पाली कपड़ा उद्योग पर एक बार फिर छाये संकट के बादल

Avinash Kewaliya

Publish: Apr, 17 2018 10:47:34 AM (IST)

Pali, Rajasthan, India
पाली कपड़ा उद्योग पर एक बार फिर छाये संकट के बादल

कपड़ा उद्योग का क्लोजर शुरू

सीएम दौरे से पहले उद्योग शुरू होते हैं तो किसानों के विरोध का डर, नहीं किया तो एनजीटी के आदेश की आशंका

- पांच दिन का प्रारंभिक क्लोजर शुरू

- पहले दिन उपखण्ड अधिकारी और आरपीसीबी टीम ने देखी व्यवस्थाएं

पाली . कपड़े पर चटख रंगों की बदौलत देश-दुनिया में ख्याति प्राप्त कर चुके पाली के कपड़ा उद्योग के दामन पर लग रहे प्रदूषण के दाग का दंश व्यापारी, मजदूर और किसान भुगत रहे हैं। सोमवार से पांच दिन का क्लोजर शुरू हो चुका है। प्रारंभिक तौर पर 21 से पुन: उद्योग शुरू करना है। ऐसी चर्चा भी है कि किसानों के विरोध को देखते हुए डेमेज कंट्रोल के लिए सीएम के प्रस्तावित दौरे तक यह क्लोजर जारी रह सकता है। हालांकि, इस बीच आने वाली एनजीटी पेशी के दौरान क्लोजर जारी रखना खतरनाक साबित हो सकता है।
बीते लम्बे समय से पाली कपड़ा उद्योग के कारण प्रदूषण की ज्वलंत समस्या से जूझ रहा है। इसका कोई समुचित हल अब तक नहीं निकाला जा सका है। हाल के दिनों में ही पाली जल प्रदूषण, निवारण एवं अनुसंधान फाउंडेशन (सीईटीपी) की ओर से कई कोशिशों के बावजूद यदा-कदा रंग-रसायनयुक्त पानी नदी में प्रवाहित होकर नेहड़ा बांध होते हुए लूणी तक जाता रहा है। पिछले दिनों लूणी विधायक की ओर से विधानसभा में यह मसला प्रभावी तरीके से उठाए जाने के बावजूद हाल ही में नदी में रंग-रसायन युक्त पानी प्रवाहित हुआ है। इसी वजह से क्षेत्रीय किसान आंदोलित हो रहे हैं। यहीं प्रशासन की चिंता का सबसे बड़ा कारण है।

आक्रोश दबाने की तैयारी

इस मसले को लेकर किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारी जितने तल्ख तेवर अपनाए हुए हैं, उससे प्रशासनिक चिंता बढ़ गई है। बताया जाता है कि आगामी दिनों में सीएम वसुंधरा राजे के सामने या उनकी जनसुनवाई में किसान बड़े स्तर पर इस मामले को उठा सकते हैं। ऐसे में सीएम के सामने किसी अनहोनी को टालने के लिए ही कपड़ा उद्योग में पांच दिन का क्लोजर लिया गया है। अब चर्चा है कि यह क्लोजर बढ़ाया जा सकता है।

एक दिक्कत यह भी
कपड़ा उद्योग के सामने बड़ी दिक्कत यह है कि 23 अप्रेल को राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) में प्रदूषण के मसले पर सुनवाई होनी है। ऐसे में क्लोजर को यथावत रखने का आदेश दे दिया जाता है तो यह कपड़ा उद्योग के लिए बड़ा झटका होगा। पिछले साल उद्योगों के बंद रहने का यह सबसे बड़ा कारण रहा था।

टीम ने किया निरीक्षण

क्लोजर शुरू होते ही प्रबोधन समिति के अध्यक्ष जिला कलक्टर के निर्देश पर टीम ने सोमवार को औद्योगिक क्षेत्रों में निरीक्षण शुरू कर दिया। उपखण्ड अधिकारी महावीरसिंह के साथ आरपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी राजीव पारीक व पुलिस जाप्ता जांच के लिए पहुंचा। कई इकाइयों में फोटोग्राफी की। हालांकि किसी प्रकार की कार्रवाई से इनकार किया है।

इनका कहना...
पांच दिन का क्लोजर शुरू हो चुका है। इसकी पालना के लिए सभी को आदेश दे दिए गए हैं। जो कपड़ा भीगा हुआ है उसके लिए अलग से स्वीकृति लेनी होगी। मंगलवार को यह प्रक्रिया भी पूरी करेंगे। जब तक स्वीकृति नहीं मिलती उद्यमियों को काम पूरा बंद रखना होगा।

- सुरेश गुप्ता, अध्यक्ष, सीईटीपी ट्रस्ट

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