
पाली.
प्रथम विश्व युद्ध में इजराइल के हैफा शहर पर कब्ज़ा जमाने में पाली के वीर दलपतसिंह शेखावत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. पाली के ही अमानसिंह डिगरना का भी अहम् योगदान रहा. दलपतसिंह समेत भारतीय सैनिकों की वीरता की गाथाएं आज भी इजराइल में चर्चित है.
98 वर्ष पूर्व प्रथम विश्व युद्ध के दौरान पाली जिले के देवली गांव निवासी मेजर दलपतसिंह अपनी टुकड़ी के साथ 23 सितम्बर 1918 को हैफा शहर को मात्र एक घंटे में तुर्की फौज के कब्जे से मुक्त कराते वक्त शहीद हुए थे।
ये थे वीर उस दिन के
23 सितम्बर को जोधपुर लांसर्स के हमले में तुर्की सेना के पांव उखाडऩे में मेजर शहीद दलपतसिंह शेखावत की अहम भूमिका रही। उन्हें मिलिट्री क्रॉस से सम्मानित किया गया। कैप्टन अमानसिंह बहादुर, दफादार जोरसिंह को इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट एवं कैप्टन अनोपसिंह व सैकण्ड लेफ्टीनेंट सगतसिंह को मिलिट्री क्रॉस से नवाजा गया। दलपतसिंह ने तुर्की सेना की तोपों का मुंह उन्हीं की ओर मोड़ते हुए जबरदस्त वीरता का परिचय दिया था। एेसे में उन्हें हीरो ऑफ हैफा के नाम से पूरा इजराइल इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में पढ़ता है।
भारत में यह सम्मान
यह युद्ध जोधपुर और मैसूर लांसर्स की शानदार विजय का प्रतीक है। इसमें जर्मन-तुर्की सेना के 700 लोग बंदी बनाए गए। तोपों के खिलाफ घुड़सवार हमले का यह युद्ध इतिहास में अमर है। भारतीय सेना इस दिन को हैफा विजय दिवस के रूप में मनाती है। दिल्ली का तीन मूर्ति स्मारक इन वीरों के सम्मान में ही बनाया गया है। आमजन को इस इतिहास की जानकारी न के बराबर ह
Published on:
22 Sept 2016 08:34 pm

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