके विकल्प ढूंढ कर जनता को सौंपना चाहिए।
– प्रियव्रत चारण ’लव’,जोधपुर
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जागरूकता के साथ सख्ती भी हो
सरकार को प्लास्टिक उत्पादन इकाइयों पर निगरानी रखकर इन्हें बंद करवाना होगा। हर नागरिक का कर्तव्य है की बाजार खरीददारी करने जाते समय हमेशा कपड़े का थैला साथ रखे। बच्चों में भी इसकी आदत डालें। प्लास्टिक के विकल्प भी खोजने होंगे और उसे लोकप्रिय बनाना होगा।
— संजय डागा, हातोद, इन्दौर मध्यप्रदेश
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रीयूज व रिसाइकल पर जोर
प्लास्टिक के पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों के बारे में लोगों को जागरूक करना होगा । प्लास्टिक के उपयोग को कम करने हेतु विकल्पों जैसे कपड़े के बैग ,काग़ज़ व पत्तों से बने दोने पतल आदि को बढ़ावा देना होगा। प्लास्टिक की चीज़ों को रीयूज व रिसाइकल कर प्लास्टिक के पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सकता है।
— पलक कुमावत,जयपुर
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कपड़े के थैलों का हो इस्तेमाल
प्लास्टिक का उपयोग कम करने के लिए बाजार से समान लेने के लिए कपड़े के थैलों का इस्तेमाल हो। विवाह, शादी में चाय और खाने पीने हेतु स्टील या मिट्टी के बर्तनों का उपयोग हो । प्लास्टिक की वाटर बोतल बंद होनी चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति के जागरूक होने पर ही देश प्लास्टिक मुक्त हो पाएगा
— दिव्या मुंजाल
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स्वयं से पहल करें
समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझकर इसमें योगदान देना चाहिए। महिलाएं जब भी घर से निकले स्वयं कपड़े की थैली साथ में लेकर निकलें। साथ ही दूसरों को भी जागरूक करें । प्रकृति को बचाना है तो संकल्प लेना होगा कि कपड़े की थैली अपनाने का, पौधरोपण करने का और प्लास्टिक का उपयोग कम से कम करने का।
— भुवनेश्वरी मालोत, बांसवाड़ा (राज.)
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आदतें बदलनी होंगी
आम जिंदगी में अनिवार्य बन चुके प्लास्टिक के इस्तेमाल कम करने के लिए कपड़े या जूट के थैलों का उपयोग, प्लास्टिक की बोतलों की जगह तांबे, स्टील या कांच का गिलास उपयोगी रहेगा। प्लास्टिक उत्पादों का बहिष्कार कर पुनः प्रयोग और रीसाइकलिंग को बढ़ावा दें। इसी तरह खाने के पात्रों का भी चयन करें।
— अमृतलाल मारू 'रवि' इंदौर मप्र
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प्लास्टिक की हानियों से वाकिफ हों
प्लास्टिक से होने वाली हानियों के बारे में लोगों को जागरूक करना होगा। इसके लिए जनता की ओर से ही अभियान व रैलियां निकालनी चाहिए। स्वंयसेवी संस्थाओं की मदद ली जा सकती है। हम सभी को प्रण लेना चाहिए प्लास्टिक का इस्तेमाल
आमजन कम से कम करे। जोमेटो या स्विगी से गर्म खाना प्लास्टिक की थैलियों में आता है। यह काफी हानिकारक है। बहुत जरूरत होने पर ही बाहर से खाना मंगाना चाहिए।
—ओमप्रकाश श्रीवास्तव, उदयपुरा, मध्यप्रदेश